प्र1.
‘सर्वं शब्देन भासते’ इति तालिकायाः अन्तिमः स्तम्भः — ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ — रिक्तः अस्ति। पाठे प्रयुक्तानां शब्दानाम् अर्थान् ज्ञात्वा तं स्तम्भं पूरयत।
उत्तर
पुस्तक में यह अन्तिम स्तम्भ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है — विद्यार्थी को हर शब्द का अर्थ अपनी मातृभाषा में लिखना है। नीचे पूरी तालिका दी है और वह स्तम्भ हिन्दी (हमारी माध्यम-भाषा) में भर दिया गया है। जिनकी मातृभाषा मराठी, बाङ्ग्ला, गुजराती, तमिऴ, तेलुगु, कन्नड, ओड़िआ या कोई अन्य भारतीय भाषा है, वे इसी अर्थ के आधार पर अपनी भाषा का शब्द रखें।
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English | मातृभाषया अर्थम् (भरा हुआ — हिन्दी) |
|---|---|---|---|---|
| अध्येतुम् (अधि + √इ + तुमुन्) | अध्ययनं कर्तुम् | अध्ययन करने के लिए | For Studying | पढ़ने के लिए, सीखने के लिए |
| अधिगृह्णन्ति (अधि + √ग्रह् + लट्, प्र.पु.ब.व.) | स्वीकुर्वन्ति | अधिग्रहण करते हैं | Aquire | अपने अधिकार में ले लेते हैं, क़ब्ज़ा कर लेते हैं |
| अपराधशमनाय (षष्ठी-तत्पुरुषः, नपुं.च.ए.व.) | अपराधस्य शमनाय | अपराध की रोकथाम के लिए | Reducing crime | जुर्म रोकने के लिए |
| अर्हन्ति (√अर्ह् + लट्, प्र.पु.ब.व.) | शक्नुवन्ति | योग्य होते हैं | Deserve | पाने के काबिल होते हैं, समर्थ होते हैं |
| कृतकबुद्धिः (कर्मधारयः, स्त्री.प्र.ए.व.) | कृतका बुद्धिः | मनुष्य-बुद्धि जैसे यन्त्र का चिन्तन-कौशल | Artificial Intelligence | बनावटी बुद्धि — मशीन की सोचने की शक्ति |
| चिकित्सायाम् (स्त्री.स.ए.व.) | रोगोपचारस्य क्षेत्रे | चिकित्सा में | In medicine | इलाज के क्षेत्र में, दवा-दारू के काम में |
| डीप्-फेक् | गहनमिथ्याचित्रं कृतकबुद्ध्या निर्मितम् | कृत्रिम बुद्धि द्वारा निर्मित मिथ्याचित्र | AI-generated fake media | मशीन से बनाया गया नक़ली चेहरा, दृश्य या आवाज़ |
| तन्त्रांशः (पुं.प्र.ए.व.) | संगणक-तन्त्रः | सॉफ्टवेयर | Software | कम्प्यूटर में चलने वाला प्रोग्राम |
| दत्तांशः (पुं.प्र.ए.व.) | पूर्वदत्तं ज्ञानम् | डेटा, आँकड़े | Data | इकट्ठी की हुई जानकारी, आँकड़े |
| नैतिकता (स्त्री.प्र.ए.व.) | सदाचारः, धर्मनिष्ठा | नैतिक मूल्य | Ethics | सही-ग़लत की समझ, अच्छा आचरण |
| परीक्षणम् (नपुं.प्र.ए.व.) | समीक्षणम् | जाँच पड़ताल करना | Examination | परखना, जाँचना |
| पूर्वाग्रहः (पुं.प्र.ए.व.) | पूर्वं स्थापितं पक्षपातयुक्तं मतम् | पूर्वपक्षपात | Bias | पहले से बनी हुई एकतरफ़ा राय |
