यह कविता लक्ष्मीबाई के जीवन की घटनाओं पर आधारित है और अपनी संरचना में एक कथात्मक कविता है। कथात्मक कविता ऐसी कविता को कहते हैं जिसमें कविता और कहानी के तत्व परस्पर जुड़े होते हैं तथा घटनाओं का एक क्रम होता है। इस कविता में भी लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर वीरगति प्राप्त होने तक की कथा क्रम से देखने को मिलती है। पाठ की संरचना को समझते हुए इसमें वर्णित प्रमुख घटनाओं को समय-रेखा (टाइमलाइन) पर दर्शाएँ। (संकेत– लक्ष्मीबाई का बचपन, विवाह, अन्य घटनाएँ आदि।)
उत्तर
पहले यह देख लीजिए कि यह कविता कथात्मक क्यों है — इसमें कहानी के पाँचों तत्व मौजूद हैं: पात्र (लक्ष्मीबाई, नाना, डलहौजी, वॉकर, स्मिथ, ह्यू रोज़, काना-मंदरा), स्थान (बिठूर, झाँसी, कालपी, ग्वालियर), घटना-क्रम (बचपन से वीरगति तक), संघर्ष (रानी बनाम अंग्रेज़ी सत्ता) और चरम बिंदु (नाले पर अंतिम युद्ध)। अंतर बस इतना है कि यह कहानी गद्य में नहीं, गाए जाने योग्य छंद में कही गई है।
समय-रेखा (टाइमलाइन) —
कविता की घटनाओं की समय-रेखा — बचपन से वीरगति तक, छंद-क्रम के साथ।
वही समय-रेखा तालिका के रूप में (उत्तर-पुस्तिका में इसी तरह लिखिए) —
क्रम
घटना
कविता की पंक्ति (प्रमाण)
छंद
1
बचपन — बिठूर में नाना धुंधूपंत के साथ पढ़ना-खेलना; ‘छबीली’ नाम
विवाह — झाँसी के राजघराने में; रानी लक्ष्मीबाई बनकर झाँसी आना
“ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में”
4
4
राजा की मृत्यु — रानी का विधवा होना, राजा का निःसंतान जाना
“निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी”
5
5
झाँसी का हड़पा जाना — डलहौजी की नीति; किले पर ब्रिटिश झंडा
“लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”
6–7
6
देशव्यापी लूट — दिल्ली, लखनऊ, नागपुर, सतारा आदि का छिनना; रानियों के गहनों की नीलामी
“सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार”
8–9
7
विद्रोह की तैयारी — नाना का सामान जुटाना; रानी का रण-चंडी का आह्वान
“हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी”
10
8
क्रांति का फैलना — झाँसी, दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, पटना
“यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी”
11–12
9
वॉकर से द्वंद्व — लेफ्टिनेंट वॉकर घायल होकर भागा
“जख्मी होकर वॉकर भागा, उसे अजब हैरानी थी”
13
10
कालपी की दौड़ — सौ मील निरंतर; घोड़े की मृत्यु; यमुना-तट पर विजय
“रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार”
14
11
ग्वालियर विजय — सिंधिया का राजधानी छोड़ना
“विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार”
14
12
स्मिथ की पराजय — काना और मंदरा का साथ लड़ना
“अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी”
15
13
ह्यू रोज़ का घेरा — रानी चारों ओर से घिर गईं
“पर, पीछे ह्यू रोज आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी”
15
14
अंतिम युद्ध — नाले पर नया घोड़ा अड़ा; अकेली रानी पर वार पर वार
“रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार”
16
15
वीरगति — तेईस वर्ष की आयु में बलिदान; चिता ही दिव्य सवारी
“घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी”
16–17
16
अमर स्मृति — कवयित्री की श्रद्धांजलि — रानी स्वयं अपना स्मारक
“तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी”
18
ध्यान देने योग्य बात: समय-रेखा बनाते समय दो बातों का ध्यान रखिए — (1) घटनाएँ उसी क्रम में रखिए जिस क्रम में कविता उन्हें लाती है, क्योंकि कथात्मक कविता की पहचान ही उसका क्रम है; और (2) हर घटना के साथ कविता की एक पंक्ति प्रमाण के रूप में लिखिए — इससे उत्तर केवल सूची नहीं रह जाता, वह पाठ से जुड़ा उत्तर बन जाता है।
इतिहास से मिलान (यदि शिक्षक पूछें): राजा गंगाधर राव की मृत्यु सन् 1853 में हुई और झाँसी सन् 1854 में अंग्रेज़ी राज्य में मिला ली गई। क्रांति 10 मई 1857 को मेरठ से आरंभ हुई। झाँसी पर घेरा और उसका पतन अप्रैल 1858 में हुआ, ग्वालियर पर अधिकार 1 जून 1858 को, और रानी ने 17–18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय में वीरगति पाई। कविता में तिथियाँ नहीं दी गईं — वह घटनाओं का क्रम देती है, तिथियाँ नहीं; इसलिए समय-रेखा में तिथियाँ जोड़ना अतिरिक्त जानकारी होगी, आवश्यक नहीं।
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