शारदा अध्याय 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-06
इस अध्याय के बारे में
पाठ-परिचय — पाठ का आरम्भ एक गद्यांश से होता है : ‘भारतदेशः बहूनां ब्रह्मर्षीणां महात्मनां च भूमिः।’ उनके चरित्रों में पद-पद पर भूतदया, समता, क्षमा, अहिंसा, करुणा, ऋजुता तथा बन्धुता — ये जीवनमूल्य मिलते हैं। महाराष्ट्र के प्रसिद्ध महात्मा नामदेवमहाराज ने अपने व्यवहार से करुणा का महान् आदर्श उपस्थित किया — उन्होंने सर्वात्मक ईश्वर का केवल सङ्कीर्तन नहीं किया, अपितु सब जीवों में भगवान् को देखा । कथावस्तु (आरम्भ) — कपिल और माधवी अवकाश में मातुलगृह गए। खेलते समय उन्होंने एक कुत्ता देखा, पत्थर उठाकर उसे मारने दौड़े; कुत्ता भय से चिल्लाता हुआ भागा और दोनों ज़ोर से हँसे। मातामही ने यह प्रसङ्ग दूर से देखा और दोनों को बुला लिया — यहीं से कथा-संवाद आरम्भ होता है। नामदेव-कथा — नामदेव पाण्डुरङ्ग (विट्ठल) के केवल प्रियभक्त ही नहीं, प्रियमित्र भी थे। वे प्रतिदिन नैवेद्य-स्थालिका लेकर मन्दिर जाते, विग्रह
अभ्यास
- पाठ-प्रवेशः
- कथा-संवादः
- सर्वं शब्देन भासते
- अत्र इदम् अवधेयम्
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- स्वाध्यायान्मा प्रमदः
- यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्