पंक्ति से जुड़ाव — कवि ने वन-वनस्पति को भारत का ‘वसन’ यानी वस्त्र कहा है। जिस दिन यह वस्त्र फट जाएगा, देश उघड़ जाएगा। इसीलिए वन-संरक्षण केवल पर्यावरण का नहीं, देश के सम्मान का प्रश्न है।
1. वन और वन्य-जीवन से जुड़े प्रमुख अधिनियम और प्रावधान
| अधिनियम / प्रावधान | वर्ष | मुख्य बात |
|---|---|---|
| भारतीय वन अधिनियम | 1927 | वनों को आरक्षित, संरक्षित और ग्राम-वन जैसी श्रेणियों में बाँटने और वन-उपज पर नियम बनाने का सबसे पुराना क़ानून। |
| वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम | 1972 | वन्य प्राणियों और पौधों की सूचीबद्ध प्रजातियों के शिकार तथा व्यापार पर रोक; राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य बनाने का आधार। |
| जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम | 1974 | नदियों-जलाशयों में प्रदूषण रोकने के लिए; इसी से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बने। |
| वन (संरक्षण) अधिनियम | 1980 | सबसे महत्वपूर्ण — वन-भूमि को ग़ैर-वन कामों (खनन, उद्योग, निर्माण) में बदलने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य। सन् 2023 में इसमें संशोधन हुआ और नाम बदलकर ‘वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम’ किया गया। |
| पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम | 1986 | पर्यावरण की रक्षा के लिए छाता-क़ानून; इसी के अंतर्गत पर्यावरण-प्रभाव आकलन (EIA) जैसी व्यवस्थाएँ आती हैं। |
| जैव विविधता अधिनियम | 2002 | देश की जैव-संपदा और परंपरागत ज्ञान की रक्षा; जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ गाँव-स्तर तक। |
| वन अधिकार अधिनियम (अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी — वन अधिकारों की मान्यता) | 2006 | वनों में पीढ़ियों से रहने वाले समुदायों के अधिकारों को मान्यता — क्योंकि वन बचाने में सबसे बड़ी भूमिका उन्हीं की है। |
| संविधान — अनुच्छेद 48क | — | राज्य का कर्तव्य: पर्यावरण की रक्षा और सुधार तथा वन एवं वन्य जीवों की रक्षा करना। |
| संविधान — अनुच्छेद 51क(छ) | — | नागरिक का मूल कर्तव्य: वनों, झीलों, नदियों और वन्य जीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करे और उसका संवर्धन करे। यही वह पंक्ति है जिसे हर विद्यार्थी को याद रखना चाहिए। |
2. कुछ प्रमुख कार्यक्रम और आंदोलन
- राष्ट्रीय वन नीति, 1988 — लक्ष्य रखा गया कि देश के लगभग एक-तिहाई भूभाग पर वन या वृक्ष-आवरण हो (पहाड़ी क्षेत्रों में दो-तिहाई)।
- संयुक्त वन प्रबंधन — वन विभाग और गाँव की समितियाँ मिलकर वन की देखभाल करें और उपज में हिस्सा पाएँ।
- प्रतिपूरक वनरोपण (CAMPA) — जहाँ वन-भूमि किसी परियोजना को दी जाए, वहाँ उतनी ही भूमि पर नया वन लगाना अनिवार्य।
- हरित भारत मिशन और वन महोत्सव — वृक्षारोपण के राष्ट्रव्यापी अभियान।
- चिपको आंदोलन (उत्तराखंड, 1970 का दशक) — गाँव के लोग, विशेषकर महिलाएँ, पेड़ों से चिपककर खड़े हो गए ताकि उन्हें काटा न जा सके। इससे भी पहले राजस्थान के खेजड़ली गाँव में अमृता देवी और उनके साथियों ने खेजड़ी के पेड़ बचाने के लिए प्राण दे दिए थे — यह विश्व के सबसे पुराने पर्यावरण-बलिदानों में गिना जाता है।
3. इन नियमों पर विचार — ये अच्छे क्यों हैं और कठिनाई कहाँ है
| पक्ष | विचार |
|---|---|
| क्यों ज़रूरी हैं | वन एक बार कटने पर तुरंत नहीं लौटते — एक बड़ा पेड़ बनने में दशकों लगते हैं। इसलिए काटने से पहले रोक लगाना ही एकमात्र रास्ता है। यही 1980 के अधिनियम का मूल विचार है। |
| सबसे कठिन प्रश्न | विकास और संरक्षण का संतुलन। सड़क, बाँध और खदान भी चाहिए, और वन भी। इसका उत्तर यही है कि हर परियोजना का पर्यावरणीय मूल्य पहले तौला जाए और कटे वन की भरपाई अवश्य हो। |
| वनवासियों का पक्ष | वन केवल लकड़ी नहीं, लाखों लोगों का घर और जीविका है। इसीलिए 2006 का वन अधिकार अधिनियम ज़रूरी था — जो समुदाय वन पर निर्भर है, वही उसकी सबसे अच्छी रक्षा भी करता है। |
| क़ानून काफ़ी नहीं | क़ानून तभी काम करता है जब समाज उसका साथ दे। चिपको आंदोलन कोई क़ानून नहीं था, फिर भी उसने वन बचाए। इसलिए जागरूकता क़ानून से भी बड़ी शक्ति है। |
4. नमूना शपथ — ‘मिलकर लें शपथ’
(कक्षा में सब मिलकर खड़े होकर बोलें)
“हम भारत के विद्यार्थी शपथ लेते हैं कि —
हम प्रतिवर्ष कम-से-कम एक पेड़ लगाएँगे और जब तक वह बड़ा न हो जाए, उसकी देखभाल करेंगे;
हम किसी हरे पेड़ को न काटेंगे, न कटने देंगे;
हम विद्यालय, मुहल्ले और नदी-तट पर कचरा नहीं फैलाएँगे और प्लास्टिक का उपयोग घटाएँगे;
हम पक्षियों के लिए जल और दाना रखेंगे तथा किसी जीव को हानि नहीं पहुँचाएँगे;
हम पानी और बिजली बर्बाद नहीं करेंगे;
और हम दूसरों को भी यही करने के लिए प्रेरित करेंगे —
क्योंकि वन, लता और पुष्प हमारे देश के वस्त्र और आभूषण हैं।”