कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 2 आइए, और चिंतन करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कोशिकाएँ संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी वृद्धि का अनुवीक्षण किस प्रकार करती हैं?
उत्तर

नई कोशिकाओं के बनने और पुरानी कोशिकाओं की सुनियोजित, नियंत्रित मृत्यु के बीच संतुलन बनाकर। इसकी मुख्य प्रक्रिया क्रमादेशित कोशिका मृत्यु (पी.सी.डी.) है।

  • पी.सी.डी. कोशिका के वरणात्मक रूप से नष्ट होने की आनुवांशिकतः नियंत्रित और व्यवस्थित प्रक्रिया है — कोशिका निर्देश पर स्वयं को क्रमबद्ध ढंग से समेट लेती है, फटकर पड़ोसियों को हानि नहीं पहुँचाती।
  • यह तीन कार्यों के लिए अनिवार्य है — सामान्य विकास, कोशिकीय गुणवत्ता नियंत्रण और प्रतिरक्षा कार्य।
  • इसके साथ संपर्क अवरोध भी काम करता है — अनेक जंतु कोशिकाओं में पड़ोसी कोशिकाओं के संपर्क में आते ही विभाजन रुक जाता है, अतः ऊतक पूरा बनते ही बढ़ना बंद कर देता है।
  • प्रत्येक कोशिका की एक निश्चित जीवन अवधि भी होती है। उदाहरण के लिए, परिपक्व लाल रक्त कोशिकाएँ लगभग 120 दिन जीवित रहती हैं और फिर प्रतिस्थापित हो जाती हैं।
कोशिका विभाजन की दर = कोशिका मृत्यु की दर → ऊतक का आमाप स्थिर
विभाजन > मृत्यु → अर्बुद
विभाजन < मृत्यु → ऊतक क्षीण
ऐसा क्यों होता है: पुस्तक का सबसे प्रभावी उदाहरण मानव हाथ है। भ्रूण के विकास के समय पी.सी.डी. विकसित हो रही अँगुलियों के बीच की कोशिकाओं को हटा देता है, और इसी प्रकार चप्पू जैसी कली में से अलग-अलग अँगुलियाँ तराशी जाती हैं — इसके बिना हमारे हाथ जालयुक्त होते। अतः यहाँ कोशिका मृत्यु क्षति नहीं, मूर्तिकार का औजार है। यही प्रक्रिया उन कोशिकाओं को भी हटाती है जिनके डीएनए में त्रुटि आ गई हो, इससे पहले कि वे कैंसरयुक्त बनें — इसीलिए पी.सी.डी. को गुणवत्ता नियंत्रण कहा जाता है। दोनों छोरों पर समस्या है — कोशिकाएँ समय पर न मरें तो अर्बुद बनते हैं, और बहुत जल्दी मर जाएँ तो ऊतक टूटने लगते हैं।
प्र2.
आप ऐसी भिन्न पद्धतियों का अन्वेषण कीजिए जिनके द्वारा कोशिकाएँ स्वयं को बनाए रखती हैं।
उत्तर

कोशिका एक साथ कई गृह-प्रबंधन प्रणालियाँ चलाकर स्वस्थ रहती है। अन्वेषण के लिए ये बिंदु लीजिए, साथ में अध्याय का वह भाग भी जिससे प्रत्येक जुड़ता है।

स्वयं को बनाए रखने का उपाययह कैसे काम करता हैसंबंधित कोशिकांग या प्रक्रिया
भीतर-बाहर आने-जाने पर नियंत्रणवरणात्मक पारगम्य झिल्ली; प्रोटीन गेटकीपर का कार्य करते हैं; परासरण द्वारा जल संतुलनकोशिका झिल्ली
अपशिष्ट और जीर्ण भागों की सफाईएंजाइम अवांछित प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और क्षतिग्रस्त कोशिकांगों को पचाते हैं; उत्पाद कोशिकाद्रव्य में पुनःचक्रितलाइसोसोम
क्षतिग्रस्त अणुओं का प्रतिस्थापननए प्रोटीन संश्लेषित होते हैं, फिर रूपांतरित, वर्गीकृत और पैक होकर भेजे जाते हैंराइबोसोम, रूक्ष अंतर्द्रव्यी जालिका, गॉल्जी उपकरण
माँग पर ऊर्जा की आपूर्तिकोशिकीय श्वसन में ग्लूकोस विघटित होता है और ऊर्जा एटीपी में संग्रहीत होती हैमाइटोकॉन्ड्रिया
आकार बनाए रखना और भीतर परिवहनअत्यंत पतले तंतुओं का जाल संरचनात्मक स्थिरता और आंतरिक परिवहन देता हैकोशिका पंजर (cytoskeleton)
भंडारण और पृथक्करणजल, खनिज, शर्करा और अपशिष्ट कोशिका-रस में बंद; स्फीति बनी रहती हैरसधानी
पूरी कोशिकाओं का प्रतिस्थापनक्षतिग्रस्त या मृत कोशिकाओं की जगह समान नई कोशिकाएँसमसूत्री विभाजन
अनावश्यक कोशिकाओं को हटानावरणात्मक, आनुवंशिकतः नियंत्रित आत्म-विनाशक्रमादेशित कोशिका मृत्यु
ऐसा क्यों होता है: तालिका को ऊपर से नीचे पढ़िए और एक ही विचार बार-बार लौटता है — कोशिका स्थायी बनकर नहीं, निरंतर नवीनीकरण से जीवित रहती है। कोशिका का लगभग हर अणु समय के साथ टूटता और फिर बनता है; जो बना रहता है वह है प्रतिरूप, जो डीएनए में संचित है, और वे कक्ष जो हर प्रक्रिया को अलग रखते हैं। इसलिए रखरखाव को कोशिकांगों की उसी संरचना से अलग नहीं किया जा सकता जिसका वर्णन अभी हुआ — लाइसोसोम के बिना सफाई नहीं, माइटोकॉन्ड्रिया के बिना पुनर्निर्माण की ऊर्जा नहीं, और झिल्ली के बिना ऐसा ‘भीतर’ ही नहीं जिसे बनाए रखा जाए।
यह कीजिए: चित्र 2.10 से कोई एक कोशिकांग चुनिए और सोचिए कि यदि वह एक दिन काम करना बंद कर दे तो क्या-क्या विफल होगा। लाइसोसोम, माइटोकॉन्ड्रिया और गॉल्जी उपकरण के लिए बारी-बारी यह करने पर दिखेगा कि ये प्रणालियाँ एक-दूसरे पर कितनी निर्भर हैं।
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