शारदा अध्याय 5 अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
कृतकबुद्धिः का अस्ति ?
उत्तर

उत्तरम् — यया अचेतनयन्त्राणि मानवबुद्धिवत् कार्यं कुर्वन्ति, सा कृतकबुद्धिः अस्ति इति वैज्ञानिकाः मन्यन्ते।

(हिन्दी — जिसके द्वारा चेतनारहित यन्त्र मानव-बुद्धि की तरह कार्य करते हैं, उसी को वैज्ञानिक कृतकबुद्धि मानते हैं।)

पाठ की पंक्ति (पृष्ठ ५२) — यया अचेतनयन्त्राणि मानवबुद्धिवत् कार्यं कुर्वन्ति, सा कृतकबुद्धिः इति वैज्ञानिकाः मन्यन्ते।
प्रश्नपदम् ‘का’ = स्त्रीलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन
अतः उत्तर भी स्त्रीलिङ्ग प्रथमा में — सा कृतकबुद्धिः अस्ति
‘का’ का उत्तर स्त्रीलिङ्ग में ही क्यों: ‘बुद्धि’ इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द है, इसलिए ‘कृतकबुद्धिः’ भी स्त्रीलिङ्ग है और उसका प्रश्नवाचक ‘कः’ नहीं, ‘का’ बनता है। यही कारण है कि पूरे पाठ में उसके साथ ‘एषा’, ‘समुपस्थिता’, ‘सहायिका’, ‘सहकरी’, ‘प्रतिस्पर्धिनी’ — सब स्त्रीलिङ्ग रूप आए हैं। ‘स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ खण्ड का अमरकोश-वचन इसी की पुष्टि करता है — बुद्धि के सारे पर्याय ‘स्त्रीलिङ्गे विद्यन्ते’।
संक्षिप्त उत्तर भी बना सकते हैं: ‘मानवबुद्धिवत् कार्यं कर्तुं समर्था यन्त्रप्रणाली एव कृतकबुद्धिः अस्ति।’ किन्तु परीक्षा में पाठ का ही वाक्य देना सबसे सुरक्षित है, क्योंकि उसी को पुस्तक ने ‘वैज्ञानिकाः मन्यन्ते’ कहकर प्रामाणिक ठहराया है।
प्र2.
अध्यापकः कृतकबुद्धेः कानि उदाहरणानि उक्तवान् ?
उत्तर

उत्तरम् — अध्यापकः कृतकबुद्धेः एतानि उदाहरणानि उक्तवान् — चैट-जीपीटी, सिरि, एलेक्सा, गूगल मानचित्रं, जेमिनि, मेटा-कृतकबुद्धिः, परप्लेक्सिटि चेत्यादयः अनुप्रयुक्ततन्त्रविशेषाः कृतकबुद्धियुक्ताः सन्ति।

(हिन्दी — अध्यापक ने ये उदाहरण बताए — चैट-जीपीटी, सिरि, एलेक्सा, गूगल मानचित्र, जेमिनि, मेटा-ए.आई. तथा परप्लेक्सिटि; ये सब प्रयोग में आने वाले विशेष तन्त्र (एप्लिकेशन) कृतकबुद्धि से युक्त हैं।)

