गंगा अध्याय 11 मुहावरे

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उन पंक्तियों में आए मुहावरे ढूँढ़कर लिखिए और उन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य भी बनाइए। आपकी सुविधा के लिए एक उदाहरण दिया गया है। — 1. “अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी” (पुस्तक का हल किया हुआ उदाहरण)
उत्तर

पहले पूरी भरी हुई तालिका देख लीजिए (पहली पंक्ति पुस्तक ने स्वयं दी है) —

क्रमकाव्य पंक्तिप्रयुक्त मुहावरानया वाक्य
1अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थीमुँह की खानामोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीत जाएगा, लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी। (पुस्तक का उदाहरण)
2डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई कायापैर पसारना; काया पलटनाकिरायेदार ने ऐसे पैर पसारे कि पूरा मकान ही अपना समझ बैठा। — नई नौकरी मिलते ही उसके परिवार की काया पलट गई।
3राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकरायापैरों ठुकराना (ठुकरा देना)जिस मित्र ने कठिन समय में साथ दिया था, सफल होते ही उसने उसे पैरों ठुकरा दिया।
4हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो / सोई ज्योति जगानी थीसोई ज्योति जगानाएक अच्छे शिक्षक का काम पढ़ाना ही नहीं, विद्यार्थियों के भीतर सोई ज्योति जगाना भी है।
5मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थीधूम मचानागाँव की टीम ने ज़िला स्तर की प्रतियोगिता जीतकर पूरे इलाके में धूम मचा दी।

अब पहली पंक्ति का मुहावरा — ‘मुँह की खाना’ —

  • अर्थ — बुरी तरह पराजित होना; अपमानजनक हार खाना।
  • शाब्दिक अर्थ से भिन्नता — शब्दों को अलग-अलग पढ़िए तो अर्थ बनता ही नहीं — ‘मुँह’ को कोई ‘खाता’ कैसे है? पर पूरा वाक्यांश मिलकर एक तीसरा अर्थ दे देता है। यही मुहावरे की पहचान है — पुस्तक ने इसे इन्हीं शब्दों में परिभाषित किया है: “ऐसे वाक्यांश जो अपने शाब्दिक अर्थ से भिन्न एक विशेष और लाक्षणिक अर्थ व्यक्त करते हैं”।
  • कविता में इसका बल — कवयित्री यह नहीं कहतीं कि ‘स्मिथ हार गया’। वे कहती हैं ‘मुँह की खाई’ — इससे हार के साथ अपमान भी जुड़ जाता है। एक स्त्री से हारकर लौटना — जनरल स्मिथ के लिए यही सबसे बड़ी बात थी।
  • मेरा नया वाक्य — बड़ी-बड़ी बातें करने वाली टीम पहले ही मैच में मुँह की खाकर लौट आई।
ध्यान रखिए: मुहावरा वाक्य में हमेशा क्रिया के रूप में ढलकर आता है — ‘खाना’ बदलकर ‘खानी पड़ी’, ‘खाकर’, ‘खाई थी’ हो जाता है। नया वाक्य बनाते समय मुहावरे को ज्यों-का-त्यों चिपकाइए नहीं, वाक्य के अनुसार उसका रूप बदलिए।
प्र2.
2. “डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया” — इस पंक्ति में आया मुहावरा ढूँढ़कर लिखिए और उसका प्रयोग करते हुए नया वाक्य बनाइए।
उत्तर

