उत्तरम् — शिक्षायां, चिकित्सायां, कृषि-क्षेत्रे, न्यायालये, सञ्चारे, वित्ते, कलासङ्गीतक्षेत्रे मनोरञ्जनादिषु क्षेत्रेषु च कृतकबुद्धिः भूरिशः प्रयुज्यते (उपयुज्यते)।
(हिन्दी — शिक्षा में, चिकित्सा में, कृषि-क्षेत्र में, न्यायालय में, सञ्चार में, वित्त में, कला-सङ्गीत तथा मनोरञ्जन आदि क्षेत्रों में कृतकबुद्धि बहुतायत से प्रयुक्त होती है।)
प्रश्नपदम् ‘कुत्र’ = कहाँ ? — यह सप्तमी का अव्यय-रूप है
अतः उत्तर के सब पद सप्तमी में — शिक्षायाम्, चिकित्सायाम्, क्षेत्रे, न्यायालये, सञ्चारे, वित्ते, क्षेत्रेषु
नियम — अधिकरणे सप्तमी (‘आधारोऽधिकरणम्’)
आठ क्षेत्र, आठ जीवन-प्रसङ्ग: यह सूची यूँ ही नहीं बनी — इसमें विद्यालय (शिक्षा), अस्पताल (चिकित्सा), खेत (कृषि), अदालत (न्यायालय), फ़ोन (सञ्चार), बैंक (वित्त), कला-सङ्गीत तथा मनोरञ्जन — अर्थात् एक साधारण भारतीय का पूरा दिन आ गया है। पाठ यही दिखाना चाहता है कि ए.आई. किसी दूर की प्रयोगशाला की वस्तु नहीं, आज के जीवन के हर कोने में है। ‘भूरिशः’ (बहुतायत से) शब्द इसी विस्तार को बल देता है।
ध्यान दें: ‘मनोरञ्जनादिषु’ में ‘आदि’ जुड़ा है — अर्थात् सूची यहीं समाप्त नहीं होती। ‘यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्’ खण्ड इसी को आगे बढ़ाकर नौ क्षेत्र गिनवाता है, जिनमें सैन्यक्षेत्र, वास्तुकलाक्षेत्र तथा विधिक्षेत्र नए जुड़ते हैं।