उत्तरम् — आचार्या पृच्छति यत् ‘किमपि कार्यं करणीयम् अस्ति चेत् आदौ किम् आवश्यकम् ?’ इति। छात्राः त्रीणि उत्तराणि ददति — (१) विचिन्त्य कार्यकरणम्, (२) उचितविधिना कार्यकरणम्, (३) पूर्णमनसा कार्यकरणम्।
(हिन्दी — आचार्या पूछती हैं कि यदि कोई काम करना हो तो सबसे पहले क्या आवश्यक है ? छात्र तीन उत्तर देते हैं — (१) सोच-विचारकर काम करना, (२) उचित विधि से काम करना, और (३) पूरे मन से काम करना।)
| छात्रस्य उत्तरम् | हिन्दी अर्थ | यह पाठ के किस श्लोक में खुलता है |
|---|---|---|
| विचिन्त्य कार्यकरणम् | सोच-विचारकर काम करना | श्लोक ८ — ‘सहसा विदधीत न क्रियाम्’ तथा ‘वृणते हि विमृश्यकारिणम्’ |
| उचितविधिना कार्यकरणम् | उचित विधि से, ठीक ढंग से काम करना | श्लोक ४ — ‘अभ्यासेन क्रियाः सर्वाः’ (विधि अभ्यास से ही आती है) |
| पूर्णमनसा कार्यकरणम् | पूरे मन से काम करना | श्लोक १ — ‘मनःपूतं समाचरेत्’ — यही पाठ का शीर्षक है |