प्र1.
पाठे आगतानां शब्दानाम् आधारेण शब्दजालं प्रदत्तम् अस्ति। अत्र वामतः दक्षिणं (यथा-कृतकबुद्धिः) उपरितः अधः (यथा-डेटासेट्) च उदाहरणानुसारं नूतन-पदानां रेखाङ्कनं कुरुत इति।
उत्तर
उत्तरम् — पुस्तक ने दो पद उदाहरण के रूप में पहले ही घेर दिए हैं — कृतकबुद्धिः (पंक्ति १, बाएँ से दाएँ) तथा डेटासेट् (स्तम्भ ८, ऊपर से नीचे)। शेष तेरह पद नीचे दिए हैं।
सबसे पहले पूरा वर्गचित्रजाल (९ × ९) पंक्ति-स्तम्भ की संख्या के साथ देख लीजिए, ताकि हर पद का ठिकाना जाँचा जा सके —
| पं.\स्त. | १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | स्फू | आ | कृ | त | क | बु | द्धिः | च | र्चा |
| २ | र्त | चा | गू | ग | ल | मा | न | चि | त्रः |
| ३ | प | र्यः | ग | र | डी | प् | आ | र्ट | क |
| ४ | ट | गो | ल | दी | प | म् | ए | आ | ई |
| ५ | ल | चै | स | क्षा | फे | सि | रि | डे | जै |
| ६ | म् | ट | हा | य | क् | शि | क्षा | टा | म |
| ७ | द | जी | य | न्त्रा | धि | ग | मः | से | ना |
| ८ | त्तां | पी | कः | र | चै | ट | बो | ट् | ई |
| ९ | शः | टी | ए | ले | क्सा | डि | जि | ट | ल् |
(अ) वामतः दक्षिणं (बाएँ से दाएँ) मिलने वाले पद —
| पदम् | स्थानम् | अर्थः / पाठे कुत्र आगतम् |
|---|---|---|
| कृतकबुद्धिः | पंक्ति १, स्तम्भ ३–७ (उदाहरणम् — पुस्तके एव अङ्कितम्) | Artificial Intelligence — पाठ का मुख्य विषय |
| चर्चा | पंक्ति १, स्तम्भ ८–९ | ‘…अधिकृत्य चर्चां कुर्वन्ति।’ (पृष्ठ ५१) |
| गूगलमानचित्रः | पंक्ति २, स्तम्भ ३–९ | Google Maps — ‘सङ्कुचितकृतकबुद्धिः — जीपीटी, गूगल-मानचित्रं, यू-ट्यूब्’ |
| सिरि | पंक्ति ५, स्तम्भ ६–७ | Siri — अध्यापक की उदाहरण-सूची में |
| शिक्षा | पंक्ति ६, स्तम्भ ६–७ | ‘शिक्षायां, चिकित्सायां…’ — प्रथम उपयोगक्षेत्र |
| यन्त्राधिगमः | पंक्ति ७, स्तम्भ ३–७ | Machine Learning — ‘यन्त्राधिगमः, गहनाधिगमः चेति विधिना’ |
| चैटबोट् | पंक्ति ८, स्तम्भ ५–८ | ‘संशयनिराकरणार्थं चैट्बोट्’ (पृष्ठ ५४) |
| एलेक्सा | पंक्ति ९, स्तम्भ ३–५ | Alexa — अथर्व की माता जिसका उपयोग करती हैं |
| डिजिटल् | पंक्ति ९, स्तम्भ ६–९ | ‘डिजिटल्-इण्डिया’ तथा ‘डिजिटल्-भारतं समृद्धं करवाम’ |
(आ) उपरितः अधः (ऊपर से नीचे) मिलने वाले पद —
| पदम् | स्थानम् | अर्थः / पाठे कुत्र आगतम् |
|---|---|---|
| डेटासेट् | स्तम्भ ८, पंक्ति ५–८ (उदाहरणम् — पुस्तके एव अङ्कितम्) | यन्त्रपाठशालायाः नाम |
| आचार्यः | स्तम्भ २, पंक्ति १–३ | ‘आचार्य ! अहं जानामि…’ — छात्र अध्यापक को इसी नाम से पुकारते हैं |
| चैटजीपीटी | स्तम्भ २, पंक्ति ५–९ | Chat-GPT — ‘अहं चैट-जीपीटी इत्यस्मात् एनं श्लोकं प्राप्तवान्’ |
| गूगलसहायकः | स्तम्भ ३, पंक्ति २–८ | Google Assistant — ‘मम माता गूगल-सहायकेन सह वार्तां करोति’ |
| दीक्षा | स्तम्भ ४, पंक्ति ४–५ | DIKSHA — शिक्षाक्षेत्रे कृतकबुद्ध्याधारितम् उपकरणम् |
| डीपफेक् | स्तम्भ ५, पंक्ति ३–६ | Deepfake — ‘कृतकबुद्ध्या निर्मितं मिथ्याचित्रम्’ |
| दत्तांशः | स्तम्भ १, पंक्ति ७–९ | Data — ‘यन्त्रं दत्तांशमाध्यमेन शिक्षणं करोति’ |
शब्दजाल हल करने की विधि: अटकल मत लगाइए — पाठ की शब्द-सूची पहले बनाइए, फिर उसे जाल में ढूँढ़िए। पाठ के नए पद हैं : कृतकबुद्धिः, दत्तांशः, डेटासेट्, डीप्-फेक्, चैट-जीपीटी, चैट्बोट्, एलेक्सा, सिरि, जेमिनि, गूगल-मानचित्रम्, गूगल-सहायकम्, यन्त्राधिगमः, गहनाधिगमः, दीक्षा, डिजिटल्, आचार्यः, शिक्षा, चर्चा। अब हर पद का पहला अक्षर जाल में खोजिए (जैसे ‘डे’, ‘चै’, ‘गू’), और वहीं से दाएँ तथा नीचे — केवल इन्हीं दो दिशाओं में — पढ़िए। इस विधि से पन्द्रह-सोलह पद दस मिनट में मिल जाते हैं।
दो सूक्ष्म बातें: (१) जाल में ‘डीपफेक्’ स्तम्भ ५ में ‘डी-प-फे-क्’ रूप में है, जबकि पाठ में यह ‘डीप्-फेक्’ (हलन्त ‘प्’ के साथ) छपा है — जाल में हलन्त हटा दिया गया है, अर्थ वही है। (२) स्तम्भ १ की पंक्ति ३–६ में ‘प-ट-ल-म्’ = ‘पटलम्’ (स्क्रीन) भी पढ़ा जा सकता है, किन्तु यह पद पाठ में कहीं नहीं आया; इसी प्रकार पंक्ति १–२ के ‘स्फू-र्त’ से कोई पाठगत शब्द नहीं बनता। ये अक्षर पूरक (filler) हैं — शब्दजाल में ऐसे अक्षर जान-बूझकर रखे जाते हैं ताकि खोज सरल न रह जाए।