पुस्तक का कथन — ‘पञ्चमी विभक्तिः (अपादानकारकम्) — उपयोगः : ‘कस्मात्’ ? इत्यस्य उत्तररूपेण उपयुज्यते। वियोगं, कारणम् अपसरणं च सूचयति।’
(हिन्दी — पञ्चमी विभक्ति ‘कस्मात्?’ अर्थात् ‘किससे / कहाँ से / किस कारण?’ के उत्तर में आती है। यह तीन बातें बताती है — वियोग (अलग होना), कारण और अपसरण (हटना, दूर जाना)। हिन्दी में इसका चिह्न है ‘से’।)
| प्रयोगविधानम् | पुस्तक का उदाहरण | हिन्दी अर्थ | पञ्चमीपदम् |
|---|---|---|---|
| (क) कारणबोधकः | मूषकः बिडालात् बिभेति। | चूहा बिल्ली से डरता है। | बिडालात् — ‘भी’ (डरना) धातु के योग में जिससे डर हो, उसमें पञ्चमी |
| (ख) वियोगबोधकः | छात्रः विद्यालयात् आगतः। | छात्र विद्यालय से आया। | विद्यालयात् — जहाँ से अलग होकर आया |
| (ग) अपसरणबोधकः | दुर्जनः मूर्खतया धर्मात् भ्रष्टः। | दुर्जन मूर्खता के कारण धर्म से भ्रष्ट हो गया। | धर्मात् — जिससे हट गया |
पाठात् उदाहरणानि (इसी पाठ से) —
२. यन्त्राणि मानवेभ्यः संसारम् अधिगृह्णन्ति। (मनुष्यों से — अपादान)
३. प्रेरणा तु मानवेभ्यः एव आगच्छति। (मनुष्यों से ही आती है — वियोग/उद्गम)
४. कृतकबुद्धि-सकाशात् समाजे महत् भयम्। (के कारण — ‘सकाशात्’ पञ्चम्यन्त)
५. अहं चैट-जीपीटी इत्यस्मात् एनं श्लोकं प्राप्तवान्। (उससे प्राप्त किया)
६. मनुष्यान् स्वस्ववृत्तेः निष्कासयति। (अपनी-अपनी आजीविका से निकालना)