प्र1.
यह कविता अवधी भाषा में लिखी गई है जो कि हिंदी भाषा का ही एक स्वरूप है और उत्तर प्रदेश के अनेक स्थानों पर बोली जाती है। कविता में ऐसे बहुत से शब्द आए हैं, जो अवधी भाषा के हैं। ऐसे शब्दों को पहचान कर उनके खड़ी बोली हिंदी रूप लिखिए। साथ ही आपकी भाषा में इनके लिए कौन-से शब्द प्रयुक्त होते हैं, उन्हें भी लिखिए। उदाहरण— कोही : क्रोधी / वेषु : वेष
उत्तर
पूरी भरी हुई तालिका नीचे दी गई है। पहली दो पंक्तियाँ पुस्तक की दी हुई हैं; शेष कविता में से चुनी गई हैं। तीसरा स्तंभ ‘मेरी भाषा में शब्द’ हर विद्यार्थी का अपना होगा — नीचे उत्तर भारत की कुछ प्रचलित बोलियों (भोजपुरी, ब्रज, बुंदेली, हरियाणवी आदि) के रूप नमूने के तौर पर दिए गए हैं। आप अपनी बोली या मातृभाषा के शब्द इस स्तंभ में लिखिए।
| अवधी शब्द | खड़ी बोली का शब्द | मेरी भाषा में शब्द (नमूना) |
|---|---|---|
| कोही | क्रोधी | गुस्सैल, क्रोधी, चिड़चिड़ा; भोजपुरी — गोस्सावाला |
| बेषु | वेष | भेस, पहनावा, रूप, हुलिया |
| कराला | कराल, भयानक | डरावना, भयंकर, डरौना |
| भुआला | भूपाल, राजा | राजा, नरेश, महाराज |
| चितवहिं | देखते हैं | निहारते हैं, ताकते हैं, देखत हउवें (भोजपुरी) |
| सुभायँ | स्वभाव से | आदत से, सुभाव से, ढंग से |
| बहोरि | फिर, इसके बाद | फिर, तब, तत्पश्चात्, फेर (ब्रज/हरियाणवी) |
| सिरु | सिर | सर, माथा, मूँड़ |
| ढोटा | पुत्र, बेटा | बेटा, लड़का, छोरा (ब्रज), लइका (भोजपुरी) |
| जोटा | जोड़ा | जोड़ी, युगल, जोड़ा |
| लोचन | आँख, नेत्र | आँख, नैन, नयन, अँखिया |
| अनत | अन्यत्र, और कहीं | दूसरी ओर, कहीं और, दूसरी जगह |
| चापखंड | धनुष के टुकड़े | कमान के टुकड़े, धनुष के हिस्से |
| महि | पृथ्वी, धरती | धरती, ज़मीन, भुइँ, माटी |
| रिस | क्रोध, रोष | गुस्सा, ग़ुस्सा, रोष, तैश |
| जड़ | मूर्ख | बेवकूफ़, नासमझ, बुद्धू, मूरख |
| बेगि | शीघ्र, जल्दी | जल्दी, फ़ौरन, झट, तुरंत |
| मूढ़ | मूर्ख | मूरख, गँवार, नादान |
| आजू | आज | आज, आजु (भोजपुरी), आज के दिन |
| उलटउँ | उलट दूँगा | पलट दूँगा, उलट-पलट कर दूँगा |
| राजू | राज्य | राज, रियासत, इलाक़ा |
| नृपु | राजा, नृप | राजा, महाराजा |
| माहीं | में, भीतर | में, अंदर, भीतर, माँ (ब्रज) |
| त्रास | भय, डर | डर, ख़ौफ़, दहशत, भय |
| बिधि | विधाता, ईश्वर | भगवान, ऊपरवाला, विधाता, करतार |
| महतारी | माता, माँ | माँ, अम्मा, महतारी (भोजपुरी में आज भी यही), माई |
| बिलोके | देखा | देखा, निहारा, ताका |
