प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उन पंक्तियों में आए मुहावरे ढूँढ़कर लिखिए और उन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य भी बनाइए। आपकी सुविधा के लिए एक उदाहरण दिया गया है। — 1. “अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी” (पुस्तक का हल किया हुआ उदाहरण)
उत्तर
पहले पूरी भरी हुई तालिका देख लीजिए (पहली पंक्ति पुस्तक ने स्वयं दी है) —
| क्रम | काव्य पंक्ति | प्रयुक्त मुहावरा | नया वाक्य |
|---|---|---|---|
| 1 | अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी | मुँह की खाना | मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीत जाएगा, लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी। (पुस्तक का उदाहरण) |
| 2 | डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया | पैर पसारना; काया पलटना | किरायेदार ने ऐसे पैर पसारे कि पूरा मकान ही अपना समझ बैठा। — नई नौकरी मिलते ही उसके परिवार की काया पलट गई। |
| 3 | राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया | पैरों ठुकराना (ठुकरा देना) | जिस मित्र ने कठिन समय में साथ दिया था, सफल होते ही उसने उसे पैरों ठुकरा दिया। |
| 4 | हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो / सोई ज्योति जगानी थी | सोई ज्योति जगाना | एक अच्छे शिक्षक का काम पढ़ाना ही नहीं, विद्यार्थियों के भीतर सोई ज्योति जगाना भी है। |
| 5 | मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी | धूम मचाना | गाँव की टीम ने ज़िला स्तर की प्रतियोगिता जीतकर पूरे इलाके में धूम मचा दी। |
अब पहली पंक्ति का मुहावरा — ‘मुँह की खाना’ —
- अर्थ — बुरी तरह पराजित होना; अपमानजनक हार खाना।
- शाब्दिक अर्थ से भिन्नता — शब्दों को अलग-अलग पढ़िए तो अर्थ बनता ही नहीं — ‘मुँह’ को कोई ‘खाता’ कैसे है? पर पूरा वाक्यांश मिलकर एक तीसरा अर्थ दे देता है। यही मुहावरे की पहचान है — पुस्तक ने इसे इन्हीं शब्दों में परिभाषित किया है: “ऐसे वाक्यांश जो अपने शाब्दिक अर्थ से भिन्न एक विशेष और लाक्षणिक अर्थ व्यक्त करते हैं”।
- कविता में इसका बल — कवयित्री यह नहीं कहतीं कि ‘स्मिथ हार गया’। वे कहती हैं ‘मुँह की खाई’ — इससे हार के साथ अपमान भी जुड़ जाता है। एक स्त्री से हारकर लौटना — जनरल स्मिथ के लिए यही सबसे बड़ी बात थी।
- मेरा नया वाक्य — बड़ी-बड़ी बातें करने वाली टीम पहले ही मैच में मुँह की खाकर लौट आई।
ध्यान रखिए: मुहावरा वाक्य में हमेशा क्रिया के रूप में ढलकर आता है — ‘खाना’ बदलकर ‘खानी पड़ी’, ‘खाकर’, ‘खाई थी’ हो जाता है। नया वाक्य बनाते समय मुहावरे को ज्यों-का-त्यों चिपकाइए नहीं, वाक्य के अनुसार उसका रूप बदलिए।