कक्षा ९ हिंदी अध्याय 11 झाँसी की रानी के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
रचनाकार — सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ और आरंभिक शिक्षा भी वहीं हुई। वे अपने समय की प्रसिद्ध रचनाकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थीं और इसी कारण उन्हें दो बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से जनमानस में राष्ट्रीय चेतना जगाई। प्रमुख रचनाएँ — मुकुल , त्रिधारा (कविता संग्रह); बिखरे मोती , उन्मादिनी , सीधे-सादे चित्र (कहानी संग्रह); कदंब का पेड़ , सभा का खेल (बाल साहित्य)। मुकुल और बिखरे मोती के लिए उन्हें दो बार ‘सेकसरिया पुरस्कार’ मिला। सन् 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया। कथावस्तु — कविता 18 छंदों में रानी लक्ष्मीबाई की पूरी जीवन-कथा क्रम से कहती है — सन् 1857 का जागरण (छंद 1), बिठूर में बचपन और नाना के साथ शस्त्र-खेल (छंद 2–3), झाँसी में विवाह (छंद 4), र
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | अर्थ | पाठ की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| फ़िरंगी | अंग्रेज़, विलायती | “दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,” | फ़िरंगी शासन के विरुद्ध पूरा देश एक हो गया था। |
| मर्दानी / मर्दाना | बहादुर, पुरुषोचित | “खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥” | आग बुझाते समय उस लड़की ने मर्दानी हिम्मत दिखाई। |
| छबीली / छबीला | तेजस्वी, सुंदर, छबिवाली, सजीली | “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी,” | नए कपड़ों में वह और भी छबीली लग रही थी। |
| बरछी | छोटा भाला | “बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,” | संग्रहालय में पुराने ज़माने की बरछी रखी थी। |
| ढाल | तलवार, भाले आदि के आघात को रोकने का लोहे का बना कछुए की पीठ जैसा एक साधन | “बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,” | सैनिक ने ढाल पर वार रोक लिया। |
| कृपाण | तलवार | “बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,” | कृपाण की धार देखकर सब चुप रह गए। |
| गाथाएँ / गाथा | कथा, प्रशंसागीत | “वीर शिवाजी की गाथाएँ उसको याद ज़बानी थीं।” | दादी हमें वीरों की गाथाएँ सुनाती थीं। |
| अवतार | उतरना, नीचे आना, किसी देवता या ईश्वर का मनुष्यादि के रूप में जन्म लेना | “लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,” | लोग उन्हें करुणा का अवतार मानते थे। |
| नाना | माता का पिता, मातामह; अनेक प्रकार के, कई तरह के, विविध, अनेक, बहुत | “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी,” | मेले में नाना प्रकार के खिलौने सजे थे। |
| दुर्ग | गढ़, किला; कठिन या तंग रास्ता | “सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार,” | पहाड़ी पर बना दुर्ग आज भी खड़ा है। |
| सुभट | रणकुशल योद्धा | “सुभट बुँदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में,” | राजा की सेना में एक से एक सुभट थे। |
| विरुदावलि / विरुद | विस्तृत यशोगान, कीर्ति-गाथा; वह कविता आदि जिसमें किसी के यश आदि का वर्णन किया गया हो; प्रशंसासूचक पदवी | “सुभट बुँदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में,” | चारण राजा की विरुदावलि गाने लगे। |
| विधि | सृष्टि की रचना करने वाला (विधाता); कार्य करने का ढंग, संगति, मेल, प्रयोग, शास्त्रसम्मत व्यवस्था, धर्मग्रंथ, समय | “रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,” | विधि का लिखा कौन टाल सका है! |
| बिरानी / बिराना | पराया | “अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी।” | अपना घर एक ही दिन में बिराना हो गया। |
