शारदा अध्याय 6 अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
यथोचितं मेलनं कुरुत — श्लोकांशः : (क) पुराणमित्येव न साधु सर्वम् (ख) प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति (ग) यद्यदाचरति श्रेष्ठः (घ) धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयम् (ङ) उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः ॥ स्रोतोग्रन्थः : १. मनुस्मृतिः २. पञ्चतन्त्रम् ३. नीतिशतकम् ४. मालविकाग्निमित्रम् ५. श्रीमद्भगवद्गीता
उत्तर

शुद्धं मेलनम् — (क)–४, (ख)–३, (ग)–५, (घ)–१, (ङ)–२।

(हिन्दी — (क) मालविकाग्निमित्रम्, (ख) नीतिशतकम्, (ग) श्रीमद्भगवद्गीता, (घ) मनुस्मृतिः, (ङ) पञ्चतन्त्रम्।)

क्रमःश्लोकांशःस्रोतोग्रन्थःग्रन्थकर्ता / काव्यरूपम्पहचानने का सूत्र
(क)पुराणमित्येव न साधु सर्वम्४. मालविकाग्निमित्रम् (१.२)कालिदासः — रूपकम् (नाटक)यह नाटक की प्रस्तावना का श्लोक है, जहाँ पुराने और नए कवि की तुलना पर उत्तर दिया गया है
(ख)प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति३. नीतिशतकम् (२७)भर्तृहरिः — नीति-साहित्यम्अधम-मध्यम-उत्तम की त्रिविध वर्गीकरण-शैली भर्तृहरि की अपनी पहचान है
(ग)यद्यदाचरति श्रेष्ठः५. श्रीमद्भगवद्गीता (३.२१)महर्षिः व्यासः — ज्ञानोपदेशः‘लोकसंग्रह’ का प्रसंग — कर्मयोग-अध्याय का प्रसिद्ध श्लोक
(घ)धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयम्१. मनुस्मृतिः (६.९२)मनुः — धर्मशास्त्रीयग्रन्थःधर्मलक्षणम्’ की परिभाषा देना धर्मशास्त्र का ही काम है
(ङ)उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः२. पञ्चतन्त्रम् — मित्रभेदः (१४९)विष्णुशर्मा — कथा-साहित्यम्पञ्चतन्त्र की सीधी, व्यावहारिक उद्यम-प्रशंसा — कथा के बीच रखा उपदेश-श्लोक
मेलन कैसे जाँचें: दो कसौटियाँ एक साथ लगाइए। पहली — विषय: धर्म की परिभाषा धर्मशास्त्र से आएगी (घ–१); उद्यम की प्रशंसा कथा-साहित्य से (ङ–२); तीन प्रकार के मनुष्यों का वर्गीकरण नीति-साहित्य से (ख–३); नए-पुराने काव्य की चर्चा नाटक की प्रस्तावना से (क–४); और श्रेष्ठ पुरुष के अनुकरण की बात गीता से (ग–५)। दूसरी — पाठ: पृष्ठ ६९–७० पर हर श्लोक के नीचे उसका स्रोत कोष्ठक में छपा है; अपना उत्तर वहीं से मिला लीजिए। विषय से अनुमान लगाइए, पाठ से पुष्टि कीजिए — तभी उत्तर पक्का होगा।
ध्यान दें: पाठ में आठ श्लोक हैं पर मेलन में केवल पाँच स्रोत दिए गए हैं। छूटे हुए तीन हैं — मनुस्मृति ६.४६ (श्लोक १, जिसका स्रोत (घ) वाले से एक ही है), सुभाषितरत्नभाण्डागारः (श्लोक ४) तथा किरातार्जुनीयम् (श्लोक ८)। इन तीनों के स्रोत भी याद रखिए — परीक्षा में वही पूछे जा सकते हैं। ‘सुभाषितरत्नभाण्डागार’ किसी एक कवि की रचना नहीं, अनेक कवियों के सुभाषितों का सङ्ग्रह-ग्रन्थ है।
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