क्रमःउदाहरणम्Englishकिं करोति
चैट-जीपीटीChat-GPTसंवादोपकरणम् — प्रश्नानाम् उत्तराणि ददाति
सिरिSiriवाक्-सहायकः
एलेक्साAlexaगीतं गायति, विद्युद्दीपं ज्वालयति, वातावरणस्थितिं सूचयति
गूगल मानचित्रम्Google Mapsपथनिर्देशनं करोति
जेमिनिGeminiसंवाद-तन्त्रांशः
मेटा-कृतकबुद्धिःMeta AIसामाजिक-माध्यमेषु सहायकः
परप्लेक्सिटिPerplexity AIअन्वेषण-सहायकः
ध्यान दीजिए किसने क्या जोड़ा: ये सात नाम अध्यापक ने गिनाए। इनके अतिरिक्त छात्रों ने अपने घर के उदाहरण जोड़े — अथर्व ने ‘एलेक्सा’ का विस्तार से वर्णन किया और पावनी ने ‘गूगल-सहायकम्’ बताया। प्रश्न ‘अध्यापकः … उक्तवान्’ पूछ रहा है, इसलिए उत्तर में अध्यापक की ही सूची दीजिए।
व्याकरण: ‘कानि’ = नपुंसकलिङ्ग · प्रथमा/द्वितीया · बहुवचन — इसीलिए उत्तर भी ‘उदाहरणानि’ (बहुवचन) में है। ‘उक्तवान्’ = √वच् + क्तवतु, पुंलिङ्ग प्रथमा एकवचन — ‘उसने कहा’ (भूतकाल)।
प्र3.
यन्त्राणि कथं शिक्ष्यन्ते ?
उत्तर

उत्तरम् — प्रौद्योगिकीविशारदाः यन्त्राधिगमः गहनाधिगमः चेति विधिना एतानि यन्त्राणि प्रशिक्षयन्ति, अनुप्रयोगाय च सज्जीकुर्वन्ति। कृतकबुद्धिः यन्त्रं दत्तांशमाध्यमेन शिक्षणं करोति।

(हिन्दी — तकनीकी विशेषज्ञ ‘यन्त्राधिगम’ (Machine Learning) तथा ‘गहनाधिगम’ (Deep Learning) — इस विधि से इन यन्त्रों को प्रशिक्षित करते हैं और उपयोग के लिए तैयार करते हैं। कृतकबुद्धि यन्त्र को दत्तांश (डेटा) के माध्यम से पढ़ाती है।)

कः शिक्षयति ? — प्रौद्योगिकीविशारदाः
कया विधिना ? — यन्त्राधिगमेन, गहनाधिगमेन च
केन माध्यमेन ? — दत्तांशमाध्यमेन (डेटासेट् नामकः दत्तांशसमूहः)
किमर्थम् ? — अनुप्रयोगाय (उपयोग के लिए)
‘कथम्’ का उत्तर विधि बताता है: प्रश्न ‘कैसे?’ पूछ रहा है, इसलिए उत्तर में प्रक्रिया चाहिए, केवल नाम नहीं। इसलिए पूरा उत्तर तीन बातें कहता है — कौन सिखाता है, किस विधि से सिखाता है, और किस सामग्री से सिखाता है। ध्यान रखिए, ‘शिक्ष्यन्ते’ कर्मवाच्य है (‘सिखाए जाते हैं’), इसलिए उत्तर में सिखाने वाले को तृतीया में भी रखा जा सकता है — ‘प्रौद्योगिकीविशारदैः यन्त्राधिगम-गहनाधिगमविधिना यन्त्राणि शिक्ष्यन्ते।’
शब्द फिर से: यन्त्राधिगमः = यन्त्रस्य अधिगमः (Machine Learning) — यन्त्र का उदाहरणों से सीखना; गहनाधिगमः = गहनः अधिगमः (Deep Learning) — अनेक परतों वाला गहरा सीखना, जो चित्र-ध्वनि-भाषा जैसे कठिन काम सँभालता है। दोनों में ‘अधिगमः’ (अधि + √गम् + घञ्) समान है — अर्थात् दोनों ‘सीखने’ की ही विधियाँ हैं।
प्र4.
‘डेटासेट्’ केषां पाठशाला अस्ति ?
उत्तर

उत्तरम् — ‘डेटासेट्’ यन्त्राणां पाठशाला अस्ति।

(हिन्दी — ‘डेटासेट्’ यन्त्रों की पाठशाला है।)

