गंगा अध्याय 11 भाषा संगम

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी।” — नीचे ‘बहन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। इनके अतिरिक्त यदि आप ‘बहन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर

पुस्तक ने पृष्ठ 190 पर जो सूची दी है, वह इस प्रकार है —

भाषा‘बहन’ के लिए शब्दभाषा‘बहन’ के लिए शब्द
हिंदीबहनअसमियाभनी, बाइ, बाइदेउ
संस्कृतभगिनी, स्वसृ:मणिपुरीमचन, मनाओ
पंजाबीभैंणओड़िआभउणी
उर्दूबहन, हमशीरातेलुगूअक्कॅ, चेल्लेलु
कश्मीरीबैनीतमिलतंगै, अक्का
सिंधीभेणमलयालमसहोदरि, पेङ्ङळ्
मराठीबहीणकन्नड़सोदरि, अक्क, तंगि
गुजरातीबहेनकोंकणीभयण
नेपालीबैनी, दीदीबांग्लाबोन, भगिनी

इनके अतिरिक्त कुछ और भाषाओं/बोलियों के शब्द (आप अपनी जानकारी के अनुसार और जोड़ सकते हैं) —

भाषा / बोली‘बहन’ के लिए शब्द
मैथिलीबहिन, दीदी
भोजपुरीबहिन, दीदी
अवधी / ब्रजबहिनी, बहिन
बुंदेलीबैन, बहिनी
छत्तीसगढ़ीबहिनी, दीदी
राजस्थानी (मारवाड़ी)बैन, बाई
हरियाणवीबहण, बेब
अंग्रेज़ीsister
सूची से एक सुंदर बात: ध्यान से देखिए तो अधिकांश शब्दों की जड़ एक ही है — संस्कृत का ‘भगिनी’। उसी से बना — बांग्ला ‘भगिनी’, ओड़िआ ‘भउणी’, कोंकणी ‘भयण’, सिंधी ‘भेण’, पंजाबी ‘भैंण’, मराठी ‘बहीण’, गुजराती ‘बहेन’, हिंदी ‘बहन’। दूसरी ओर दक्षिण की द्रविड़ भाषाओं में एक अलग परिवार दिखता है — तमिल ‘अक्का’, तेलुगू ‘अक्कॅ’, कन्नड़ ‘अक्क’। और तीसरी बात यह कि कई भाषाओं में दो शब्द हैं — बड़ी बहन के लिए अलग और छोटी के लिए अलग (तेलुगू में अक्कॅ = बड़ी, चेल्लेलु = छोटी; कन्नड़ में अक्क = बड़ी, तंगि = छोटी; नेपाली में दीदी = बड़ी, बैनी = छोटी)। हिंदी में यह अंतर शब्द से नहीं, ‘बड़ी/छोटी’ जोड़कर बताया जाता है।
कविता से जोड़िए: इस पंक्ति में ‘बहन’ शब्द विशेष है — लक्ष्मीबाई नाना साहब की सगी बहन नहीं थीं, मुँहबोली बहन थीं। यानी यह रिश्ता जन्म का नहीं, स्नेह का था। भारत की लगभग हर भाषा में ऐसे मुँहबोले रिश्तों के लिए भी वही शब्द चलते हैं — यही हमारी भाषाओं की साझी संस्कृति है।
प्र2.
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए। (वाक्य — “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी।”)
उत्तर

यह प्रश्न आपकी अपनी मातृभाषा माँगता है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। नीचे कुछ भाषाओं में यही वाक्य नमूने के रूप में दिया गया है — इसे देखकर आप अपनी भाषा में लिखिए।

भाषावाक्य
हिंदी (मूल)कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी।
भोजपुरीकानपुर के नाना के मुँहबोली बहिन ‘छबीली’ रहली।
अवधीकानपुर के नाना कै मुँहबोली बहिनी ‘छबीली’ रही।
बुंदेलीकानपुर के नाना की मुँहबोली बैन ‘छबीली’ हती।
मैथिलीकानपुरक नानाक मुँहबोली बहिन ‘छबीली’ छलीह।
मराठीकानपूरच्या नानांची मानलेली बहीण ‘छबीली’ होती.
गुजरातीकानपुरना नानानी मानेली बहेन ‘छबीली’ हती.
पंजाबीकानपुर दे नाना दी मूँहबोली भैण ‘छबीली’ सी।
बांग्लाकानपुरेर नानार पातानो बोन छिलेन ‘छबीली’।
उर्दूकानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थीं।
अंग्रेज़ी‘Chhabili’ was the adopted sister of Nana of Kanpur.
आपकी मातृभाषायहाँ अपनी भाषा में लिखिए
अनुवाद करते समय क्या ध्यान रखें:
  • ‘मुँहबोली’ का सही भाव लाइए। इसका अर्थ है — जन्म से नहीं, मान लेने से बना रिश्ता। मराठी में ‘मानलेली’, गुजराती में ‘मानेली’, बांग्ला में ‘पातानो’ — हर भाषा का अपना शब्द है। शब्द-दर-शब्द अनुवाद करने पर यह भाव मर जाता है।
  • क्रिया का रूप बदलता है। हिंदी का ‘थी’ भोजपुरी में ‘रहली’, अवधी में ‘रही’, मैथिली में ‘छलीह’, मराठी में ‘होती’ हो जाता है।
  • नाम मत बदलिए। ‘छबीली’ और ‘कानपूर’ नाम हैं, इसलिए हर भाषा में वैसे ही रहेंगे।
कक्षा में करने योग्य: कक्षा के हर विद्यार्थी से यही वाक्य उसकी मातृभाषा में लिखवाकर एक दीवार-पत्रिका बनाइए। इससे पता चलेगा कि एक ही कक्षा में कितनी भाषाएँ बैठी हैं — और यही ‘भाषा संगम’ का उद्देश्य है।
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