सरल अर्थ — अंग्रेज़ किसी की विनती नहीं सुनता; उसकी माया बड़ी भयंकर है। जब वह भारत आया था तब व्यापारी बनकर दया की भीख माँगता था। अब डलहौजी ने पैर पसार लिए हैं और उसका रूप ही पलट गया है। उसने राजाओं और नवाबों तक को पैरों से ठुकरा दिया। रानी दासी बन गई और यह दासी (ब्रिटिश सत्ता) अब महारानी बन बैठी।
| शिल्प का पक्ष | छंद में कैसे काम कर रहा है |
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| अलंकार | विरोधाभास — रानी का दासी और दासी का महारानी बनना। यमक-सा प्रभाव — ‘बनी ... बनी’ की आवृत्ति। मुहावरे का प्रयोग — ‘पैर पसारना’ (धीरे-धीरे अधिकार बढ़ाना), ‘पैरों ठुकराना’ (अपमानपूर्वक अस्वीकार करना)। अनुप्रास — “पैर पसारे ... पलट”। |
| ‘माया’ शब्द | ‘विकट फ़िरंगी की माया’ — माया यानी छल-कपट और भ्रमजाल। कवयित्री यह कहती हैं कि अंग्रेज़ों की ताक़त केवल तोप की नहीं, चालाकी की भी थी — पहले व्यापार, फिर संधि, फिर नीति, फिर राज्य। |
| कालक्रम | दूसरी पंक्ति ‘जब यह भारत आया’ भूतकाल की ओर लौटती है और तीसरी पंक्ति ‘अब’ वर्तमान में लौट आती है — इस तब–अब की तुलना से ही व्यंग्य पैदा होता है। |
| तुक | माया – आया – काया – ठुकराया; अर्ध-पंक्ति में ‘महरानी’ टेक से जुड़ जाती है। |
| भाषा | ‘नव्वाब’ और ‘महरानी’ — बोलचाल के रूप, जो लय के लिए अपनाए गए हैं (मानक रूप ‘नवाब’, ‘महारानी’)। |