शारदा अध्याय 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-06

इस अध्याय के बारे में

पाठ-परिचय — यह पाठ किसी कथा या श्लोक-संग्रह का नहीं, अपितु एक ऐतिहासिक व्यक्ति के जीवनचरित का सरल संस्कृत गद्य है। आरम्भिक अनुच्छेद पाठक से सीधा प्रश्न करता है — ‘क्या हम जानते हैं कि कितने ज्ञात-अज्ञात क्रान्तिवीरों ने स्वतन्त्रता-यज्ञ में अपने परिवार और जीवन की आहुति दी?’ — और उत्तर स्वरूप एक ऐसे ही हुतात्मा, खुदीराम, का वृत्तान्त प्रस्तुत करता है। कथावस्तु (क) जन्म और बाल्यकाल — बङ्गप्रान्त के मेदिनीपुर जनपद के मोहोबनी-ग्राम में ३ दिसम्बर १८८९ को खुदीराम का जन्म हुआ। पिता त्रैलोक्यनाथ, माता लक्ष्मीप्रिया देवी। बाल्यकाल में ही माता-पिता दिवङ्गत हो गए, अतः बड़ी बहन अपरूपा देवी ने उनका पालन-पोषण किया। साधारण बालकों के समान खेल-कूद में उनका मन नहीं लगता था; देशवासियों पर होते अत्याचार देखकर वे व्यथित हो जाते थे। कथावस्तु (ख) बङ्गभङ्ग और आन्दोलन — वायसराय कर्जन ने बङ्गप्रान्त के वीरत्व को दब

  1. पाठ्यप्रश्नः
  2. सर्वं शब्देन भासते
  3. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  4. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  5. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  6. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  7. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  8. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  9. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  10. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  11. स्वाध्यायान्मा प्रमदः
  12. यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्
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