इस एक पंक्ति में दो मुहावरे हैं।

मुहावराअर्थपंक्ति में भावनया वाक्य
पैर पसारनाधीरे-धीरे अपना अधिकार या विस्तार बढ़ाना; जितनी जगह मिली उससे अधिक घेर लेनाअंग्रेज़ पहले थोड़ी-सी जगह में व्यापार करने आए थे; फिर एक-एक करके पूरे देश पर अधिकार जमाते चले गए।जंगल काटकर बस्ती ने ऐसे पैर पसारे कि नदी का किनारा तक ढँक गया।
काया पलटनारूप या दशा का पूरी तरह बदल जानाजो कल तक याचक था, वह आज शासक बन बैठा — व्यापारी का रूप पलटकर राजा का हो गया।नई सड़क और पुल बन जाने से हमारे गाँव की काया पलट गई।
दोनों मुहावरे एक साथ क्यों: ध्यान दीजिए, ये दोनों मुहावरे मिलकर एक क्रम बनाते हैं — पहले ‘पैर पसारना’ (धीरे-धीरे फैलना), फिर ‘काया पलटना’ (एकदम बदल जाना)। यही अंग्रेज़ी सत्ता की पूरी कहानी है: विस्तार धीरे-धीरे हुआ, पर एक दिन रूप बिलकुल बदल गया। पिछली पंक्ति इसी की भूमिका है — “व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया”। दो मुहावरों से कवयित्री ने वह बात कह दी जिसके लिए इतिहास की पुस्तक में कई पृष्ठ लगते।
मिलते-जुलते मुहावरे: ‘पैर जमाना’ (मज़बूती से टिक जाना), ‘पाँव फैलाना’, ‘सिर पर चढ़ना’ — इनके अर्थ अलग-अलग हैं, इसलिए इन्हें आपस में बदलकर मत लिखिए।
प्र3.
3. “राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया” — इस पंक्ति में आया मुहावरा ढूँढ़कर लिखिए और उसका प्रयोग करते हुए नया वाक्य बनाइए।
उत्तर
मुहावराअर्थनया वाक्य
पैरों ठुकराना (ठुकरा देना / ठोकर मारना)अत्यंत तिरस्कार के साथ अस्वीकार कर देना; किसी को बिलकुल महत्व न देनाजिस प्रस्ताव को उसने कल पैरों ठुकरा दिया था, आज उसी के लिए वह अनुरोध कर रहा है।
पंक्ति में इसका बल: ‘मना कर दिया’ कहने से केवल इनकार का पता चलता। ‘पैरों ठुकराया’ कहने से अपमान का चित्र भी बन जाता है — जैसे कोई पैर से किसी चीज़ को परे सरका दे। कवयित्री यह दिखाना चाहती हैं कि अंग्रेज़ों ने राजाओं और नवाबों को केवल हराया नहीं, उनकी मान-मर्यादा को भी कुचला। यही ‘आहत अपमान’ आगे छंद 10 में विद्रोह का कारण बनकर लौटता है — “कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान”।
एक और अभ्यास: ‘ठुकराना’ से बने अन्य प्रयोग — ‘ठोकर खाना’ (हानि उठाकर सीखना), ‘ठोकर लगना’। इन तीनों के अर्थ अलग हैं; अपने-अपने वाक्य बनाकर अंतर स्पष्ट कीजिए।
प्र4.
4. “हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो/सोई ज्योति जगानी थी” — इस पंक्ति में आया मुहावरा ढूँढ़कर लिखिए और उसका प्रयोग करते हुए नया वाक्य बनाइए।
उत्तर
मुहावराअर्थनया वाक्य
सोई ज्योति जगानाबुझी या भूली हुई चेतना, उत्साह अथवा आत्म-सम्मान को फिर से जाग्रत करनामहात्मा गांधी ने गाँव-गाँव घूमकर जनता की सोई ज्योति जगा दी।
यज्ञ प्रारंभ होना (साथ आया प्रयोग)किसी बड़े और पवित्र सामूहिक कार्य का आरंभ होना, जिसमें सबको कुछ न कुछ त्यागना पड़ता हैविद्यालय में स्वच्छता का यज्ञ प्रारंभ हुआ तो हर विद्यार्थी ने अपना हिस्सा उठाया।
पंक्ति में इसका बल: कवयित्री ने युद्ध के लिए दो कोमल और पवित्र शब्द चुने — यज्ञ और ज्योति। इससे दो बातें एक साथ सिद्ध हो जाती हैं। पहली, यह लड़ाई लूट या बदले के लिए नहीं थी, बल्कि एक पवित्र उद्देश्य के लिए थी — यज्ञ में आहुति दी जाती है, कुछ पाया नहीं जाता। दूसरी, देश का स्वाभिमान मरा नहीं था, केवल ‘सोया’ हुआ था — उसे जगाना ही काम था। यही बात कविता के पहले छंद में भी है — “चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।” तलवार नई नहीं थी, पुरानी थी; ज्योति नई नहीं थी, सोई हुई थी।
भाव-समान मुहावरे: ‘आँखें खुलना’, ‘होश में आना’, ‘अलख जगाना’ — ‘अलख जगाना’ सबसे निकट है, पर उसमें ‘पुकारकर जगाने’ का भाव अधिक है।
प्र5.
5. “मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी” — इस पंक्ति में आया मुहावरा ढूँढ़कर लिखिए और उसका प्रयोग करते हुए नया वाक्य बनाइए।
उत्तर
मुहावराअर्थनया वाक्य
धूम मचानाज़ोरदार हलचल या खलबली मचा देना; चारों ओर चर्चा फैला देनाहमारी कक्षा की नाटक-मंडली ने वार्षिकोत्सव में ऐसी धूम मचाई कि सब उसी की बात करते रहे।
पंक्ति में इसका बल: यहाँ ‘धूम मचाना’ का अर्थ उत्सव वाला नहीं, विद्रोह की खलबली वाला है — इन तीनों नगरों में अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध ज़बरदस्त हलचल मची। ध्यान दीजिए, इसी छंद की अगली पंक्ति में कवयित्री शब्द बदल देती हैं — “जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी।” जहाँ विद्रोह प्रबल था वहाँ ‘भारी धूम’, और जहाँ सीमित रहा वहाँ ‘कुछ हलचल’। मुहावरे का चुनाव भी ऐतिहासिक सच्चाई के अनुसार किया गया है — यही कवयित्री की सावधानी है।
मुहावरा और कहावत का अंतर: मुहावरा वाक्य का अंश होता है और वाक्य में ढलकर आता है (धूम मचाना → धूम मचाई थी)। कहावत अपने आप में पूरा वाक्य होती है और उसका रूप नहीं बदलता, जैसे — ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता’। परीक्षा में यह अंतर अक्सर पूछा जाता है।
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