| बिसात | चौसर/शतरंज का बिछौना; हैसियत, शक्ति, सामर्थ्य, पूँजी | “उदैपूर, तंजोर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात,” | इतने बड़े काम के आगे मेरी क्या बिसात! |
| निपात | गिरना, चलाना, फेंकना, पतन, विनाश | “जब कि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात,” | उस नीति से छोटे उद्योगों पर वज्र-निपात-सा हुआ। |
| बेजार | दुखी, ऊबा हुआ | “रानी रोईं रनिवासों में बेगम ग़म से थीं बेजार” | रोज़-रोज़ की देरी से यात्री बेजार हो गए। |
| सन्मुख | सम्मुख, जो सामने हो; भिड़ने वाला, अनुकूल | “अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी,” | कठिनाई के सन्मुख वह डटकर खड़ा रहा। |
| कृतज्ञ | उपकार मानने वाला, एहसानमंद | “जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारत वासी,” | मैं आपकी सहायता के लिए कृतज्ञ हूँ। |
| अविनाशी | नाशरहित, अक्षय, नित्य | “यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,” | सच्चे विचार अविनाशी होते हैं। |
| मदमाती / मदमाता | मस्त, मदमत्त | “हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी,” | मदमाती हवा पूरे बाग़ को हिला रही थी। |
| स्मारक | किसी की स्मृति-रक्षा के अभिप्राय से संस्थापित संस्था, भवन, स्तंभ आदि; याद दिलाने वाला | “तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी।” | शहीदों की याद में गाँव में एक स्मारक बना है। |
| हरबोला | बुंदेलखंड क्षेत्र के लोकगायकों का एक समुदाय, जिसने रानी की गाथा गा-गाकर फैलाई | “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।” | हरबोलों के गीतों में इतिहास आज भी जीवित है। |
| कथात्मक कविता | ऐसी कविता जिसमें कविता और कहानी के तत्व परस्पर जुड़े होते हैं तथा घटनाओं का एक क्रम होता है | पुस्तक की परिभाषा — ‘कविता में कहानी’, पृष्ठ 186 | ‘झाँसी की रानी’ हिंदी की सबसे प्रसिद्ध कथात्मक कविता है। |
| अनेकार्थी शब्द | वह शब्द जिसके एक से अधिक अर्थ होते हैं | पुस्तक की परिभाषा — ‘शब्द एक अर्थ अनेक’, पृष्ठ 188 | ‘कर’ अनेकार्थी शब्द है — हाथ, टैक्स और किरण। |
| मुहावरा | ऐसा वाक्यांश जो अपने शाब्दिक अर्थ से भिन्न एक विशेष और लाक्षणिक अर्थ व्यक्त करता है | पुस्तक की परिभाषा — ‘मुहावरे’, पृष्ठ 189 | मुहावरों के प्रयोग से भाषा में सौंदर्य आ जाता है। |
| रण-चंडी | युद्ध की देवी चंडी; रणभूमि में उतरी हुई भयंकर रूपधारिणी शक्ति | “बहिन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आह्वान,” | अन्याय देखकर वह रण-चंडी बन गई। |
| वज्र-निपात | वज्र का गिरना; अचानक आ पड़ने वाली भारी विपत्ति | “जब कि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात,” | यह समाचार परिवार पर वज्र-निपात-सा गिरा। |
| वीर-गति | युद्ध में लड़ते हुए मृत्यु; वीर की गति | “घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी।” | सैनिक ने सीमा पर वीर-गति पाई। |
| नौलख हार | नौ लाख मूल्य का हार; अत्यंत बहुमूल्य आभूषण | “‘लखनऊ के लो नौलख हार’,” | कहानी में रानी के नौलख हार की बड़ी चर्चा थी। |
| सरे-आम | सबके सामने, खुले आम | “सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार,” | सरे-आम की गई बेईमानी सबसे बड़ी होती है। |
| खिलवार | खेल, खिलवाड़ | “सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार,” | उसके लिए पहाड़ चढ़ना खिलवार जैसा था। |
अभ्यास
- कविता की व्याख्या
- कविता की व्याख्या
- कविता की व्याख्या
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- कविता में कहानी
- साझा साथ/साझा संघर्ष
- व्याकरण की बात
- मुहावरे
- सृजन
- गतिविधियाँ
- भाषा संगम
- झरोखे से
- खोजबीन