गंगा अध्याय 10 विविध रंग भारत के

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
आप अपने कक्षा-समूह में मिलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता पर आधारित एक पावरपॉइंट प्रस्तुति/पोस्टर/चार्ट/कोलाज तैयार कीजिए और इसे अपनी कक्षा में दिखाइए। आप भारत के विभिन्न राज्यों पर केंद्रित पावरपॉइंट प्रस्तुति/पोस्टर/चार्ट/कोलाज भी बना सकते हैं।
उत्तर

यह समूह में करने वाली गतिविधि है। नीचे पूरी कार्य-योजना दी गई है, जिसे आप ज्यों-का-त्यों अपना सकते हैं।

1. काम कैसे बाँटें (6 विद्यार्थियों का समूह) —

सदस्यज़िम्मेदारी
संयोजकविषय-सूची बनाना, समय-सीमा तय करना, अंत में सब सामग्री जोड़ना।
सामग्री-संग्रह (2)पुस्तकालय, पाठ्यपुस्तक और विश्वसनीय वेबसाइटों से जानकारी और चित्र जुटाना; हर जानकारी का स्रोत लिख लेना।
डिज़ाइन (1)रंग, शीर्षक, चित्रों की व्यवस्था — एक स्लाइड/एक भाग में एक ही मुख्य बात।
भाषा (1)वाक्य छोटे और शुद्ध रखना; हर स्लाइड पर पाँच-छह से अधिक पंक्तियाँ न हों।
प्रस्तुतकर्ता (1)कक्षा के सामने बोलना; पहले दो बार अभ्यास करना।

2. नमूना रूपरेखा — ‘विविध रंग भारत के’ (10 स्लाइड / 10 खाने वाला चार्ट)

क्रमशीर्षकउसमें क्या होगा
1आवरणशीर्षक ‘विविध रंग भारत के’, नीचे निराला की पंक्ति — “शतमुख-शतरव-मुखरे!”, और भारत का रंगीन मानचित्र।
2विविधता क्या हैएक वाक्य में विचार: भारत एक नहीं, अनेक स्वरों का देश है — और यही उसकी शक्ति है।
3भाषाएँआठवीं अनुसूची की 22 भाषाएँ; ‘नमस्ते’ या ‘उपज’ शब्द कई भाषाओं में (पाठ का ‘भाषा संगम’ बॉक्स यहीं काम आएगा)।
4पर्व और उत्सवबैसाखी, पोंगल, बिहू, ओणम, छठ, ईद, क्रिसमस, गुरुपर्व — चित्रों के साथ; नीचे लिखिए कि इनका साझा भाव क्या है।
5वेशभूषाराज्यवार पारंपरिक पहनावा — फुलकारी, पैठणी, मेखला-चादर, मुंडु, पगड़ी, घाघरा-चोली।
6नृत्य और संगीतभरतनाट्यम, कथकली, कथक, ओडिसी, मणिपुरी, कुचिपुड़ी, सत्रीया, मोहिनीअट्टम; लोकनृत्य — भांगड़ा, गरबा, बिहू, लावणी।
7चित्रकला और शिल्पमधुबनी (बिहार), वारली (महाराष्ट्र), पट्टचित्र (ओडिशा), फड़ (राजस्थान), गोंड (मध्य प्रदेश), कलमकारी (आंध्र)।
8भोजनएक ही अनाज के अनेक रूप — चावल से इडली, पखाल, खिचड़ी, पुलाव, चीला। इससे ‘विविधता में एकता’ सबसे स्वादिष्ट ढंग से समझ आती है।
9प्रकृति की विविधताहिमालय, थार, सुंदरवन, पश्चिमी घाट, समुद्र-तट — कविता की पंक्तियों के साथ।
10निष्कर्ष‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ — एक पंक्ति में समापन और स्रोत-सूची।

3. प्रस्तुति अच्छी बनाने के सूत्र —

  • एक स्लाइड, एक विचार। अधिक लिखा हुआ कोई नहीं पढ़ता।
  • चित्र बड़े और स्पष्ट हों; हर चित्र के नीचे एक पंक्ति का कैप्शन।
  • कविता की पंक्तियाँ जोड़िए — ‘कनक-शस्य’ के साथ खेत का चित्र, ‘धवल धार हार गले’ के साथ गंगा का, ‘मुकुट शुभ्र हिम-तुषार’ के साथ हिमालय का। इससे प्रस्तुति पाठ से जुड़ जाएगी।
  • कोई राज्य छूटे नहीं — विविधता दिखाते समय किसी क्षेत्र को छोड़ देना सबसे बड़ी चूक होती है। पूर्वोत्तर और द्वीप-समूह अवश्य रखिए।
  • स्रोत-सूची अंत में दीजिए — यह ईमानदारी का चिह्न है।
यदि कंप्यूटर उपलब्ध न हो: चार्ट पेपर पर कोलाज बनाइए — बीच में भारत का मानचित्र और चारों ओर पत्रिकाओं-अख़बारों से काटे चित्र, धागे से मानचित्र के उस राज्य से जोड़े हुए। यह प्रस्तुति पावरपॉइंट से भी अधिक सुंदर लगती है और पूरी कक्षा एक साथ काम कर सकती है।
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