| प्रशिक्षयन्ति (प्र + √शिक्ष् + लट्, पुं.प्र.ब.व.) | शिक्षयन्ति, अभ्यासं कारयन्ति | प्रशिक्षण देते हैं | They coach | सिखाते हैं, अभ्यास कराते हैं |
| प्रतिस्पर्धिनी (स्त्री.प्र.ए.व.) | स्पर्धायुक्ता | प्रतियोगी | Competitor | होड़ करने वाली, मुक़ाबला करने वाली |
| प्रौद्योगिकीविशारदाः (पुं.प्र.ब.व.) | प्रौद्योगिकीशास्त्रे कुशलाः जनाः | तकनीकी विशेषज्ञ | Technology Experts | तकनीक के जानकार लोग |
| रश्मिपरीक्षणविद्या (षष्ठी-तत्पुरुषः, स्त्री.प्र.ए.व.) | रश्मिपरीक्षणस्य विद्या | किरण विज्ञान चिकित्सा | Radiology | एक्स-रे आदि किरणों से जाँच का शास्त्र |
| वाञ्छामः (√वाञ्छ् + लट्, प्र.पु.ब.व.) | इच्छामः | (हम) इच्छा करते हैं | We wish | हम चाहते हैं |
| वित्ते (नपुं.स.ए.व.) | अर्थव्यवस्थायाम् | वित्त क्षेत्र में | In finance | पैसे-कारोबार के क्षेत्र में |
| संवादोपकरणम् (नपुं.प्र.ए.व.) | संवादसाधनम् | वार्तालाप करने का साधन | Communication tool | बातचीत का साधन |
| सहकरी (स्त्री.प्र.ए.व.) | सहयोगिनी | सहयोगी | Helper | साथ मिलकर काम करने वाली, मददगार |
नमूना उत्तर (अन्य मातृभाषाओं में) — मराठी: सहकरी = ‘सहकारी / मदतनीस’, दत्तांशः = ‘माहिती’, नैतिकता = ‘नीतिमत्ता’। बाङ्ग्ला: सहकरी = ‘सहयोगी’, परीक्षणम् = ‘परीक्षा/यांचाई’, अर्हन्ति = ‘योग्य हय’। गुजराती: तन्त्रांशः = ‘सॉफ्टवेर’, पूर्वाग्रहः = ‘पूर्वग्रह’, वित्ते = ‘नाणाकीय क्षेत्रमां’। तमिऴ: कृतकबुद्धिः = ‘सेयर्कै नुण्णऱिवु’, सहकरी = ‘उदवियाळर्’। तेलुगु: दत्तांशः = ‘डेटा/समाचारं’, नैतिकता = ‘नीति’। अपनी भाषा में लिखते समय ध्यान रखिए कि अर्थ वही रहे जो संस्कृत स्तम्भ में दिया है।
यह स्तम्भ क्यों रखा गया: तकनीकी शब्द तभी अपने बनते हैं जब वे मातृभाषा की किसी जानी-पहचानी छवि से जुड़ जाएँ। ‘Data’ अजनबी है, ‘आँकड़े’ अपना है — और ‘दत्तांशः’ (दिया हुआ अंश) दोनों को जोड़ देता है। यही इस स्तम्भ का उद्देश्य है : संस्कृत → मातृभाषा → अंग्रेज़ी, तीनों को एक पंक्ति में देख लेने पर शब्द याद रखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती, वह समझ में आ जाता है।
पुस्तक में छपी दो बातें ध्यान देने योग्य: (१) ‘अधिगृह्णन्ति’ के सामने अंग्रेज़ी में Aquire छपा है — शुद्ध वर्तनी Acquire है। (२) ‘प्रशिक्षयन्ति’ के सामने कोष्ठक में ‘पुं.प्र.ब.व.’ लिखा है, जबकि यह क्रियापद है, अतः वहाँ ‘प्र.पु.ब.व.’ (प्रथमपुरुष बहुवचन) होना चाहिए — जैसा ‘अर्हन्ति’ तथा ‘अधिगृह्णन्ति’ के सामने ठीक छपा है। (३) ‘वाञ्छामः’ पद तालिका में तो है, किन्तु संवाद के मुद्रित अंश में कहीं नहीं आता — इसे अतिरिक्त शब्द-सम्पदा के रूप में सीख लीजिए।