प्र1.
मेलनं कुरुत — तन्त्रांशानां कार्याणि विचिन्त्य यथोचितं विकल्पं चिनुत — स्तम्भः अ : (क) चैट-जीपीटी (Chat-GPT) (ख) डीप्-फेक् (Deepfake) (ग) शिक्षकः (घ) एलेक्सा (Alexa) (ङ) डेटासेट् (Dataset) (च) दीक्षा (DIKSHA) (छ) अपूर्वानुमेय-नियन्त्रणम् (Predictive Policing) (ज) गूगल मानचित्रं (Google Maps) (झ) पूर्वग्रहः (ञ) दॅल्ल्-ई (DALL-E) ॥ स्तम्भः ब : १. नैतिकतायाः शिक्षां करोति २. ए.आई. आधारित-शिक्षाप्रणाली ३. पथनिर्देशनं करोति ४. संवादयन्त्रम् ५. पक्षपातयुक्तं प्रशिक्षणफलम् ६. गीतं गायति, दीपं प्रकाशितं करोति च ७. मिथ्याचित्रस्य निर्माणम् ८. चित्रोत्पादनाय ए.आई. अनुप्रयोगः ९. यन्त्रपाठशालायाः नाम १०. अपराधशमनाय प्रयोगः
उत्तर
शुद्धं मेलनम् — (क)–४, (ख)–७, (ग)–१, (घ)–६, (ङ)–९, (च)–२, (छ)–१०, (ज)–३, (झ)–५, (ञ)–८।
| क्रमः | स्तम्भः अ | स्तम्भः ब | पाठ का आधार | मेल का कारण |
|---|---|---|---|---|
| (क) | चैट-जीपीटी | ४. संवादयन्त्रम् | ‘चैट-जीपीटी इति नामकं संवादोपकरणम् अपि कृतकबुद्ध्या युक्तम् अस्ति।’ (पृष्ठ ५२) | वह मनुष्य से बातचीत करके प्रश्नों के उत्तर देता है |
| (ख) | डीप्-फेक् | ७. मिथ्याचित्रस्य निर्माणम् | ‘डीप्-फेक् कृतकबुद्ध्या निर्मितं मिथ्याचित्रं, दृश्यं, ध्वनिः वा अस्ति।’ (पृष्ठ ५६) | पुस्तक की शब्दार्थ-तालिका भी यही अर्थ देती है |
| (ग) | शिक्षकः | १. नैतिकतायाः शिक्षां करोति | ‘शिक्षकाः … छात्रेषु मानवीयमूल्यबोधम् अपि जनयन्ति। ते अनुशासनं, परोपकारं, करुणां … शिक्षयन्ति।’ (पृष्ठ ५५) | यही वह काम है जो कोई यन्त्र नहीं कर सकता |
| (घ) | एलेक्सा | ६. गीतं गायति, दीपं प्रकाशितं करोति च | ‘एतत् गीतं गायति, विद्युद्दीपं ज्वालयति, दैनिकसंवादं वातावरणस्थितिं च सूचयति।’ (पृष्ठ ५२) | अथर्व ने अपनी माता के अनुभव से यही बताया |
| (ङ) | डेटासेट् | ९. यन्त्रपाठशालायाः नाम | ‘अस्याः यन्त्रपाठशालायाः नाम “डेटासेट्” इति !’ (पृष्ठ ५४) | पाठ का वाक्य शब्दशः यही है |
| (च) | दीक्षा | २. ए.आई. आधारित-शिक्षाप्रणाली | ‘दीक्षा, स्वयम्, … एतानि कृतकबुद्ध्याधारितानि उपकरणानि सन्ति।’ (पृष्ठ ५४) | यह शिक्षा-मन्त्रालय का डिजिटल शिक्षा-मञ्च है |
| (छ) | (अ)पूर्वानुमेय-नियन्त्रणम् | १०. अपराधशमनाय प्रयोगः | ‘मुखपरिचयप्रणाली, पूर्वानुमेय-नियन्त्रणं चेत्यादि-योजनासु कृतकबुद्धेः प्रयोगः अस्ति।’ (पृष्ठ ५५) | अथर्व का प्रश्न ही था — ‘अपराधशमनाय कृतकबुद्धिः कथं साहाय्यं करोति ?’ |
| (ज) | गूगल मानचित्रम् | ३. पथनिर्देशनं करोति | ‘सङ्कुचितकृतकबुद्धिः — जीपीटी, गूगल-मानचित्रं, यू-ट्यूब्।’ (पृष्ठ ५३) | मानचित्र का काम ही मार्ग दिखाना है |
| (झ) | पूर्वग्रहः | ५. पक्षपातयुक्तं प्रशिक्षणफलम् | ‘यदा प्रशिक्षणदत्तांशः पक्षपातयुक्तः भवति, तदा निष्कर्षाः अपि पक्षपातयुक्ताः भवन्ति। एषः दोषः “पूर्वग्रहः” इति कथ्यते।’ (पृष्ठ ५४) | ‘प्रशिक्षण का फल जो पक्षपाती हो’ — यही पूर्वग्रह की परिभाषा है |
| (ञ) | दॅल्ल्-ई (DALL-E) | ८. चित्रोत्पादनाय ए.आई. अनुप्रयोगः | पाठ में नाम नहीं; शेष सब जोड़ियाँ बन जाने पर यही बचता है | DALL-E शब्दों से चित्र बनाने वाला ए.आई. है |
मेलन हल करने की विधि (यही सबसे उपयोगी बात है): तीन चरणों में चलिए। पहला — जिन जोड़ियों का वाक्य पाठ में शब्दशः मिलता है, उन्हें पहले पक्का कीजिए : (ङ)–९ और (झ)–५ तो पाठ की पंक्तियाँ ही हैं। दूसरा — जिनका काम नाम से ही स्पष्ट है, उन्हें जोड़िए : मानचित्र → पथनिर्देशन, एलेक्सा → गीत-दीप। तीसरा — जो नाम पाठ में है ही नहीं (दॅल्ल्-ई), उसे अन्त में शेषानुसार जोड़िए — यही ‘elimination’ की विधि है। कभी भी अनुमान से आरम्भ मत कीजिए; पाठ से आरम्भ कीजिए।
छपाई की सूचना: (छ) में पुस्तक ने ‘अपूर्वानुमेय-नियन्त्रणम्’ छापा है, जबकि पाठ (पृष्ठ ५५) में तथा अंग्रेज़ी पर्याय (Predictive Policing) के अनुसार शुद्ध पद ‘पूर्वानुमेय-नियन्त्रणम्’ है — पूर्वम् अनुमेयम् (जिसका पहले से अनुमान हो सके) नियन्त्रणम्। ‘अ’ लगते ही अर्थ उलट जाता है। इसी प्रकार (झ) में ‘पूर्वग्रहः’ छपा है, जबकि शब्दार्थ-तालिका तथा प्रश्न ३ की मञ्जूषा में ‘पूर्वाग्रहः’ — दोनों रूप शुद्ध हैं, अर्थ एक ही है।