पूरी भरी हुई तालिका इस प्रकार है। मोटे अक्षरों वाला अर्थ ही वह है जिस पर घेरा लगाना है —
| काव्य-पंक्ति (रेखांकित शब्द) | दिए गए अर्थ | कविता के संदर्भ में सही अर्थ |
|---|---|---|
| तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं (रेखांकित शब्द — तीर) | नदी का किनारा, बाण, सीसा | बाण |
| रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई | शास्त्र में लिखी व्यवस्था, प्रणाली, विधाता, तरीका | विधाता |
| रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में | युद्ध, संशय, युग्म | युद्ध |
| हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी | किसी पदार्थ का गोल पिंड, रस्सी/सूत/बर्फ का गोला, तोप से दागने वाले गोले, नारियल | तोप से दागने वाले गोले |
| मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी | आभा, गति, तेज चाकू (धार) | आभा |
हर अर्थ क्यों चुना गया —
तीर = बाण। पूरी पंक्ति है — “तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं”। ‘चलाना’ क्रिया के साथ ‘तीर’ का अर्थ केवल बाण बन सकता है — नदी का किनारा या सीसा (धातु) कोई ‘चलाता’ नहीं। यहाँ बात रानी के उस हाथ की है जो धनुष-बाण चलाता था।
विधि = विधाता। पंक्ति है — “रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई”। ‘दया आना’ किसी चेतन पर लागू होता है, किसी नियम या तरीके पर नहीं। इसलिए यहाँ ‘विधि’ का अर्थ है — सृष्टि की रचना करने वाला, यानी विधाता/भाग्य-विधाता। कवयित्री का भाव यह है कि जब भाग्य ही निर्दयी हो गया, तो और किससे आशा की जाए।
द्वंद्व = युद्ध। पंक्ति है — “रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में”। तलवार खिंचने के बाद जो होता है, वह लड़ाई है — ‘संशय’ (मन का द्वंद्व) या ‘युग्म’ (जोड़ा) यहाँ बैठता ही नहीं। ‘असमानों में’ जोड़कर कवयित्री यह भी बता देती हैं कि यह द्वंद्व बराबरी का नहीं था।
गोले = तोप से दागने वाले गोले। पंक्ति है — “हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी”। ‘मिटा देना’ और ‘विजय’ — दोनों युद्ध के शब्द हैं। किसी नगर को गोल पिंड, ऊन के गोले या नारियल से नहीं मिटाया जाता; उसे तोप के गोलों से मिटाया जाता है।
तेज = आभा। पंक्ति है — “मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी”। यहाँ रानी की आभा/प्रभा (यश और पराक्रम की चमक) चिता की अग्नि के तेज में जा मिलती है। ‘गति’ या ‘चाकू की धार’ वाला अर्थ लेने पर पंक्ति निरर्थक हो जाएगी। ध्यान दीजिए, यह शब्द एक ही पंक्ति में तीन बार आया है और तीनों बार आभा के ही रंग में — यही इस पंक्ति का सौंदर्य है।