पाठ की पंक्ति (पृष्ठ ५४) — अस्याः यन्त्रपाठशालायाः नाम “डेटासेट्” इति !
प्रश्नपदम् ‘केषाम्’ = षष्ठी · बहुवचन · पुंलिङ्ग/नपुंसकलिङ्ग
‘यन्त्रम्’ नपुंसकलिङ्ग अकारान्त → षष्ठी बहुवचन यन्त्राणाम्
(फलम् → फलानाम् इव; ‘न’ का ‘ण’ णत्व-विधान से)
बहुवचन क्यों: प्रश्न में ‘कस्य’ नहीं, ‘केषाम्’ है — इसलिए उत्तर एक यन्त्र का नहीं, सब यन्त्रों का होना चाहिए। यही आर्य के मूल प्रश्न में भी था — ‘यन्त्राणाम् अपि पाठशाला अस्ति वा ?’ (बहुवचन)। संस्कृत में प्रश्न का वचन ही उत्तर का वचन तय कर देता है।
यह उपमा क्यों याद रह जाती है: बालक विद्यालय में जैसी पुस्तकें पढ़ता है, वैसा ही बनता है; यन्त्र डेटासेट् में जैसे उदाहरण देखता है, वैसा ही सीखता है। इसीलिए अगला प्रश्न (छ) अपने आप बनता है — यदि पाठशाला ही ग़लत पढ़ाए तो ?
प्र5.
कृतकबुद्धिः कुत्र प्रयुज्यते ?
उत्तर

उत्तरम् — शिक्षायां, चिकित्सायां, कृषि-क्षेत्रे, न्यायालये, सञ्चारे, वित्ते, कलासङ्गीतक्षेत्रे मनोरञ्जनादिषु क्षेत्रेषु च कृतकबुद्धिः भूरिशः प्रयुज्यते (उपयुज्यते)।

(हिन्दी — शिक्षा में, चिकित्सा में, कृषि-क्षेत्र में, न्यायालय में, सञ्चार में, वित्त में, कला-सङ्गीत तथा मनोरञ्जन आदि क्षेत्रों में कृतकबुद्धि बहुतायत से प्रयुक्त होती है।)

प्रश्नपदम् ‘कुत्र’ = कहाँ ? — यह सप्तमी का अव्यय-रूप है
अतः उत्तर के सब पद सप्तमी में — शिक्षायाम्, चिकित्सायाम्, क्षेत्रे, न्यायालये, सञ्चारे, वित्ते, क्षेत्रेषु
नियम — अधिकरणे सप्तमी (‘आधारोऽधिकरणम्’)
आठ क्षेत्र, आठ जीवन-प्रसङ्ग: यह सूची यूँ ही नहीं बनी — इसमें विद्यालय (शिक्षा), अस्पताल (चिकित्सा), खेत (कृषि), अदालत (न्यायालय), फ़ोन (सञ्चार), बैंक (वित्त), कला-सङ्गीत तथा मनोरञ्जन — अर्थात् एक साधारण भारतीय का पूरा दिन आ गया है। पाठ यही दिखाना चाहता है कि ए.आई. किसी दूर की प्रयोगशाला की वस्तु नहीं, आज के जीवन के हर कोने में है। ‘भूरिशः’ (बहुतायत से) शब्द इसी विस्तार को बल देता है।
ध्यान दें: ‘मनोरञ्जनादिषु’ में ‘आदि’ जुड़ा है — अर्थात् सूची यहीं समाप्त नहीं होती। ‘यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्’ खण्ड इसी को आगे बढ़ाकर नौ क्षेत्र गिनवाता है, जिनमें सैन्यक्षेत्र, वास्तुकलाक्षेत्र तथा विधिक्षेत्र नए जुड़ते हैं।
प्र6.
शिक्षायां कृतकबुद्धेः उपयोगः कथं भवति ?
उत्तर

उत्तरम् — शिक्षायां दीक्षा, स्वयम्, सर्वेषां कृते कृतकबुद्धिः, पी.एम्.-ईविद्या, संशयनिराकरणार्थं चैट्बोट्, भाषानुवादोपकरणानि च यत्र तत्र प्रयुज्यन्ते। एतानि कृतकबुद्ध्याधारितानि उपकरणानि सन्ति। एतेषां साहाय्येन छात्राः शिक्षकाणाम् अनुपस्थितौ अपि स्वयम् अध्येतुं शक्नुवन्ति।

