पहले देखिए कि निराला ने यह काम कैसे किया — उन्होंने भारत को देवी मानकर प्रकृति से सजाया: लंका चरणों का कमल, वन-वनस्पति वस्त्र, फूल आँचल के रत्न, गंगा गले का हार, हिमालय मुकुट। अब यही काम हमें अपने राज्य की संस्कृति से करना है — यानी हर वस्तु के साथ यह भी बताना है कि वह क्यों चुनी गई।
अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए —
- शरीर के अंगों का क्रम हो — सिर से पाँव तक या पाँव से सिर तक; कविता की तरह।
- हर वस्तु के साथ एक पंक्ति का कारण हो। बिना कारण की सजावट केवल सूची बन जाती है।
- चुनी हुई चीज़ें सचमुच आपके राज्य की हों — काल्पनिक नहीं।
- अंत में एक वाक्य में यह भी कहिए कि यह सजावट क्या भाव बताती है।
नमूना उत्तर (उदाहरण के लिए — राजस्थान):
यदि मुझे भारत को एक मनुष्य के रूप में सजाने का अवसर मिले, तो मैं उसे अपने राज्य राजस्थान के रंगों से सजाऊँगा —
| अंग | किससे सजाऊँगा | क्यों |
|---|---|---|
| सिर | रंगीन पगड़ी (साफ़ा) | राजस्थान में पगड़ी केवल पहनावा नहीं, सम्मान और वचन का प्रतीक है। निराला ने सिर पर हिमालय का मुकुट रखा था; मैं वहाँ पगड़ी रखूँगा — क्योंकि दोनों का अर्थ एक ही है: ऊँचा माथा। |
| माथा | रखड़ी (माथे का आभूषण) और चंदन का तिलक | स्वागत और शुभता का चिह्न — ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा। |
| कान और गला | तिमणिया और आड़ जैसे पारंपरिक आभूषण | ये आभूषण पीढ़ियों से चले आते हैं, इसलिए ये परंपरा की निरंतरता के प्रतीक हैं। |
| वस्त्र | बांधनी और लहरिया की ओढ़नी, घाघरा-चोली | बांधनी का हर बिंदु हाथ से बाँधा जाता है — यह राजस्थान के श्रम और धैर्य का चित्र है। निराला के ‘वसन’ की जगह यहाँ यही आएगा। |
| आँचल | रोहिड़ा (राज्य-पुष्प) और केसरिया गेंदे के फूल | निराला ने ‘अंचल में खचित सुमन’ कहा था। रोहिड़ा को ‘मरुस्थल का सागवान’ कहते हैं — यह कठिनाई में भी खिलने का प्रतीक है। |
| हाथ | एक हाथ में बाजरे की बाली, दूसरे में जल का कलश | बाजरा यहाँ की मुख्य फ़सल है — यही ‘कनक-शस्य’ का राजस्थानी रूप है। कलश रेगिस्तान में जल के मोल की याद दिलाता है। |
| पाँव | पायल और मोजड़ी (जूती) | घूमर नृत्य की थाप और चलते रहने का भाव — संस्कृति रुकी हुई नहीं, चलती हुई चीज़ है। |
| साथ में | ऊँट, गोडावण (राज्य-पक्षी), खेजड़ी का वृक्ष | ऊँट मरुभूमि का साथी है; खेजड़ी वह वृक्ष है जिसके लिए खेजड़ली गाँव के लोगों ने प्राण दे दिए थे — यह पर्यावरण-रक्षा की सबसे बड़ी मिसाल है। |
| पृष्ठभूमि | अरावली की पहाड़ियाँ और दूर तक फैले धोरे (रेत के टीले) | राजस्थान की पहचान उसका भूगोल ही है — जैसे भारत की पहचान हिमालय और गंगा। |
यह सजावट क्या कहती है — इस पूरे रूप में एक ही भाव है: कम साधनों में भी सुंदरता और उल्लास बनाए रखना। जहाँ पानी कम है, वहाँ के लोग सबसे चटख रंग पहनते हैं — यही राजस्थान का उत्तर है जीवन को।