शारदा अध्याय 5 अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
आर्यः यशिका च विद्यालये कृतकबुद्धेः उपयोगं कुरुत। ( )
उत्तर

उत्तरम् — अशुद्धम् (✗)

कारणम् — पाठे एतादृशं कथनं नास्ति। यशिका केवलम् एतावत् वदति यत् ‘अहं चैट-जीपीटी इत्यनेन अनेकेषां प्रश्नानां यथेष्टम् उत्तराणि प्राप्तवती’ — किन्तु ‘विद्यालये’ इति तत्र न उक्तम्। आर्यः तु केवलं प्रश्नान् पृच्छति (‘यन्त्राणामपि पाठशाला अस्ति वा ?’, ‘किं कृतकबुद्धिः चिकित्सायाम् अपि प्रयुज्यते ?’); सः कुत्रापि कृतकबुद्धेः उपयोगं न करोति।

(हिन्दी — पाठ में ऐसा कहीं नहीं कहा गया। यशिका ने केवल इतना कहा कि उसने चैट-जीपीटी से प्रश्नों के उत्तर पाए — ‘विद्यालय में’ यह नहीं कहा। और आर्य तो केवल प्रश्न पूछता है, उपयोग कहीं नहीं करता।)

व्याकरण की भी भूल: वाक्य में कर्ता दो हैं — ‘आर्यः यशिका च’ — अतः क्रिया द्विवचन में चाहिए : ‘कुरुतः’। ‘कुरुत’ तो लोट् लकार, मध्यमपुरुष, बहुवचन (‘तुम सब करो’) का रूप है, जो यहाँ बिलकुल नहीं बैठता। शुद्ध वाक्य होता — ‘आर्यः यशिका च विद्यालये कृतकबुद्धेः उपयोगं कुरुतः।’
प्र2.
कृतकबुद्धिः केवलं विनोदानुकूलम् उपकरणम् अस्ति। ( )
उत्तर

उत्तरम् — अशुद्धम् (✗)

कारणम् — पाठे स्पष्टम् उक्तं यत् ‘शिक्षायां, चिकित्सायां, कृषि-क्षेत्रे, न्यायालये, सञ्चारे, वित्ते, कलासङ्गीतक्षेत्रे मनोरञ्जनादिषु क्षेत्रेषु च कृतकबुद्धिः भूरिशः उपयुज्यते।’ अतः सा केवलं विनोदस्य (मनोरञ्जनस्य) उपकरणं नास्ति — मनोरञ्जनं तु तस्याः अष्टानां क्षेत्राणाम् एकम् एव क्षेत्रम्।

(हिन्दी — पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि कृतकबुद्धि शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, न्यायालय, सञ्चार, वित्त, कला-सङ्गीत तथा मनोरञ्जन — इन सब क्षेत्रों में बहुतायत से प्रयुक्त होती है। मनोरञ्जन तो उसका केवल एक क्षेत्र है।)

‘केवलम्’ शब्द पर ध्यान दीजिए: इस वाक्य को अशुद्ध बनाने वाला शब्द ‘केवलम्’ है। यदि यह हटा दें — ‘कृतकबुद्धिः विनोदानुकूलम् अपि उपकरणम् अस्ति’ — तो वाक्य शुद्ध हो जाएगा। सत्य/असत्य के प्रश्नों में ‘केवलम्’, ‘सर्वदा’, ‘कदापि न’ जैसे सीमा बाँधने वाले शब्द प्रायः वाक्य को असत्य कर देते हैं। पढ़ते समय इन्हें रेखांकित कर लीजिए।
प्र3.
अथर्वः अपि शिक्षायां कृतकबुद्धेः प्रयोगं करोति। ( )
उत्तर

उत्तरम् — अशुद्धम् (✗)

