गंगा अध्याय 10 खोजबीन

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
देशप्रेम से संबंधित अन्य कविताएँ पुस्तकालय, इंटरनेट से खोजकर पढ़िए और किसी एक कविता का कक्षा में वाचन भी कीजिए।
उत्तर

यह खोज और वाचन का काम है। नीचे कविताओं की सूची, खोजने के भरोसेमंद स्रोत और वाचन की पूरी विधि दी गई है।

1. देशप्रेम से जुड़ी कुछ प्रसिद्ध हिंदी कविताएँ

कविताकविक्यों पढ़ें
वर दे, वीणावादिनि वर दे!सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’इसी पाठ की अगली खोज — संस्कृतनिष्ठ शब्दावली और संबोधन-शैली बिलकुल इसी कविता जैसी।
जय जय भारतमातामैथिलीशरण गुप्त‘झरोखे से’ में इसी का अंश दिया गया है — सरल भाषा में गहरी करुणा।
भारत माता ग्रामवासिनीसुमित्रानंदन पंतयहाँ भारतमाता महल में नहीं, गाँव में रहने वाली दुर्बल स्त्री है — निराला की भव्य छवि से बिलकुल उलटा और बहुत सोचने लायक चित्र।
पुष्प की अभिलाषामाखनलाल चतुर्वेदीछोटी, सरल और अत्यंत प्रभावशाली — फूल कहता है कि वह देवता पर नहीं, देश पर मिटने वालों के मार्ग पर पड़ना चाहता है।
झाँसी की रानीसुभद्रा कुमारी चौहानआपकी अपनी पाठ्यपुस्तक गंगा की अगली कविता (पाठ 11) — वीर रस और लय का सर्वोत्तम उदाहरण।
हिमाद्रि तुंग शृंग से (‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ भी)जयशंकर प्रसादछायावाद की एक और ओजस्वी राष्ट्र-वंदना; निराला से तुलना के लिए बहुत उपयुक्त।
हिमालय का संदेश / रश्मिरथी के अंशरामधारी सिंह ‘दिनकर’ओज गुण का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण; ऊँची आवाज़ में पढ़ने के लिए बना हुआ काव्य।
कदम मिलाकर चलना होगाअटल बिहारी वाजपेयीआज की भाषा में लिखी गई प्रेरक कविता, जो कक्षा-वाचन के लिए बहुत अच्छी रहती है।
वंदे मातरम्बंकिमचंद्र चट्टोपाध्यायहमारा राष्ट्रीय गीत — मूल रूप से संस्कृत-निष्ठ बांग्ला में; इसमें भी मातृभूमि को माँ के रूप में देखा गया है, ठीक इसी कविता की तरह।
सारे जहाँ से अच्छामुहम्मद इक़बाल‘मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ — भारत की उदारता का वही भाव जो निराला के ‘उदार’ शब्द में है।

2. कहाँ खोजें

  • विद्यालय और सार्वजनिक पुस्तकालय — कवियों की काव्य-संग्रह पुस्तकें और देशभक्ति-गीतों के संकलन।
  • NCERT ePathshala / DIKSHA और साहित्य अकादमी के डिजिटल संग्रह।
  • पाठ के पहले पृष्ठ (पृष्ठ 166) पर छपा QR कोड — उस पर 0901CH10 लिखा है; उसे स्कैन करके इस पाठ से जुड़ी अतिरिक्त सामग्री तक पहुँचा जा सकता है।
  • कोई भी पंक्ति तभी लिखिए जब वह किसी संपादित पुस्तक या विश्वसनीय संग्रह में मिल जाए — इंटरनेट पर बहुत-सी कविताएँ ग़लत कवि के नाम से घूमती रहती हैं।

3. कक्षा में वाचन कैसे करें

चरणक्या करें
1. चुनावऐसी कविता चुनिए जो 12–20 पंक्तियों की हो और जिसकी लय आपको स्वयं अच्छी लगे। जो कविता आपको अच्छी नहीं लगती, वह सुनने वाले को भी नहीं लगेगी।
2. समझवाचन से पहले हर कठिन शब्द का अर्थ देख लीजिए। जो पंक्ति समझ में न आए, उसे पढ़ते समय आवाज़ अपने आप लड़खड़ा जाती है।
3. भूमिकादो वाक्यों में कवि और कविता का परिचय दीजिए — “मैं माखनलाल चतुर्वेदी की ‘पुष्प की अभिलाषा’ सुनाऊँगा। इसमें एक फूल अपनी अंतिम इच्छा बताता है।”
4. ठहरावहर चरण के अंत में ज़रा-सा रुकिए। तुक वाले शब्द (जैसे करे–धरे–भरे) थोड़ा खींचकर बोलिए — इससे लय अपने आप बैठ जाती है।
5. भाववीर रस की कविता में स्वर ऊँचा और कसा हुआ; करुण भाव में धीमा और कोमल। एक ही सुर में पूरी कविता पढ़ देना सबसे बड़ी चूक है।
6. दृष्टि और मुद्राकाग़ज़ में सिर मत गाड़िए; बीच-बीच में सुनने वालों की ओर देखिए। सीधे खड़े होइए और हाथों का प्रयोग संयम से कीजिए।
7. अभ्यासघर पर कम-से-कम तीन बार ऊँची आवाज़ में पढ़िए — एक बार केवल अर्थ के लिए, एक बार केवल लय के लिए, और तीसरी बार दोनों के साथ।
सुझाव: जिस कविता का वाचन करें, उसकी एक पंक्ति चुनकर श्यामपट पर लिख दीजिए। सुनने वाले उस पंक्ति को देखते हुए सुनेंगे तो कविता उन्हें अधिक देर याद रहेगी।
प्र2.
इस कविता की तरह ही संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से युक्त निराला की एक अन्य कविता, ‘वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ पुस्तकालय, इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर

