यह प्रस्तुति की गतिविधि है। पहले जान लीजिए कि समाचार, कविता से किन बातों में अलग होता है —
| बिंदु | कविता में | समाचार में |
|---|---|---|
| भाषा | अलंकार, रूपक, भावुक स्वर — ‘सिंहनी’, ‘रण-चंडी’ | सीधी, तथ्यपरक, बिना अतिशयोक्ति की भाषा |
| क्रम | आरंभ से अंत तक कथा-क्रम | सबसे नई और बड़ी बात सबसे पहले, फिर विवरण |
| वाक्य | लंबे, तुकांत, गेय | छोटे, स्पष्ट, वर्तमान या भूतकाल में |
| ब्योरा | भाव प्रमुख | स्थान, समय, कौन, क्या, कैसे — पाँचों प्रश्नों के उत्तर |
नमूना उत्तर — समाचार-वाचन की पूरी पटकथा (लगभग 3 मिनट):
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[संकेत-धुन के बाद, वाचक सीधे बैठकर] वाचक: नमस्कार। मुख्य समाचारों के साथ मैं आपके सामने हूँ। आज के प्रमुख समाचार — [शीर्षक — रुक-रुककर] अब विस्तार से — झाँसी से — आज झाँसी की रणभूमि पर रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी अद्भुत वीरता और शौर्य का परिचय दिया। प्राप्त सूचना के अनुसार अंग्रेज़ी सेना का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट वॉकर जब अपने जवानों के साथ आगे बढ़े, तो रानी ने स्वयं तलवार खींचकर उनका सामना किया। यह मुक़ाबला बराबरी का नहीं था — एक ओर पूरी सेना, दूसरी ओर अकेली रानी। इसके बावजूद वॉकर घायल होकर पीछे हटने पर विवश हुए। कालपी से — सूत्रों के अनुसार रानी ने एक ही यात्रा में लगभग सौ मील की दूरी बिना रुके तय की। इस यात्रा में उनका घोड़ा थककर गिर पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई। यमुना के तट पर हुई भिड़ंत में अंग्रेज़ी सेना को फिर पराजय का सामना करना पड़ा। ग्वालियर से — विजय के बाद रानी की सेना ने ग्वालियर पर अधिकार कर लिया है। अंग्रेज़ों के मित्र माने जाने वाले महाराजा सिंधिया राजधानी छोड़कर चले गए हैं। बताया जा रहा है कि जनरल स्मिथ की टुकड़ी को भी पीछे हटना पड़ा। रानी के साथ उनकी सखियाँ काना और मंदरा भी युद्धभूमि में डटी रहीं। पृष्ठभूमि — उल्लेखनीय है कि राजा गंगाधर राव के निधन के बाद अंग्रेज़ी शासन ने ‘व्यपगत नीति’ के अंतर्गत झाँसी को अपने राज्य में मिला लिया था। रानी ने इस निर्णय को कभी स्वीकार नहीं किया। संस्कृति डेस्क से — बुंदेलखंड के लोकगायक ‘हरबोले’ इन घटनाओं को गीतों में ढालकर गाँव-गाँव पहुँचा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में यही गीत इस गाथा को जीवित रखेंगे। वाचक: यही थे आज के प्रमुख समाचार। नमस्कार। |