प्र1.
सर्वाः …………… अभ्यासेन (सिध्यन्ति)। …………… कलाः अभ्यासात् (सिध्यन्ति)। ध्यानमौनादि (अपि) …………… (सिध्यति)। अभ्यासस्य …………… किम् (अस्ति) ?
उत्तर
पूर्णः अन्वयः — सर्वाः क्रियाः अभ्यासेन (सिध्यन्ति)। सकलाः कलाः अभ्यासात् (सिध्यन्ति)। ध्यानमौनादि (अपि) अभ्यासात् (सिध्यति)। अभ्यासस्य दुष्करं किम् (अस्ति) ?
(हिन्दी — सारे काम अभ्यास से सिद्ध होते हैं। सारी कलाएँ अभ्यास से सिद्ध होती हैं। ध्यान-मौन आदि भी अभ्यास से ही सिद्ध होते हैं। फिर अभ्यास के लिए कठिन क्या है ?)
मूल श्लोक (श्लोक ४) —
अभ्यासेन क्रियाः सर्वाः अभ्यासात् सकलाः कलाः।
अभ्यासाद् ध्यानमौनादि किमभ्यासस्य दुष्करम्॥
अभ्यासेन क्रियाः सर्वाः अभ्यासात् सकलाः कलाः।
अभ्यासाद् ध्यानमौनादि किमभ्यासस्य दुष्करम्॥
| रिक्तस्थानम् | भृतम् पदम् | पहचानने का सूत्र |
|---|---|---|
| १ | क्रियाः | ‘सर्वाः’ स्त्रीलिङ्ग प्रथमा बहुवचन का विशेषण है — उसे वही रूप वाला विशेष्य चाहिए : क्रियाः |
| २ | सकलाः | ‘कलाः’ विशेष्य दिया है, विशेषण रिक्त है; श्लोक में उसका जोड़ीदार सकलाः है |
| ३ | अभ्यासात् | तीसरे चरण में भी वही पञ्चमी चाहिए जो दूसरे में थी — ‘अभ्यासाद् ध्यानमौनादि’ |
| ४ | दुष्करं | ‘किम् (अस्ति)?’ का विधेय-विशेषण चाहिए — नपुंसकलिङ्ग प्रथमा एकवचन दुष्करम् |
अन्वय-क्रम पर ध्यान दीजिए: श्लोक में ‘अभ्यासेन क्रियाः सर्वाः’ है, पर अन्वय में ‘सर्वाः क्रियाः अभ्यासेन’ हो गया — क्योंकि गद्य-क्रम में विशेषण विशेष्य से पहले आता है और करण-पद क्रिया के पास। इसी तरह ‘किमभ्यासस्य दुष्करम्’ का अन्वय ‘अभ्यासस्य दुष्करं किम् (अस्ति)’ बना — प्रश्नवाचक अन्त में। यही अन्वय बनाने का नियम है।
कोष्ठक क्यों हैं: ‘(सिध्यन्ति)’ तथा ‘(अस्ति)’ श्लोक में हैं ही नहीं — वे अध्याहृत क्रियाएँ हैं जिन्हें अर्थ पूरा करने के लिए जोड़ना पड़ता है। संस्कृत में ‘अस्ति/भवति’ तथा प्रसंग से स्पष्ट क्रिया प्रायः छोड़ दी जाती है; अन्वय लिखते समय उसे कोष्ठक में जोड़ देना चाहिए।