गंगा अध्याय 9 खोजबीन

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
बालकांड का यह अंश और गोस्वामी तुलसीदास जी की अन्य रचनाएँ इंटरनेट की सहायता से सुनिए और देखिए— तुलसीदास– राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद / दोहे– कबीर, रहीम, तुलसी / गोस्वामी तुलसीदास / कवि तुलसीदास और उनकी कविता
उत्तर

यह सुनने-देखने और खोजने का काम है। नीचे बताया गया है कि क्या खोजें, कहाँ खोजें और खोज को किस रूप में लिखें

1. पुस्तक ने चार सामग्रियाँ सुझाई हैं — उनसे क्या पाना है

सुझाई गई सामग्रीउससे क्या पाना हैसुनते-देखते समय क्या नोट करें
तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवादइसी पाठ का सस्वर पाठ या गायन। अवधी का सही उच्चारण सुनकर ही समझ में आता है।हर चौपाई कहाँ रुकती है (चरण का ठहराव); दोहे की लय चौपाई से कैसे अलग है; ‘उलटउँ’, ‘जैहहिं’, ‘लरिकाईं’ जैसे शब्द कैसे बोले जाते हैं।
दोहे – कबीर, रहीम, तुलसीतीनों कवियों के दोहों की तुलना — तीनों दोहा छंद में हैं, पर भाव और भाषा अलग हैं।दोहे में 13 + 11 मात्राओं की लय; तुलसी की भाषा अवधी, कबीर की सधुक्कड़ी, रहीम की ब्रज-मिश्रित।
गोस्वामी तुलसीदासकवि का जीवन-परिचय — जन्मस्थान, समय, रचनाएँ, काशी से संबंध।पुस्तक के अनुसार जीवन-काल 16वीं–17वीं शताब्दी (सन् 1532–1623); जाँचिए कि आपके स्रोत क्या कहते हैं और किस आधार पर।
कवि तुलसीदास और उनकी कविताउनके काव्य की विशेषताएँ — भाषा, छंद, मूल्य, लोक-दृष्टि।रामचरितमानस अवधी में, विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में — यह अंतर क्यों?
पुस्तक में एक बात छूट गई है: पृष्ठ 164 पर ‘खोजबीन’ के नीचे चारों सामग्रियों के नाम तो छपे हैं, पर उनके साथ कोई QR कोड या लिंक छपा हुआ नहीं है — वहाँ खाली जगह है। इसलिए इस काम के लिए पाठ के पहले पृष्ठ (पृष्ठ 153) पर बाईं ओर छपे QR कोड का उपयोग कीजिए, जिस पर 0901CH09 लिखा है। साथ ही नीचे बताए गए विश्वसनीय स्रोतों और अपने शिक्षक की सहायता लीजिए।

2. कहाँ खोजें

  • पाठ्यपुस्तक का QR कोड — पृष्ठ 153 पर छपा कोड (0901CH09) स्कैन कीजिए; इससे इस पाठ की अतिरिक्त सामग्री तक पहुँचा जा सकता है।
  • NCERT के अपने डिजिटल मंच — ePathshala और DIKSHA पर पाठ्यपुस्तकों के ऑडियो-वीडियो उपलब्ध रहते हैं।
  • भारतवाणी — यही मंच भाषा संगम बॉक्स में भी सुझाया गया है (gov.in/lexicon.jsp), जहाँ शब्दों के अनेक भारतीय भाषाओं के रूप मिलते हैं।
  • पुस्तकालय — रामचरितमानस (गीता प्रेस, गोरखपुर का संस्करण सबसे प्रचलित है), हिंदी साहित्य कोश (ज्ञानमंडल लिमिटेड, वाराणसी) — यही ग्रंथ पुस्तक ने भी संदर्भ के रूप में दिया है।
  • आकाशवाणी और दूरदर्शन के संग्रह — रामचरितमानस के सस्वर पाठ के अनेक पुराने और विश्वसनीय रिकॉर्डिंग यहाँ मिलते हैं।

