प्र1.
विघ्नैः विहताः (कार्यात्) विरमन्ति।
उत्तर
समस्तपदम् — विघ्नविहताः। (हिन्दी — विघ्नों से आहत, रुकावटों की चोट खाए हुए।)
विग्रहः — विघ्नैः विहताः
समस्तपदम् — विघ्नविहताः
समासस्य नाम — तृतीया-तत्पुरुषः (‘विघ्नैः’ तृतीया में है, वही समास में लुप्त हो गई)
पाठ की पंक्ति — प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः (श्लोक ५)
समस्तपदम् — विघ्नविहताः
समासस्य नाम — तृतीया-तत्पुरुषः (‘विघ्नैः’ तृतीया में है, वही समास में लुप्त हो गई)
पाठ की पंक्ति — प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः (श्लोक ५)
यही तत्पुरुष क्यों, दूसरा क्यों नहीं: तत्पुरुष समास का नाम उस विभक्ति से पड़ता है जो पूर्वपद में विग्रह करते समय आती है। यहाँ विग्रह ‘विघ्नैः विहताः’ है — तृतीया; इसलिए यह तृतीया-तत्पुरुष हुआ। यदि विग्रह ‘विघ्नानां विहताः’ होता तो षष्ठी-तत्पुरुष कहलाता। अर्थ भी यही माँगता है : विघ्न कर्ता हैं (उन्होंने चोट पहुँचाई), इसलिए तृतीया ही ठीक है — «कर्तृकरणे तृतीया»।
व्याकरण: ‘विहताः’ = वि + √हन् + क्त प्रत्यय, पुं.प्र.ब.व. — ‘मारे गए, आहत’। पुस्तक की शब्दार्थ-तालिका इसी पद को ‘विघ्नैः विहताः = विघ्नों से हत’ देकर विग्रह पहले ही बता देती है। यही पद अभ्यास के प्रश्न ८ (ङ) में सन्धिविच्छेद के लिए भी आया है।