(हिन्दी — शिक्षा में दीक्षा, स्वयम्, ‘सर्वों के लिए ए.आई.’, पी.एम्. ई-विद्या, शङ्का दूर करने के लिए चैटबोट तथा भाषानुवाद के उपकरण जगह-जगह प्रयुक्त होते हैं। ये सब ए.आई.-आधारित उपकरण हैं। इनकी सहायता से छात्र शिक्षकों की अनुपस्थिति में भी स्वयं पढ़ सकते हैं।)

उपकरणम्Englishछात्राय कः लाभः
दीक्षाDIKSHAपाठ्यपुस्तकानां डिजिटल-सामग्री, वीडियो-पाठाः
स्वयम्SWAYAMनिःशुल्काः ऑनलाइन-पाठ्यक्रमाः
सर्वेषां कृते कृतकबुद्धिःAI for Allसर्वेभ्यः जनेभ्यः कृतकबुद्धि-साक्षरता
पी.एम्. ई-विद्याPM e-Vidyaदूरदर्शनेन, बेतारवाणीभिः, जालेन च शिक्षणम्
चैट्बोट्Chatbotसंशयनिराकरणम् — तत्क्षणम् उत्तरम्
भाषानुवादोपकरणानिTranslation toolsस्वभाषया अन्यभाषायाः सामग्रीपाठनम्
उत्तर में यह वाक्य अवश्य जोड़िए:एतेषां साहाय्येन छात्राः शिक्षकाणाम् अनुपस्थितौ अपि स्वयम् अध्येतुं शक्नुवन्ति’ — यही इस पूरे उत्तर का निष्कर्ष है। ए.आई. का शैक्षिक लाभ यह नहीं कि वह शिक्षक की जगह ले, बल्कि यह कि जहाँ शिक्षक उपलब्ध न हो — दूरस्थ गाँव, रात का समय, कोई कठिन विषय — वहाँ भी पढ़ाई रुके नहीं। इसीलिए अगली पंक्ति में अध्यापक तुरन्त जोड़ते हैं — ‘कृतकबुद्धिः गुरुमित्रम् अस्ति, गुरुविकल्पः नास्ति।’
शब्द: ‘संशयनिराकरणार्थम्’ = संशयस्य निराकरणार्थम् — ‘शङ्का दूर करने के लिए’ (‘अर्थम्’ के योग में षष्ठी)। ‘यत्र तत्र’ = जहाँ-तहाँ, सर्वत्र। ‘शक्नुवन्ति’ = √शक् + लट्, प्र.पु.ब.व. — ‘समर्थ होते हैं’ (शब्दार्थ-तालिका में ‘अर्हन्ति = शक्नुवन्ति’ दिया है)।
प्र7.
यदि अशुद्धदत्तांशः दीयते तर्हि का समस्या भवति ?
उत्तर

उत्तरम् — यदि अशुद्धदत्तांशः दीयते तर्हि कृतकबुद्धिः अपि त्रुटिं करोति। यदा प्रशिक्षणदत्तांशः पक्षपातयुक्तः भवति, तदा निष्कर्षाः अपि पक्षपातयुक्ताः भवन्ति। एषः दोषः ‘पूर्वग्रहः’ (Bias) इति कथ्यते।

(हिन्दी — यदि अशुद्ध डेटा दिया जाए तो कृतकबुद्धि भी त्रुटि करती है। जब प्रशिक्षण का डेटा पक्षपात से भरा होता है, तब उसके निष्कर्ष भी पक्षपातपूर्ण हो जाते हैं। इसी दोष को ‘पूर्वग्रह’ कहा जाता है।)