कविता का परिचय —वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है। यह सरस्वती-वंदना है, जो आज भी अनेक विद्यालयों में प्रार्थना के रूप में गाई जाती है। ‘वीणावादिनि’ का अर्थ है वीणा बजाने वाली, यानी सरस्वती; और ‘वर दे’ का अर्थ है वरदान दीजिए

आरंभ की पंक्तियाँ —

वर दे, वीणावादिनि वर दे!
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे!

सरल अर्थ — हे वीणा बजाने वाली (सरस्वती)! वरदान दीजिए। भारत में स्वतंत्रता का प्रिय स्वर और अमृत जैसा नया मंत्र भर दीजिए।

यह कविता इस पाठ से क्यों जोड़ी गई है — दोनों कविताओं में आश्चर्यजनक समानताएँ हैं। नीचे उन्हें आमने-सामने रखा गया है —

समानता का बिंदुभारति, जय, विजयकरे!वर दे, वीणावादिनि वर दे!
संबोधन किसे‘भारति’ — जिसका अर्थ शब्द-संपदा में सरस्वती और भारतमाता दोनों है।‘वीणावादिनि’ — स्पष्ट रूप से सरस्वती। दोनों कविताएँ एक ही देवी तक पहुँचती हैं।
भाषाअत्यंत संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त — शुचि, स्तव, प्रणव, शतरव।वही शैली — ‘स्वतंत्र-रव’, ‘अमृत-मंत्र’, ‘ज्योतिर्मय’, ‘जगमग’ जैसे तत्सम और सामासिक पद।
शैलीसंबोधन-शैली; टेक बार-बार लौटती है — करे, धरे, भरे, मुखरे।वही — ‘वर दे’ पूरी कविता में लौटता रहता है, इसलिए दोनों गेय हैं।
भावभारत का गौरव-गान और विजय की कामना।भारत के लिए स्वतंत्रता, नवीनता और ज्ञान की प्रार्थना। दोनों में केंद्र में ‘भारत’ ही है।
ओज गुणछोटे चरण, कसे हुए समास, उद्घोष का स्वर।वही वेग और वही उद्घोष — दोनों सामूहिक स्वर में गाने के लिए बनी हैं।
दोनों को साथ पढ़ने से क्या लाभ: पाठ की भूमिका बताती है कि निराला ने छायावादी कवियों में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया। इससे यह भ्रम हो सकता है कि उनकी सारी कविताएँ छंद-मुक्त हैं। ये दोनों कविताएँ इस भ्रम को तोड़ देती हैं — दोनों पूरी तरह तुकांत, लयबद्ध और गेय हैं। इससे यह समझ बनती है कि निराला ने छंद तोड़ा नहीं था, उसे बंधन नहीं रहने दिया था — जहाँ लय से बात बनती थी, वहाँ उन्होंने लय का पूरा उपयोग किया।

पढ़ते समय ये बातें नोट कीजिए —

  • कवि सरस्वती से क्या-क्या माँगता है — ध्यान दीजिए, वह अपने लिए कुछ नहीं माँगता, भारत के लिए माँगता है।
  • कौन-कौन से समासिक पद हैं — जैसे ‘स्वतंत्र-रव’, ‘अमृत-मंत्र’। उनका विग्रह कीजिए, ठीक वैसे ही जैसे इस पाठ में ‘शतदल’ और ‘ज्योतिर्जल’ का किया।
  • तुक-योजना क्या है और टेक कितनी बार लौटती है।
  • कौन-सा अलंकार बार-बार आता है (यहाँ भी अनुप्रास ही सबसे अधिक मिलेगा)।
कहाँ मिलेगी: निराला के काव्य-संग्रह अनामिका तथा उनकी प्रतिनिधि कविताओं के संकलनों में; निराला रचनावली के आठ खंडों में उनका संपूर्ण साहित्य प्रकाशित है। डिजिटल रूप में NCERT ePathshala/DIKSHA और साहित्य अकादमी जैसे विश्वसनीय मंचों पर देखिए। ध्यान रखिए — इंटरनेट पर इस कविता के कुछ पाठ-भेद भी मिलते हैं, इसलिए किसी संपादित पुस्तक का पाठ ही अंतिम मानिए।
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