गंगा अध्याय 5 खोजबीन

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
इस यात्रा-वृत्तांत में उल्लिखित ‘आखिरी चट्टान’ को ‘विवेकानंद चट्टान’ के नाम से भी जाना जाता है। युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में विवेकानंद के जन्मदिवस 12 जनवरी को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ तथा ‘राष्ट्रीय युवा सप्ताह’ के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा सप्ताह के एक हिस्से के रूप में भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष ‘राष्ट्रीय युवा महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है। विवेकानंद के जीवन, लेखन और सामाजिक कार्यों के विषय में पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजकर पढ़िए और कक्षा में चर्चा कीजिए। (कुछ लिंक — स्वामी विवेकानंद : युवाओं के लिए सच्चे आदर्श और मार्गदर्शक; स्वामी विवेकानंद : आध्यात्मिक वैज्ञानिक — प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार)
उत्तर

खोजबीन का अर्थ है — केवल पढ़ लेना नहीं, बल्कि पढ़कर नोट बनाना और कक्षा में रखना। नीचे तीन खानों में यह दिया गया है कि क्या खोजना है और कक्षा में क्या प्रस्तुत करना है।

विषयक्या खोजें / जानेंकक्षा में क्या प्रस्तुत करें
1. जीवनजन्म 12 जनवरी 1863, कोलकाता; मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त। पिता विश्वनाथ दत्त, माता भुवनेश्वरी देवी। दर्शन और तर्कशास्त्र के अध्ययन के बाद रामकृष्ण परमहंस से भेंट और उन्हीं को गुरु मानना। संन्यास के बाद पूरे भारत की पैदल यात्रा — इसी यात्रा के अंत में सन् 1892 के दिसंबर में वे कन्याकुमारी पहुँचे और समुद्र में स्थित उसी चट्टान पर तीन दिन ध्यानमग्न रहे, जहाँ उन्हें ‘भारत के उत्थान’ का संकल्प मिला। निधन 4 जुलाई 1902, बेलूर मठ — मात्र 39 वर्ष की आयु में।एक समय-रेखा (टाइमलाइन) बनाइए — 1863 से 1902 तक — जिसमें पाँच मोड़ अंकित हों : रामकृष्ण से भेंट, भारत-भ्रमण, कन्याकुमारी की चट्टान, शिकागो, रामकृष्ण मिशन की स्थापना।
2. लेखन और विचारप्रमुख ग्रंथ — राजयोग, कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग; पत्र और व्याख्यान (भारत का भविष्य, कोलंबो से अल्मोड़ा तक)। सबसे प्रसिद्ध वाक्य — “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” उनका बल तीन बातों पर था — आत्मविश्वास, निर्भयता और सेवाउनके पाँच कथन चुनकर एक भित्ति-पत्रिका बनाइए और हर कथन के नीचे दो पंक्तियों में लिखिए कि वह आज के विद्यार्थी के लिए क्या अर्थ रखता है।
3. सामाजिक कार्य और प्रभाव11 सितंबर 1893 को शिकागो की विश्व धर्म संसद में उनका भाषण, जिसका आरंभ ‘अमेरिका के बहनो और भाइयो’ से हुआ। सन् 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना — शिक्षा, चिकित्सा और आपदा-राहत के काम। उनका मत था कि धर्म का अर्थ केवल पूजा नहीं, दरिद्रनारायण की सेवा है। सन् 1984 से भारत सरकार ने उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया; 12–16 जनवरी राष्ट्रीय युवा सप्ताह और हर वर्ष राष्ट्रीय युवा महोत्सवकक्षा में एक संक्षिप्त परिचर्चा कीजिए — ‘आज के युवा के लिए विवेकानंद का सबसे ज़रूरी संदेश कौन-सा है?’ दो समूह बनाइए : एक ‘आत्मविश्वास’ का पक्ष ले, दूसरा ‘सेवा’ का।
खोजबीन का ढंग: केवल इंटरनेट पर मत रुकिए।
  1. पुस्तकालय से रामकृष्ण मिशन द्वारा प्रकाशित विवेकानंद की कोई एक छोटी पुस्तक लीजिए और उसका एक अध्याय पढ़िए।
  2. सरकारी और संस्थागत स्रोतों (जैसे प्रेस सूचना ब्यूरो) को प्राथमिकता दीजिए — जो लिंक पुस्तक ने दिए हैं, वे इसी कारण दिए गए हैं।
  3. हर स्रोत का नाम, लेखक और तिथि अपनी कॉपी में लिखिए। यही आपकी संदर्भ-सूची होगी।
  4. जो तथ्य दो अलग-अलग स्रोतों में एक-सा मिले, उसी को अंतिम मानिए।
पाठ से जोड़िए — यही इस खोजबीन का असली उद्देश्य है: मोहन राकेश उसी चट्टान पर खड़े होकर लिखते हैं — “हर तरफ से पानी की मार सहती हुई स्वयं भी समाधिस्थ-सी लग रही थी।” उन्हें चट्टान में स्थिरता दिखी। और उसी चट्टान की ओर देखकर वह बेकार ग्रेजुएट नवयुवक कहता है — “इस चट्टान से इतनी प्रेरणा तो हमें मिलती ही है।” उसे उसमें आशा दिखी। एक ही पत्थर, दो अलग अर्थ — और दोनों अर्थ उस व्यक्ति से बने जो कभी वहाँ तीन दिन ध्यान लगाकर बैठा था। इसीलिए विवेकानंद को जाने बिना यह पाठ अधूरा रह जाता है।
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