प्र1.
1. “लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”, ब्रिटिश राज किस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था? अपने इतिहास के शिक्षक से पता लगाकर उस नीति के विषय में लिखिए।
उत्तर
वह नीति थी — व्यपगत का सिद्धांत, जिसे हड़प नीति और अंग्रेज़ी में Doctrine of Lapse कहा जाता है। इसे लॉर्ड डलहौजी ने लागू किया, जो सन् 1848 से 1856 तक भारत का गवर्नर-जनरल था।
नीति क्या कहती थी —
- यदि किसी देशी राज्य के शासक की मृत्यु अपनी संतान के बिना हो जाए, तो उसका दत्तक (गोद लिया) पुत्र उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा।
- ऐसी स्थिति में वह राज्य ‘लावारिस’ मान लिया जाएगा और ईस्ट इंडिया कंपनी में मिला लिया जाएगा।
- भारतीय परंपरा में गोद लेना पूरी तरह मान्य था — पुत्र न होने पर राजा गोद ले लेते थे और वही उत्तराधिकारी होता था। अंग्रेज़ों ने इसी परंपरा को अस्वीकार करके राज्य हड़पने का रास्ता बना लिया।
इसी नीति से छीने गए कुछ राज्य —
| राज्य | वर्ष | कविता में उल्लेख |
|---|---|---|
| सतारा | 1848 | “उदैपूर, तंजोर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात” |
| नागपुर | 1854 | “हुआ नागपुर का भी घात” |
| झाँसी | 1854 | “लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया” |
| संबलपुर, जैतपुर, उदयपुर, बघाट आदि | 1849–1854 | “उदैपूर ... की कौन बिसात” |
| अवध (लखनऊ) | 1856 | “लिया लखनऊ बातों-बात” — यह ‘कुशासन’ के बहाने लिया गया, हड़प नीति से नहीं; इसीलिए कवयित्री ने ‘बातों-बात’ कहा। |
झाँसी के साथ ठीक क्या हुआ: राजा गंगाधर राव की मृत्यु सन् 1853 में हुई। मृत्यु से पहले उन्होंने दामोदर राव को गोद लिया था। अंग्रेज़ों ने उस दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और सन् 1854 में झाँसी को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया। रानी लक्ष्मीबाई ने इसका डटकर विरोध किया — उन्हीं का प्रसिद्ध वाक्य है “मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी।” कवयित्री का व्यंग्य यहीं है: झाँसी लावारिस थी ही नहीं — वारिस मौजूद था। उसे घोषित लावारिस किया गया, ताकि हड़पा जा सके।
परिणाम: इस नीति ने देशी राजाओं में गहरा असंतोष भर दिया और यही 1857 की क्रांति के प्रमुख राजनीतिक कारणों में गिनी जाती है। कविता का छंद 8 इसी असंतोष की पूरी सूची है। सन् 1858 में जब शासन कंपनी से ब्रिटिश ताज के हाथ आया, तो महारानी विक्टोरिया की घोषणा में गोद लेने का अधिकार भारतीय राजाओं को लौटा दिया गया — यानी अंग्रेज़ों को स्वयं यह नीति वापस लेनी पड़ी।