शारदा अध्याय 1 पाठ-परिचयः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
गीतस्य आरम्भे यः गद्यांशः दत्तः, तस्य आशयं लिखत — “संस्कृतं भारतदेशस्य सम्पदस्ति। अस्मिन् भारतीयानां ज्ञानवैभवं सञ्चितमस्ति। संस्कृताध्ययनेन मानवः सुसंस्कृतः भवति। भारतीयभाषाणां सुचारुरूपेण अध्ययनार्थं संस्कृतं नितराम् अपेक्षितम् अस्ति। संस्कृताध्ययनेन किं किं साधितं भवति इति विषयम् अधिकृत्य कविना सुन्दरं गीतं प्रस्तुतम्।”
उत्तर

अस्य गद्यांशस्य आशयः — संस्कृतं भारतदेशस्य सम्पत् अस्ति, अस्यां भाषायाम् एव भारतीयानां ज्ञानवैभवं सञ्चितम् अस्ति। संस्कृताध्ययनेन मानवः सुसंस्कृतः भवति। अन्यासां भारतीयभाषाणां सम्यक् अध्ययनार्थमपि संस्कृतम् अत्यन्तम् आवश्यकम्। एतमेव विषयम् आधृत्य कविना इदं गीतं रचितम्।

(हिन्दी — संस्कृत भारत देश की सम्पत्ति है। इसी भाषा में भारतीयों का ज्ञानवैभव संचित है। संस्कृत के अध्ययन से मनुष्य सुसंस्कृत बनता है। भारतीय भाषाओं को भली-भाँति पढ़ने के लिए भी संस्कृत अत्यन्त अपेक्षित है। ‘संस्कृत पढ़ने से क्या-क्या सिद्ध होता है’ — इसी विषय को लेकर कवि ने यह सुन्दर गीत प्रस्तुत किया है।)

वाक्यम्क्या कहता है
संस्कृतं भारतदेशस्य सम्पदस्तिसंस्कृत भारत की धरोहर है — केवल एक विषय नहीं, राष्ट्र की निधि।
अस्मिन् भारतीयानां ज्ञानवैभवं सञ्चितमस्तिवेद, उपनिषद्, आयुर्वेद, गणित, ज्योतिष, काव्य — सारा ज्ञान इसी भाषा में जमा है।
संस्कृताध्ययनेन मानवः सुसंस्कृतः भवतिभाषा केवल शब्द नहीं देती, संस्कार देती है — यही आगे श्लोक २ का विषय है।
भारतीयभाषाणां … संस्कृतं नितराम् अपेक्षितम्हिन्दी, मराठी, बाङ्ग्ला, तेलुगु, कन्नड आदि का मूल शब्दभण्डार संस्कृत है, इसलिए संस्कृत जाने बिना वे भाषाएँ भी अधूरी समझ में आती हैं।
यह गद्यांश गीत से कैसे जुड़ता है: अन्तिम वाक्य ही गीत की भूमिका है — ‘संस्कृताध्ययनेन किं किं साधितं भवति’। पूरा गीत इसी प्रश्न का उत्तर है : पहला श्लोक कहता है एकता सधती है, दूसरा कहता है संस्कार सधता है, तीसरा विश्वबन्धुत्व, चौथा त्याग-सेवा का व्रत, पाँचवाँ चारों पुरुषार्थ और छठा सौन्दर्य तथा पूर्वजों का यश। इस प्रकार गद्यांश प्रश्न रखता है और छह श्लोक उत्तर देते हैं।
ध्यान दें: ‘सम्पदस्ति’ = सम्पत् + अस्ति (व्यञ्जनसन्धि — त् + अ → द्); ‘सञ्चितमस्ति’ = सञ्चितम् + अस्ति; ‘अधिकृत्य’ (द्वितीया के साथ) का अर्थ है ‘को लेकर, के विषय में’ — यही रूप अभ्यास के अन्तिम भाग में भी आया है (‘इति विषयमधिकृत्य’)।
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