प्र1.
…………………………………… परमापदां पदम्।
उत्तर
उत्तरम् — सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
(हिन्दी — जल्दबाज़ी में काम नहीं करना चाहिए; अविवेक विपत्तियों का सबसे बड़ा घर है।)
पूरा श्लोकांश (श्लोक ८, किरातार्जुनीयम् २.३०) —
सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
पदच्छेदः — सहसा + विदधीत + न + क्रियाम् + अविवेकः + परम् + आपदाम् + पदम्
सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
पदच्छेदः — सहसा + विदधीत + न + क्रियाम् + अविवेकः + परम् + आपदाम् + पदम्
रिक्तस्थान कैसे पहचाना: जो अंश दिया है — ‘परमापदां पदम्’ — वह विधेय है (‘विपत्तियों का सबसे बड़ा घर’)। विधेय है तो उद्देश्य कहाँ है ? वही रिक्त है — ‘अविवेकः’। और उससे पहले जो निषेध-वाक्य है (‘सहसा विदधीत न क्रियाम्’) वही अविवेक की व्याख्या करता है। इस प्रकार कर्ता खोजो — यही रिक्तस्थान-पूर्ति की पहली युक्ति है।
सन्धि: क्रियामविवेकः = क्रियाम् + अविवेकः; परमापदाम् = परम् + आपदाम् (दीर्घ सन्धि — अ + आ = आ)। ‘परम्’ यहाँ ‘सबसे बड़ा / परम’ के अर्थ में ‘पदम्’ का विशेषण है।