शारदा अध्याय 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-06

इस अध्याय के बारे में

पाठ-परिचय — पाठ का आरम्भ एक छोटे गद्यांश से होता है — ‘आधुनिके विज्ञानयुगे यदा मानवजीवनं द्रुतगत्या परिवर्तनशीलम् अस्ति, तदा अत्र कृतकबुद्धिः प्रभावशालि-साधनरूपेण समुपस्थिता वर्तते।’ अर्थात् आज जब मानव-जीवन तेज़ गति से बदल रहा है, तब कृतकबुद्धि एक प्रभावशाली साधन के रूप में सामने आ खड़ी हुई है। यन्त्र मनुष्य की तरह सोचते हैं और निर्णय लेते हैं — यही इस पाठ का विषय है। विधा तथा पात्र — यह संवाद है, कोई कथा या श्लोक-संग्रह नहीं। स्थान है ‘विद्यालयकक्षा’। पात्र हैं — अध्यापकः तथा दस छात्र : यशिका, कात्यायनी, श्रेया, अथर्वः, अक्षतः, आर्यः, वेदः, आकाशः, पावनी तथा भास्करः। संवाद छात्रों के प्रश्नों से आगे बढ़ता है, इसलिए पूरा पाठ प्रश्नोत्तर की शैली में है — यही उसे पढ़ने में सरल और याद रखने में सुगम बनाता है। विषयवस्तु — संवाद पाँच चरणों में चलता है : (१) कृतकबुद्धि क्या है — ‘यया अचेतनयन्त्राण

  1. पाठ-परिचयः
  2. संवादः (भागः १)
  3. संवादः (भागः २)
  4. पाठान्तर्गतः श्लोकः
  5. संवादः (भागः ३)
  6. सर्वं शब्देन भासते
  7. अत्र इदम् अवधेयम्
  8. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  9. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  10. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  11. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  12. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  13. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  14. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  15. अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
  16. स्वाध्यायान्मा प्रमदः
  17. यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्
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