3. क्या-क्या पता कीजिए — एक जाँच-सूची

बिंदुक्या पता करना है
जीवन-काल और स्थानजन्म आज के उत्तर प्रदेश में; जीवन-काल 16वीं–17वीं शताब्दी (सन् 1532–1623); देहावसान काशी में। ध्यान रखिए कि भक्तिकालीन कवियों की तिथियों पर विद्वानों में मतभेद रहता है।
रचनाएँरामचरितमानस, कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली, विनयपत्रिका, हनुमान बाहुक। पता कीजिए कि इनमें से कौन-सी अवधी में हैं और कौन-सी ब्रजभाषा में।
रामचरितमानस की संरचनाइसमें कितने कांड हैं और हमारा पाठ किस कांड से लिया गया है (उत्तर — बालकांड)। कांडों के नाम और प्रत्येक की मुख्य कथा।
छंदरामचरितमानस में कौन-कौन से छंद प्रयुक्त हुए हैं — चौपाई, दोहा, सोरठा, छंद। इनकी मात्रा-व्यवस्था क्या है।
इसी प्रसंग का आगे का भागपुस्तक ने पाठ के नीचे लिखा है कि आगे परशुराम का आक्रोश, लक्ष्मण-परशुराम का व्यंग्योक्तिपूर्ण संवाद और राम का धीर-गंभीर स्वरूप आता है। पूरा प्रसंग पढ़िए और देखिए कि लक्ष्मण के व्यंग्य आगे कितने तीखे होते जाते हैं।
पौराणिक संदर्भसहस्रबाहु कौन था और परशुराम से उसका क्या संबंध था? शिव-धनुष (पिनाक) की कथा क्या है?
लोक में तुलसीरामलीला, कठपुतली और लोकनाट्य में यह प्रसंग कैसे खेला जाता है — अपने आस-पास की रामलीला मंडली से बात कीजिए। यह सबसे रोचक खोज होगी।
कबीर, रहीम और तुलसीतीनों के पाँच-पाँच दोहे इकट्ठे कीजिए और तुलना कीजिए — किसकी भाषा सबसे सरल लगती है और क्यों।

4. खोज को किस रूप में लिखें — नमूना ढाँचा (लगभग दो पृष्ठ की परियोजना)

  1. शीर्षक — ‘गोस्वामी तुलसीदास: कवि, भाषा और रामचरितमानस’।
  2. परिचय (5–6 वाक्य) — जन्मस्थान, समय, रचनाएँ, भाषा पर अधिकार।
  3. रामचरितमानस के बारे में (एक अनुच्छेद) — कितने कांड, किस भाषा में, किस छंद में।
  4. हमारा पाठ (एक अनुच्छेद) — बालकांड का यह प्रसंग किस स्थिति में आता है और उसमें कौन-से तीन चरित्र आमने-सामने हैं।
  5. दो उद्धरण — एक पाठ्यपुस्तक से और एक अपनी खोज से; हर उद्धरण पर तीन-चार वाक्य लिखिए।
  6. सुनने का अनुभव (अपने शब्दों में, 5–6 वाक्य) — जब आपने चौपाइयाँ गाई हुई सुनीं, तो पढ़ने से क्या अलग लगा?
  7. संदर्भ-सूची — जिन पुस्तकों, वेबसाइटों और रिकॉर्डिंग से सामग्री ली, उनके नाम लिखिए। यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है — बिना संदर्भ के दी गई जानकारी अधूरी मानी जाती है।
खोजबीन करते समय ध्यान रखिए: इंटरनेट पर तुलसीदास के नाम से बहुत-सी ऐसी चौपाइयाँ और दोहे चलते हैं जो उनके हैं ही नहीं। इसलिए कोई भी पंक्ति तभी लिखिए जब वह किसी संपादित पुस्तक या विश्वसनीय संग्रह में मिल जाए। एक ही तथ्य दो अलग स्रोतों में मिला लीजिए — यही शोध की सबसे सरल और सबसे पक्की आदत है। और सुनते समय एक बात अवश्य कीजिए: पहले पुस्तक में लिखी चौपाई पर उँगली रखकर साथ-साथ पढ़िए, तभी अवधी का उच्चारण मन में बैठेगा।
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