| भीरु | भयभीत, डरी हुई | डरी हुई, सहमी हुई, घबराई हुई |
| हरषु | हर्ष, प्रसन्नता | ख़ुशी, आनंद, हरख (बोलचाल में) |
| बिषादु | विषाद, दुख | दुख, उदासी, ग़म |
| भंजनिहारा | तोड़ने वाला | तोड़ने वाला, तोड़नहार, तोड़ैया |
| आयसु | आज्ञा, आदेश | आज्ञा, हुक्म, आदेश |
| रिसाइ | क्रोध करके | गुस्सा होकर, नाराज़ होकर, रिसियाकर (भोजपुरी) |
| सेवकाई | सेवा (का काम) | सेवा, ख़िदमत, टहल |
| अरि | शत्रु | दुश्मन, बैरी, वैरी |
| लराई | लड़ाई | लड़ाई, झगड़ा, भिड़ंत |
| रिपु | शत्रु | दुश्मन, बैरी, विरोधी |
| जैहहिं | जाएँगे | जाएँगे, जइहें (भोजपुरी), जावेंगे (हरियाणवी) |
| लरिकाईं | लड़कपन में, बचपन में | बचपन में, लड़कपन में, लरिकाई (भोजपुरी में आज भी यही) |
| गोसाईं | गोस्वामी, स्वामी, महाराज | महाराज, स्वामी जी, बाबा जी |
| तोहि | तुझे | तुझे, तोहे (ब्रज), तोहरा (भोजपुरी), तन्ने (हरियाणवी) |
| सँभार | सुध, संभाल | होश, सुध-बुध, सँभाल |
| बिदित | विदित, जाना-पहचाना | मालूम, जगजाहिर, सबको पता |
अवधी की पहचान — कुछ नियम जो इस तालिका से अपने आप निकल आते हैं
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| संज्ञा-शब्दों के अंत में प्रायः ‘उ’ जुड़ जाता है | बेषु, सिरु, नृपु, डरु, उतरु, प्रनामु, रामु, लखनु, कोपु, हरषु, बिषादु |
| ‘व’ प्रायः ‘ब’ हो जाता है | बिस्वामित्रु (विश्वामित्र), बिधि (विधि), बिलोके (विलोके), बिषादु (विषाद), बिदेह (विदेह) |
| क्रिया-रूपों में ‘हिं’ और ‘हहिं’ लगते हैं | चितवहिं, सोचहिं, जैहहिं, होइहि |
| सर्वनाम ‘जेहि, तेहि, केहि’ के रूप में चलते हैं | जेहि सुभायँ, जेहि कारन, केहि हेतू |
| ‘आ’ या ‘ऊ’ जोड़कर शब्द को लयदार बनाया जाता है | कराला, भुआला, आजू, राजू, हेतू, केतू |
इससे क्या समझ में आता है: ध्यान दीजिए कि ये शब्द आज भी पूरी तरह अजनबी नहीं लगते — ‘महतारी’, ‘लरिकाई’, ‘रिसियाना’, ‘मूरख’, ‘बेगि’ जैसे शब्द उत्तर भारत के गाँव-घर में आज भी सुनाई देते हैं। इसका अर्थ है कि अवधी कोई अलग-थलग भाषा नहीं, हिंदी की ही एक जीवित शाखा है — जैसा पुस्तक ने स्वयं कहा है। यही कारण है कि पाँच सौ साल बाद भी रामचरितमानस लाखों घरों में बिना अनुवाद के पढ़ा और गाया जाता है।
अपने काम के लिए सुझाव: तीसरा स्तंभ भरने के लिए घर के बड़ों से पूछिए — दादी-नानी की भाषा में इनमें से कई शब्द ज्यों-के-त्यों मिल जाएँगे। यदि आपकी मातृभाषा हिंदी नहीं है (जैसे मराठी, तमिल, बांग्ला, ओड़िआ), तो उसी भाषा के शब्द लिखिए — तुलना और भी रोचक हो जाएगी।