प्र1.
“कनक-शस्य-कमलधरे” — कविता में आए ‘शस्य’ शब्द का अर्थ ‘उपज’ भी होता है। नीचे ‘उपज’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। — इनके अतिरिक्त यदि आप ‘शस्य’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर
पहले पुस्तक की दी हुई सूची — तालिका के रूप में (पृष्ठ 173)
| भाषा | ‘उपज’ के लिए शब्द |
|---|---|
| हिंदी | जो उपजा हो, पैदावार, फसल |
| संस्कृत | शस्यम् |
| पंजाबी | उपज, पैदावार |
| उर्दू | पैदावार |
| कश्मीरी | पॉदावार |
| सिंधी | उपज, पैदावार |
| मराठी | पीक |
| गुजराती | ऊपज, पेदाश |
| कोंकणी | पीक |
| नेपाली | उब्जाबाली, उपज |
| बांग्ला | फसल |
| असमिया | शस्य, खेति, फचल, कृषि जात वस्तु |
| मणिपुरी | महै मरोङ् थाबा पोत्थोक |
| ओड़िआ | फसल, खेति |
| तेलुगु | पंट |
| तमिल | विळैच्चल् |
| मलयालम | विळ्वुं |
| कन्नड़ | बेळे फसलु |
अब ‘इनके अतिरिक्त’ — कुछ और भाषाओं तथा बोलियों के शब्द
(यह भाग आपको स्वयं अपने घर, गाँव और आस-पड़ोस से पूछकर भरना है। नीचे नमूने के रूप में कुछ शब्द दिए गए हैं — आप अपनी जानकारी से इनमें जोड़ सकते हैं।)
| भाषा / बोली | ‘उपज’ के लिए शब्द |
|---|---|
| अंग्रेज़ी | crop, harvest, produce, yield |
| भोजपुरी | फसल, उपज, पैदावार |
| अवधी | फसल, उपज, खेती |
| मगही | फसल, उपज |
| मैथिली | फसिल, उपज |
| ब्रजभाषा | फसल, उपज, खेती-बाड़ी |
| हरियाणवी | फसल, पैदावार |
| छत्तीसगढ़ी | फसल, उपज |
| राजस्थानी (मारवाड़ी) | फसल, पैदावार, ऊपज |
| बुंदेली | फसल, उपज |
इस सूची से क्या दिखता है — यही इस बॉक्स का असली पाठ: ध्यान से देखिए, अठारह भाषाओं में शब्द अलग-अलग हैं, पर वे दो-तीन परिवारों में बँट जाते हैं —
- ‘उपज/ऊपज/उब्जाबाली’ — हिंदी, पंजाबी, सिंधी, गुजराती, नेपाली — सबका मूल एक ही क्रिया है: ‘उपजना’।
- ‘फसल/फचल/फसलु/फसिल’ — बांग्ला, असमिया, ओड़िआ, कन्नड़, हिंदी — यह शब्द अरबी-फ़ारसी से आकर लगभग पूरे भारत में बस गया।
- ‘पीक/पंट/विळैच्चल्/विळ्वुं’ — मराठी, कोंकणी, तेलुगु, तमिल, मलयालम — यहाँ मूल अलग है, पर तमिल ‘विळैच्चल्’ और मलयालम ‘विळ्वुं’ आपस में बहन-भाषाएँ लगती हैं।
- ‘शस्य/शस्यम्’ — संस्कृत और असमिया दोनों में मिलता है — यानी कविता का शब्द आज भी जीवित है।
कैसे पता करें: अपने विद्यालय में ही यह काम हो सकता है। कक्षा में जितनी भाषाएँ बोलने वाले विद्यार्थी हैं, सबसे एक-एक शब्द पूछिए और श्यामपट पर लिखिए। अपने दादा-दादी और नाना-नानी से पूछिए — पुरानी पीढ़ी के पास प्रायः वे शब्द होते हैं जो अब लुप्त हो रहे हैं।