शारदा अध्याय 5 अत्र इदम् अवधेयम्

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
पञ्चमी विभक्तेः (अपादानकारकस्य) उपयोगं प्रयोगविधानं च पुस्तकानुसारं लिखत। पाठात् अपि उदाहरणानि दत्त।
उत्तर

पुस्तक का कथन — ‘पञ्चमी विभक्तिः (अपादानकारकम्) — उपयोगः : ‘कस्मात्’ ? इत्यस्य उत्तररूपेण उपयुज्यते। वियोगं, कारणम् अपसरणं च सूचयति।

(हिन्दी — पञ्चमी विभक्ति ‘कस्मात्?’ अर्थात् ‘किससे / कहाँ से / किस कारण?’ के उत्तर में आती है। यह तीन बातें बताती है — वियोग (अलग होना), कारण और अपसरण (हटना, दूर जाना)। हिन्दी में इसका चिह्न है ‘से’।)

प्रयोगविधानम्पुस्तक का उदाहरणहिन्दी अर्थपञ्चमीपदम्
(क) कारणबोधकःमूषकः बिडालात् बिभेति।चूहा बिल्ली से डरता है।बिडालात् — ‘भी’ (डरना) धातु के योग में जिससे डर हो, उसमें पञ्चमी
(ख) वियोगबोधकःछात्रः विद्यालयात् आगतः।छात्र विद्यालय से आया।विद्यालयात् — जहाँ से अलग होकर आया
(ग) अपसरणबोधकःदुर्जनः मूर्खतया धर्मात् भ्रष्टः।दुर्जन मूर्खता के कारण धर्म से भ्रष्ट हो गया।धर्मात् — जिससे हट गया

पाठात् उदाहरणानि (इसी पाठ से) —

१. मानवात् अपि अधिका बुद्धिमती। (मानवात् = मनुष्य से — तुलना में पञ्चमी)
२. यन्त्राणि मानवेभ्यः संसारम् अधिगृह्णन्ति। (मनुष्यों से — अपादान)
३. प्रेरणा तु मानवेभ्यः एव आगच्छति। (मनुष्यों से ही आती है — वियोग/उद्गम)
४. कृतकबुद्धि-सकाशात् समाजे महत् भयम्। (के कारण — ‘सकाशात्’ पञ्चम्यन्त)
५. अहं चैट-जीपीटी इत्यस्मात् एनं श्लोकं प्राप्तवान्। (उससे प्राप्त किया)
६. मनुष्यान् स्वस्ववृत्तेः निष्कासयति। (अपनी-अपनी आजीविका से निकालना)
नियम याद रखने की कुंजी: पाणिनि का सूत्र है — ‘ध्रुवमपायेऽपादानम्’ अर्थात् जब कोई वस्तु हटती है, तो जो स्थिर (ध्रुव) रहकर पीछे छूट जाता है, वही अपादान है और उसमें पञ्चमी होती है। ‘छात्रः विद्यालयात् आगतः’ में छात्र चला, विद्यालय वहीं रहा — इसलिए ‘विद्यालयात्’। यही परीक्षण हर वाक्य पर लगाइए : कौन चला और कौन ठहरा रहा ? जो ठहरा, उसमें पञ्चमी।
पञ्चमी की अन्य प्रसिद्ध जगहें: भय (बिभेति), रक्षा (रक्षति), तुलना (श्रेष्ठः/अधिकः), दूरी-निकटता (दूरात्, समीपात्), पहले-बाद (प्राक्, अनन्तरम्), तथा ‘ऋते’, ‘विना’, ‘बहिः’, ‘सकाशात्’ जैसे अव्यय। पाठ का ‘मानवात् अपि अधिका’ इसी तुलना-नियम का उदाहरण है।
प्र2.
षष्ठी विभक्तेः (सम्बन्धस्य) उपयोगं प्रयोगविधानं च लिखत। पाठात् अपि उदाहरणानि दत्त।
उत्तर

पुस्तक का कथन — ‘षष्ठी विभक्तिः (सम्बन्धः) — उपयोगः : ‘कस्य’ ? इत्यस्य उत्तररूपेण प्रयुज्यते। सम्बन्धं, स्वामित्वम्, अंशं विषयं च दर्शयति।

(हिन्दी — षष्ठी ‘कस्य?’ अर्थात् ‘किसका/किसकी/किसके?’ के उत्तर में आती है और चार बातें दिखाती है — सम्बन्ध, स्वामित्व, अंश तथा विषय। ध्यान रखिए — षष्ठी कोई कारक नहीं है, वह दो संज्ञाओं के बीच का सम्बन्ध बताती है; इसीलिए पुस्तक ने इसके आगे ‘कारकम्’ नहीं लिखा, केवल ‘सम्बन्धः’ लिखा है।)

प्रयोगविधानम्पुस्तक का उदाहरणहिन्दी अर्थक्या दिखाता है
(क) सम्बन्धबोधकःमम मित्रम्।मेरा मित्र।दो व्यक्तियों का आपसी नाता
(ख) स्वामित्वबोधकःबालकस्य पुस्तकम्।बालक की पुस्तक।किसकी है — अधिकार
(ग) अंशबोधकःशरीरस्य ऊर्ध्वभागे हृदयं मस्तिष्कं च स्तः।शरीर के ऊपरी भाग में हृदय और मस्तिष्क हैं।पूर्ण में से एक भाग
(घ) विषयबोधकःफलस्य स्वादः रुचिकरः।फल का स्वाद रुचिकर है।किस विषय का गुण