कारणम् — अथर्वः शिक्षायां कृतकबुद्धेः उपयोगं न करोति, अपि तु तद्विषये प्रश्नं पृच्छति — ‘महोदय ! कृतकबुद्धिः कथं शिक्षायां साहाय्यं करोति ? किं शिक्षकस्य स्थाने कृतकबुद्धिः अस्मान् पाठयिष्यति ?’ अन्यत्र सः केवलम् एतत् वदति यत् ‘मम माता ‘एलेक्सा’-नामकस्य यन्त्रस्य उपयोगं करोति’ — अर्थात् उपयोगः मातुः, न तु तस्य, तथा सः उपयोगः गृहे भवति, न शिक्षायाम्।

(हिन्दी — अथर्व शिक्षा में ए.आई. का उपयोग नहीं करता, बल्कि उसके विषय में प्रश्न पूछता है। एलेक्सा का उपयोग भी उसकी माता करती हैं, वह भी घर में — शिक्षा में नहीं।)

पढ़ने की सावधानी: इस प्रकार के वाक्यों में तीन बातें अलग-अलग जाँचिए — कौन (अथर्वः), क्या करता है (प्रयोगं करोति), कहाँ (शिक्षायाम्)। यदि तीनों में से एक भी पाठ से न मिले, तो वाक्य अशुद्ध है। यहाँ ‘कौन’ ही नहीं मिलता — प्रयोग माता करती हैं, अथर्व नहीं।
प्र4.
अक्षतः चैट्बोट् इत्यस्य साहाय्येन उपन्यासलेखनं करोति। ( )
उत्तर

उत्तरम् — अशुद्धम् (✗)

कारणम् — पाठे अक्षतः केवलं द्वौ प्रश्नौ पृच्छति — ‘के ते प्रकाराः मान्यवर !’ तथा ‘किं कृषि-क्षेत्रे अपि प्रयुज्यते ?’। ‘उपन्यासलेखनम्’ इति शब्दः पाठे कुत्रापि नास्ति, न च केनापि छात्रेण एतादृशं कर्म कृतम्। चैट्बोट् इत्यस्य विषये पाठः केवलम् एतावत् वदति यत् सः ‘संशयनिराकरणार्थम्’ प्रयुज्यते।

(हिन्दी — पाठ में अक्षत केवल दो प्रश्न पूछता है — प्रकारों के विषय में और कृषि-क्षेत्र के विषय में। ‘उपन्यास-लेखन’ शब्द पाठ में कहीं नहीं है। चैटबोट का उल्लेख केवल ‘शङ्का दूर करने के लिए’ हुआ है।)

प्र5.
ए.आइ. डीप्-फेक् इत्यपि कश्चन दुरुपयोगः अस्ति। ( )
उत्तर

उत्तरम् — शुद्धम् (✓)

कारणम् — अध्यापकः स्पष्टम् एव वदति — ‘अद्यत्वे कृतकबुद्धेः दुरुपयोगेन हि विभिन्नप्रकारकाः साइबर्-अपराधाः समाजेषु देशेषु च चलन्ति।’ ततः सः डीप्-फेक् इत्यस्य स्वरूपं व्याख्याति — ‘कृतकबुद्ध्या निर्मितं मिथ्याचित्रं, दृश्यं, ध्वनिः वा … उपहासाय, अनेकदा अपराधाय चापि।’ यत् उपहासाय अपराधाय च प्रयुज्यते, तत् दुरुपयोगः एव।

(हिन्दी — अध्यापक स्वयं कहते हैं कि कृतकबुद्धि के दुरुपयोग से साइबर-अपराध चल रहे हैं, और डीप्-फेक् का प्रयोग उपहास तथा अनेक बार अपराध के लिए होता है। जो हँसी उड़ाने और अपराध के लिए प्रयोग हो, वह दुरुपयोग ही है।)

