प्र1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से— (क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है। (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है। (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। (घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है।
उत्तर
सटीक उत्तर — (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: इस विकल्प में तीन बातें हैं और तीनों के लिए कविता में अलग-अलग पंक्ति मौजूद है — यही इसे सबसे सटीक बनाता है।
- ज्ञान — “प्राण प्रणव ओंकार, / ध्वनित दिशाएँ उदार” — ओंकार भारत की आध्यात्मिक और ज्ञान-परंपरा का प्रतीक है। और संबोधन ही ‘भारति’ है, जिसका अर्थ शब्द-संपदा में सरस्वती, वाणी की अधिष्ठात्री दिया गया है — यानी ज्ञान की देवी।
- प्रकृति — “तरु-तृण-वन-लता वसन, / अंचल में खचित सुमन;”, “गंगा ज्योतिर्जल-कण”, “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” — वन, फूल, नदी और हिमालय, सब कुछ।
- संपन्नता — “कनक-शस्य-कमलधरे!” — सोने जैसी फ़सलें, यानी धन-धान्य से भरी भूमि।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| (क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है। | अधूरा | यह बात ग़लत नहीं है — लंका, सागर, गंगा और हिमालय सचमुच भूगोल हैं। पर यह विकल्प केवल एक हिस्सा पकड़ता है और ‘प्राण प्रणव ओंकार’ जैसी ज्ञान-पंक्ति तथा ‘कनक-शस्य’ जैसी समृद्धि-पंक्ति को छोड़ देता है। प्रश्न ‘विशेष रूप से’ पूछ रहा है, इसलिए उत्तर वही होगा जो पूरी कविता को समेटे। |
| (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है। | अधूरा | विविधता की झलक केवल अंतिम पंक्ति ‘शतमुख-शतरव-मुखरे!’ में है। एक पंक्ति के आधार पर पूरी कविता का विषय तय नहीं किया जा सकता। |
| (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। | सही ✓ | तीनों पक्षों के लिए कविता में स्पष्ट पंक्तियाँ हैं, और पुस्तक की अपनी भूमिका भी यही कहती है। |
| (घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है। | ग़लत | कविता में किसी खनिज की चर्चा नहीं है। ‘कनक’ (सोना) शब्द अवश्य आया है, पर वह खनिज के रूप में नहीं, फ़सल के रंग के उपमान के रूप में आया है — ‘कनक के समान शस्य’, यानी सोने जैसी पकी फ़सल। |