पाठात् उदाहरणानि —

१. कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी। (शीर्षक — सम्बन्ध)
२. अस्याः यन्त्रपाठशालायाः नाम ‘डेटासेट्’। (सम्बन्ध/नाम)
३. कृतकबुद्धेः दुरुपयोगेन साइबर्-अपराधाः चलन्ति। (विषय)
४. शिक्षकाणां सान्निध्ये व्यक्तित्वविकासः भवति। (सम्बन्ध)
५. मनुष्यस्य प्रतिस्पर्धिनी न। (सम्बन्ध)
६. अपराधस्य शमनाय — ‘अपराधशमनाय’ इति समासे। (विषय)
७. सर्वेषां कृते कृतकबुद्धिः। (‘कृते’ के योग में षष्ठी)
समास और षष्ठी का रिश्ता: इस पाठ के प्रायः सब नए शब्द षष्ठी-तत्पुरुष हैं — यन्त्राधिगमः (यन्त्रस्य अधिगमः), संवादोपकरणम् (संवादस्य उपकरणम्), रश्मिपरीक्षणविद्या (रश्मिपरीक्षणस्य विद्या), मुखपरिचयप्रणाली। अर्थात् समास तोड़ते ही षष्ठी प्रकट हो जाती है — यही कारण है कि षष्ठी को ठीक से जान लेने पर विग्रह अपने आप बनने लगता है। पुस्तक ने शब्दार्थ-तालिका में स्वयं ‘(षष्ठी-तत्पुरुषः)’ लिखकर यह सङ्केत दिया है।
सावधान: षष्ठी क्रिया से नहीं जुड़ती, संज्ञा से जुड़ती है। ‘बालकस्य पुस्तकम्’ में ‘बालकस्य’ का सम्बन्ध ‘पुस्तकम्’ से है, किसी क्रिया से नहीं। इसीलिए व्याकरण में कहा जाता है — ‘कारके षष्ठी न भवति’, अर्थात् जहाँ कारक-सम्बन्ध हो वहाँ षष्ठी नहीं आती। कुछ अपवाद अव्ययों के साथ हैं — ‘कृते’, ‘अधः’, ‘उपरि’, ‘पुरतः’, ‘समीपे’ के योग में षष्ठी होती है।
प्र3.
सप्तमी विभक्तेः (अधिकरणकारकस्य) उपयोगं प्रयोगविधानं च लिखत। पाठात् अपि उदाहरणानि दत्त।
उत्तर

पुस्तक का कथन — ‘सप्तमी विभक्तिः (अधिकरणकारकम्) — उपयोगः : ‘कस्मिन्’ ? इत्यस्य उत्तररूपेण प्रयुज्यते। स्थानं, कालम् आधारं च बोधयति।

(हिन्दी — सप्तमी ‘कस्मिन्?’ अर्थात् ‘किसमें / कहाँ / कब?’ के उत्तर में आती है और तीन बातें बताती है — स्थान, काल तथा आधार। हिन्दी में इसके चिह्न हैं ‘में’ और ‘पर’।)

प्रयोगविधानम्पुस्तक का उदाहरणहिन्दी अर्थकौन-सा अधिकरण
(क) स्थानबोधकःविद्यालये पठति।विद्यालय में पढ़ता है।औपश्लेषिक — भीतर होना
(ख) कालबोधकःप्रभाते सूर्यः उदेति।प्रातःकाल सूर्य उगता है।कालाधिकरण
(ग) आधारबोधकःभूमौ पादपाः रोहन्ति।भूमि पर पौधे उगते हैं।आधार — जिस पर टिका हो

पाठात् उदाहरणानि —

१. शिक्षायां, चिकित्सायां, कृषि-क्षेत्रे, न्यायालये, सञ्चारे, वित्ते … कृतकबुद्धिः उपयुज्यते। (स्थान/क्षेत्र)
२. अध्यापकः कक्षायां प्रविशति। (स्थान)
३. एषा बुद्धिः यन्त्रे स्थाप्यते। (आधार)
४. अस्माकं बुद्धिः मस्तिष्के स्थापिता। (स्थान)
५. कृतकबुद्धिः अद्यापि विकासपदे अस्ति। (अवस्था — आधार)
६. शिक्षकाणाम् अनुपस्थितौ अपि छात्राः अध्येतुं शक्नुवन्ति। (काल/अवस्था)
७. एताद् वाक्यम् अस्माकं मनसि स्पष्टं स्यात्। (आधार)
तीनों विभक्तियों को एक पंक्ति में पकड़िए: ये तीनों तीन अलग प्रश्नों के उत्तर हैं — कस्मात्? (कहाँ से) → पञ्चमी; कस्य? (किसका) → षष्ठी; कस्मिन्? (कहाँ/किसमें) → सप्तमी। एक ही वाक्य में तीनों देखिए — ‘छात्रः विद्यालयात् (५) आचार्यस्य (६) सान्निध्ये (७) ज्ञानं लभते।’ — विद्यालय से, आचार्य के, सान्निध्य में। जिस दिन प्रश्न-शब्द पकड़ में आ जाए, उस दिन विभक्ति कभी नहीं भूलेगी।
Tip: अभ्यास के प्रश्न १ में ‘कृतकबुद्धिः कुत्र प्रयुज्यते ?’ पूछा गया है। ‘कुत्र’ भी सप्तमी का ही अव्यय-रूप है, इसलिए उसका उत्तर भी सप्तमी में ही देना है — ‘शिक्षायां, चिकित्सायां, कृषिक्षेत्रे…’। प्रश्न-शब्द ही उत्तर की विभक्ति तय करता है।
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