प्र1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. ‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है? (क) देश का स्वाभिमान (ख) विद्रोह की चिंगारी (ग) स्वाधीनता का भय (घ) भारत की युवावस्था
उत्तर
सटीक उत्तर — (ख) विद्रोह की चिंगारी।
यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: पंक्ति को अकेले नहीं, पूरे छंद के साथ पढ़िए। ‘नई जवानी’ के ठीक बाद कवयित्री लिखती हैं — “गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी, / दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी, / चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।” यानी यह ‘जवानी’ केवल जोश या उम्र नहीं है — वह जोश है जो तलवार तक जाता है। ‘बूढ़ा भारत’ का अर्थ है वह भारत जो लंबे समय से हारा और थका बैठा था; उसी में जब फिर से लड़ने की शक्ति जागी, तो वही सन् 1857 का विद्रोह बना। इसीलिए ‘नई जवानी’ का भाव विद्रोह की चिंगारी ही है — और ‘चिंगारी’ शब्द कवयित्री की अपनी शब्दावली है, आगे वे स्वयं लिखती हैं — “यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी।”
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| (क) देश का स्वाभिमान | ग़लत | स्वाभिमान इस छंद में है ज़रूर, पर वह ‘नई जवानी’ का अर्थ नहीं है। स्वाभिमान एक भाव है, जबकि ‘जवानी’ यहाँ क्रिया में बदली हुई शक्ति है — मन में ठानना और तलवार का चमकना। ‘स्वाभिमान’ कहने से पंक्ति का आधा ही अर्थ आता है। |
| (ख) विद्रोह की चिंगारी | सही ✓ | ‘बूढ़े भारत’ में लौटी हुई शक्ति ने ही 1857 का रूप लिया — “चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।” |
| (ग) स्वाधीनता का भय | ग़लत | यह पंक्ति के ठीक उलटा है। छंद में भय कहीं नहीं है; उलटे भय टूट रहा है — “सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी।” भय अंग्रेज़ों में पैदा हो रहा है, भारतवासियों में नहीं। |
| (घ) भारत की युवावस्था | ग़लत | यह शब्दों का शाब्दिक अर्थ है, ‘भाव’ नहीं। देश की सचमुच कोई उम्र नहीं होती; ‘बूढ़ा’ और ‘जवान’ यहाँ रूपक हैं। प्रश्न ‘भाव’ पूछ रहा है, इसलिए शाब्दिक विकल्प उपयुक्त नहीं। |
याद रखिए: जब प्रश्न ‘भाव’ पूछे, तो शब्द का सीधा अर्थ देने वाला विकल्प प्रायः ग़लत होता है — उत्तर वह होता है जो पंक्ति के आगे-पीछे की पंक्तियों से सिद्ध हो।