अशुद्धः दत्तांशः → यन्त्रं तम् एव शिक्षते → निष्कर्षाः अपि पक्षपातयुक्ताः → दोषस्य नाम ‘पूर्वग्रहः
समाधानम् — ‘मानवीयपरिचर्या-विवेकेन सह त्रुटिरहितरूपेण ग्रहीतुं शक्यते’
दोष यन्त्र का नहीं, उसकी पाठशाला का है: यन्त्र स्वयं झूठ बोलना नहीं जानता; वह केवल वही लौटाता है जो उसे दिखाया गया। यदि उसे एकपक्षीय उदाहरण दिखाए जाएँ, तो वह उसी एक पक्ष को ‘सत्य’ मान बैठता है। इसीलिए अध्यापक उत्तर को अधूरा नहीं छोड़ते — वे उपाय भी बताते हैं : कृतकबुद्धि अद्यापि विकासपदे है, अतः उसे मानवीय देखभाल तथा विवेक के साथ ही ग्रहण करना चाहिए। उत्तर लिखते समय यह अन्तिम वाक्य अवश्य जोड़िए — इसी से उत्तर पूर्ण माना जाएगा।
व्याकरण: ‘दीयते’ = √दा + लट्, कर्मवाच्य — ‘दिया जाता है’। ‘कथ्यते’ = √कथ् + लट्, कर्मवाच्य — ‘कहा जाता है’। ‘यदि … तर्हि’ तथा ‘यदा … तदा’ — ये नित्य-सम्बन्धी युग्म हैं; एक के बिना दूसरा वाक्य अधूरा रहता है।
प्र8.
कृतकबुद्धेः दुरुपयोगेन कीदृशं भयम् अस्ति ?
उत्तर

उत्तरम् — कृतकबुद्धेः दुरुपयोगेन हि विभिन्नप्रकारकाः साइबर्-अपराधाः समाजेषु देशेषु च चलन्ति। तेषु प्रमुखः ‘डीप्-फेक्’ अस्ति — यत् कृतकबुद्ध्या निर्मितं मिथ्याचित्रं, दृश्यं, ध्वनिः वा भवति, यत्र मुखं वाणी च मिथ्या प्रस्तूयते — उपहासाय, अनेकदा अपराधाय चापि।

(हिन्दी — कृतकबुद्धि के दुरुपयोग से भाँति-भाँति के साइबर-अपराध समाजों और देशों में चल रहे हैं। इनमें प्रमुख है ‘डीप्-फेक्’ — कृतकबुद्धि से बनाया गया झूठा चित्र, दृश्य या ध्वनि, जिसमें चेहरा और आवाज़ दोनों झूठे प्रस्तुत किए जाते हैं; कभी हँसी-मज़ाक के लिए और अनेक बार अपराध के लिए भी।)

भयस्य प्रकारःपाठे कः वदतिहिन्दी
साइबर्-अपराधाःअध्यापकः — ‘विभिन्नप्रकारकाः साइबर्-अपराधाः समाजेषु देशेषु च चलन्ति’तरह-तरह के साइबर अपराध
डीप्-फेक्अध्यापकः — ‘मिथ्याचित्रं, दृश्यं, ध्वनिः वा’झूठा चेहरा-आवाज़ बनाकर ठगना या बदनाम करना
पूर्वग्रहःअध्यापकः — ‘निष्कर्षाः अपि पक्षपातयुक्ताः भवन्ति’पक्षपाती निर्णय
वृत्तिहरणस्य भयम्वेदः — ‘यदि कृतकबुद्धिः मनुष्यान् स्वस्ववृत्तेः निष्कासयति…’रोज़गार छिन जाने का डर
स्वामित्वस्य भयम्वेदः — ‘यन्त्राणि मानवेभ्यः संसारम् अधिगृह्णन्ति’ (चलच्चित्रे दृष्टम्)यन्त्र संसार पर अधिकार कर लेंगे — यह चलचित्रों वाला भय
पाठ भय को कैसे सँभालता है: ध्यान दीजिए, अध्यापक भय को झूठा नहीं कहते — ‘भयस्य कारणमपि यथार्थम् अस्ति’। पर वे यह भी दिखाते हैं कि दोष यन्त्र का नहीं, दुरुपयोग का है (‘दुरुपयोगेन हि’ — यहाँ ‘हि’ कारण पर बल देता है)। और उपाय भी चार बताते हैं — कृतकबुद्धि-साक्षरता, नैतिक प्रशिक्षण, सरकारी नियन्त्रण तथा आत्मनियन्त्रण। पूर्ण उत्तर वही है जो भय के साथ उपाय भी कहे।
प्र9.
‘कृतकबुद्धिः मित्रं भवेत्, न भवेत् स्वामी’ इति वाक्यस्य कः अर्थः ?
उत्तर