इस समूह का एकमात्र शुद्ध वाक्य: प्रश्न ५ के सात वाक्यों में यही एक वाक्य पाठ से पूरी तरह प्रमाणित होता है। शेष छह में किसी पात्र के नाम के साथ ऐसा काम जोड़ दिया गया है जो पाठ में उसने किया ही नहीं, अथवा कोई अत्युक्ति (‘केवलम्’) रख दी गई है। इसीलिए यह अभ्यास ध्यान से पढ़ने का अभ्यास है, स्मृति का नहीं — उत्तर देने से पहले उस पात्र की पंक्तियाँ फिर से देख लेना ही सही विधि है।
प्र6.
आर्यः चित्रनिर्माणाय कृतकबुद्धेः साहाय्यं प्राप्नोति। ( )
उत्तर

उत्तरम् — अशुद्धम् (✗)

कारणम् — पाठे आर्यस्य त्रयः एव संवादाः सन्ति — ‘यन्त्राणामपि पाठशाला अस्ति वा ?’, ‘महोदय ! किं कृतकबुद्धिः चिकित्सायाम् अपि प्रयुज्यते ?’ तथा (पूर्वं) आश्चर्यसूचकाः वाक्यानि। सः चित्रनिर्माणाय कृतकबुद्धेः साहाय्यं न प्राप्नोति। ‘चित्रोत्पादनम्’ इति विषयः केवलम् अभ्यासस्य द्वितीयप्रश्ने ‘दॅल्ल्-ई’ इत्यनेन सह आगच्छति, पाठे न।

(हिन्दी — पाठ में आर्य केवल प्रश्न पूछता है — यन्त्रों की पाठशाला के विषय में और चिकित्सा के विषय में। चित्र बनाने के लिए ए.आई. की सहायता लेने की बात पाठ में कहीं नहीं है; ‘चित्रोत्पादन’ का उल्लेख केवल अभ्यास के प्रश्न २ में DALL-E के साथ आया है।)

प्र7.
शिक्षकः गम्भीरतया चैट्बोट् वाक्यानां मूल्याङ्कनं करोति। ( )
उत्तर

उत्तरम् — अशुद्धम् (✗)

कारणम् — पाठे शिक्षकस्य विषये यत् उक्तं तत् एतत् — सः ‘पुस्तकीयज्ञानेन सह मानवीयमूल्यबोधम् अपि जनयति’, ‘अनुशासनं, परोपकारं, करुणां, व्यवहारज्ञानं च शिक्षयति’। ‘चैट्बोट् इत्यस्य वाक्यानां मूल्याङ्कनम्’ इति कर्म पाठे कुत्रापि न वर्णितम्।

(हिन्दी — पाठ में शिक्षक के विषय में इतना ही कहा गया है कि वह पुस्तकीय ज्ञान के साथ मानवीय मूल्य, अनुशासन, परोपकार, करुणा तथा व्यवहार-ज्ञान सिखाता है। चैटबोट के वाक्यों का मूल्याङ्कन करने की बात पाठ में नहीं है।)

सम्पूर्ण उत्तर एक दृष्टि में: (क) ✗ · (ख) ✗ · (ग) ✗ · (घ) ✗ · (ङ) · (च) ✗ · (छ) ✗। — सात में केवल एक शुद्ध। उत्तर लिखते समय प्रत्येक के आगे कारण भी लिखिए; ‘✗’ अकेला आधा उत्तर है।
Tip — सत्य/असत्य कैसे जाँचें: हर वाक्य को तीन टुकड़ों में तोड़िए — कर्ता (कौन), क्रिया (क्या किया), स्थान/विषय (कहाँ, किस विषय में)। फिर पाठ में उसी पात्र की पंक्तियाँ ढूँढ़िए। तीनों टुकड़े मिलें तभी ‘✓’; एक भी न मिले तो ‘✗’। और ‘केवलम्’, ‘सर्वदा’, ‘सर्वत्र’, ‘कदापि’ जैसे शब्द दिखते ही सतर्क हो जाइए।
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