शारदा अध्याय 6 मनःपूतं समाचरेत् के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-06
इस अध्याय के बारे में
पाठ-परिचय — पाठ का शीर्षक ही उसका सार है — ‘ मनःपूतं समाचरेत् ’ अर्थात् ‘जो मन से पवित्र हो, वही आचरण करो’। यह वाक्य मनुस्मृति के पहले ही श्लोक से लिया गया है। आरम्भ में एक चित्रकथा है : आचार्या पूछती हैं कि कोई काम करना हो तो सबसे पहले क्या आवश्यक है? छात्र उत्तर देते हैं — विचिन्त्य कार्यकरणम्, उचितविधिना कार्यकरणम्, पूर्णमनसा कार्यकरणम्। आचार्या तब मूल बात कहती हैं — ‘यदि मनः एव मलिनं स्यात्, उद्देश्यम् एव अनुचितं स्यात्, तर्हि किमपि कार्यं सम्यक् कथं भवेत्?’ इसी प्रश्न का उत्तर पाठ के आठ सुभाषित देते हैं। विधा तथा स्रोत — यह सुभाषित-सङ्कलन है; इसका कोई एक रचयिता नहीं। आठ श्लोक आठ अलग-अलग परम्पराओं से आए हैं — धर्मशास्त्र (मनुस्मृति २), दर्शन-उपदेश (गीता), सुभाषित-सङ्ग्रह (सुभाषितरत्नभाण्डागारः), नीति-काव्य (नीतिशतकम्), कथा-साहित्य (पञ्चतन्त्रम्), रूपक (मालविकाग्निमित्रम्) तथा महाकाव्य
अभ्यास
- पाठ-प्रस्तावना
- सुभाषितानि
- सर्वं शब्देन भासते
- अत्र इदम् अवधेयम् (श्लोकानाम् अन्वयः)
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
- स्वाध्यायान्मा प्रमदः
- यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्