उत्तरम् — अस्य वाक्यस्य अयम् अर्थः यत् कृतकबुद्धिः अस्माकं सहायिका मित्रम् इव भवेत्, न तु अस्माकं स्वामिनी। वयं तस्याः उपयोगं कुर्याम, न तु सा अस्मान् चालयेत्। सा उपकरणम् अस्ति, प्रेरणा तु मानवेभ्यः एव आगच्छति। अतः विवेकेन तस्याः प्रयोगः करणीयः — तदा एव सा ‘मानवबुद्धेः सहकरी’ भवितुम् अर्हति।

(हिन्दी — इस वाक्य का अर्थ है कि कृतकबुद्धि हमारी सहायक मित्र बने, हमारी स्वामिनी नहीं। हम उसका उपयोग करें, वह हमें न चलाए। वह उपकरण है — प्रेरणा तो मनुष्यों से ही आती है। इसलिए उसका प्रयोग विवेकपूर्वक करना चाहिए; तभी वह सचमुच ‘मानवबुद्धि की सहयोगिनी’ बन सकती है।)

यदा सा ‘मित्रम्’ भवतियदा सा ‘स्वामी’ भवति
वयं स्वयं चिन्तयामः, सा साहाय्यं करोतिवयं चिन्तनम् एव त्यजामः, सा यत् वदति तत् एव मन्यामहे
तस्याः उत्तरं विवेकेन परीक्षामहेतस्याः उत्तरं बिना परीक्षणं स्वीकुर्मः
कालः, श्रमः च रक्ष्यतेस्मृतिः, कौशलं, निर्णयशक्तिः च क्षीयन्ते
सा उपकरणम् — वयं कर्तारःसा कर्त्री — वयं केवलं अनुगामिनः
‘भवेत्’ शब्द पर ध्यान दीजिए: यह विधिलिङ् लकार है, अर्थात् ‘होना चाहिए’ — यह वर्णन नहीं, चेतावनी और संकल्प है। भास्कर ने यह वाक्य सुनकर कहा — ‘इति वाक्यं मम मनः स्पृशति’ (यह वाक्य मेरे मन को छू जाता है), क्योंकि यह वाक्य पूरे पाठ का निचोड़ है। मित्र और स्वामी में अन्तर यही है कि मित्र से हम सलाह लेते हैं, स्वामी की हम आज्ञा मानते हैं। जिस दिन विद्यार्थी बिना सोचे ए.आई. का उत्तर उतारने लगे, उसी दिन वह मित्र से स्वामी बन जाती है।
पाठ के तीन समानार्थी वाक्य साथ जोड़िए: (१) ‘कृतकबुद्धिः गुरुमित्रम् अस्ति, गुरुविकल्पः नास्ति।’ (२) ‘कृतकबुद्धिः सहायिका अस्ति, मनुष्यस्य प्रतिस्पर्धिनी न।’ (३) ‘कृतकबुद्धिः उपकरणम् अस्ति, प्रेरणा तु मानवेभ्यः एव आगच्छति।’ — तीनों की रचना एक ही है : पहले कहो वह क्या है, फिर कहो वह क्या नहीं है। यह सूत्र उत्तर लिखने में भी काम आता है।
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