प्र1.
एकस्थानि-वर्णाः — (वर्णाः लिखत)
उत्तर
उत्तरम् — एकस्थानि-वर्णाः अर्थात् समानाक्षर-स्वराः — अ · आ · अ३ · इ · ई · इ३ · उ · ऊ · उ३ · ऋ · ॠ · ऋ३ · ऌ · ऌ३ (चतुर्दश)।
(हिन्दी — जिनका उच्चारण-स्थान केवल एक हो, वे ‘एकस्थानी’ हैं — ये समानाक्षर स्वर हैं, कुल चौदह।)
| स्थानम् | एकस्थानि-वर्णाः (समानाक्षराणि) | सङ्ख्या |
|---|---|---|
| कण्ठ्याः | अ · आ · अ३ | ३ |
| तालव्याः | इ · ई · इ३ | ३ |
| मूर्धन्याः | ऋ · ॠ · ऋ३ | ३ |
| दन्त्याः | ऌ · ऌ३ (‘ऌ-वर्णस्य दीर्घा न सन्ति’) | २ |
| ओष्ठ्याः | उ · ऊ · उ३ | ३ |
आधार (पृष्ठ १५२): ‘स्वराणां द्वौ भेदौ’ सारणी की पहली पंक्ति है — समानाक्षर-स्वरः : एक-स्थानी · सन्ध्यक्षर-स्वरः : द्वि-स्थानी। अतः ‘एकस्थानि-वर्णाः’ का उत्तर समानाक्षर स्वर ही हैं। स्थान एक ही रहने के कारण इनका ह्रस्व रूप भी सम्भव है — इसीलिए इनमें ह्रस्व, दीर्घ तथा प्लुत — तीनों उपभेद मिलते हैं।
व्यञ्जनों के विषय में: व्यञ्जनों में भी एक को छोड़कर सब एकस्थानी ही हैं; केवल ‘व्’ द्वि-स्थानी (दन्त्योष्ठ्यः) है — पृष्ठ १५७ की सारणी में वह दन्त्य पंक्ति में भी है और ओष्ठ्य पंक्ति में भी। प्रश्न ६ की सारणी स्वरों पर केन्द्रित है, इसलिए मुख्य उत्तर समानाक्षर स्वर ही दीजिए; ‘व्’ की बात टिप्पणी के रूप में जोड़ी जा सकती है।