कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 2 कोशिका — जीवन की निर्माण इकाई के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
नग्न नेत्र 25 cm के निकट बिंदु से लगभग 0.1 mm तक ही विभेदन कर सकता है। अधिकांश पादप और जंतु कोशिकाएँ 10–100 µm की होती हैं, अतः प्रकाश सूक्ष्मदर्शी आवश्यक है (नेत्रिका 10X × अभिदृश्यक 10X = 100X ); इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी नैनोमीटर स्तर तक पहुँचता है। कोशिका झिल्ली 7 से 10 nm मोटी होती है और लिपिड की द्विपरत में प्रोटीन अंतःस्थापित होते हैं — यही तरल-मोजेक मॉडल है। यह वरणात्मक रूप से पारगम्य है — जल आर-पार जाता है, घुले हुए नमक और चीनी के अणु नहीं। विसरण उच्च से निम्न सांद्रता की ओर कणों की शुद्ध गति है, झिल्ली के बिना भी। परासरण वरणात्मक रूप से पारगम्य झिल्ली के पार केवल जल का विसरण है — इसी कारण आलू का टुकड़ा साधारण जल में भारी और 20 प्रतिशत नमक के घोल में हल्का हो जाता है। पादप, कवक और जीवाणु कोशिकाओं में झिल्ली के बाहर सेल्युलोस की दृढ़ किंतु पारगम्य कोशिका भित्ति होती है। यही पादप कोशि
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| पद | अर्थ | अध्याय 2 में कहाँ | याद रखने योग्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| विभेदन सीमा | वह न्यूनतम दूरी जिस पर दो बिंदु अलग-अलग दिखाई देते हैं | खंड 2.1, कागज पर बने दो बिंदु | मानव नेत्र के लिए 25 cm के निकट बिंदु से 0.1 mm |
| आवर्धन | प्रतिबिंब वस्तु से कितने गुना बड़ा दिखता है | क्रियाकलाप 2.1 | कुल आवर्धन = नेत्रिका × अभिदृश्यक; 10X × 10X = 100X |
| वरणात्मक पारगम्यता | कुछ पदार्थों को जाने देना और कुछ को रोकना | कोशिका झिल्ली, खंड 2.2.1 | जल पार जाता है; नमक और चीनी के अणु नहीं |
| विसरण | उच्च से निम्न सांद्रता की ओर कणों की शुद्ध गति | कक्षा 8, अध्याय 7 से स्मरण | इसमें झिल्ली की आवश्यकता ही नहीं |
| परासरण | वरणात्मक पारगम्य झिल्ली के पार जल का विसरण | क्रियाकलाप 2.2, आलू के टुकड़े | जल सांद्र विलयन की ओर गति करता है |
| अल्पपरासारी / समपरासारी / अतिपरासारी | बाहरी विलेय सांद्रता भीतर से कम / बराबर / अधिक | चित्र 2.6, पृष्ठ 12 का ‘क्या होगा यदि...’ बॉक्स | कोशिका फूलती है / अपरिवर्तित रहती है / संकुचित होती है |
| तरल-मोजेक मॉडल | लिपिड की द्विपरत जिसमें प्रोटीन मोजेक की टाइलों की भाँति जड़े हों और सभी अणु गति कर सकें | चित्र 2.7, पृष्ठ 12 | झिल्ली केवल 7 से 10 nm मोटी |
| कोशिका भित्ति | झिल्ली के बाहर सेल्युलोस का दृढ़ किंतु पारगम्य आवरण | खंड 2.2.2 | पादप, कवक और जीवाणु में; जंतुओं में नहीं |
| पूर्वकेंद्रकी कोशिका | बिना झिल्ली-आबद्ध केंद्रक और कोशिकांगों वाली कोशिका | तालिका 2.2, पृष्ठ 15 | 1 से 10 µm; डीएनए केंद्रकाभ में मुक्त |
| सुकेंद्रकी कोशिका | सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-आबद्ध कोशिकांगों वाली कोशिका | तालिका 2.2, पृष्ठ 15 | 10 से 100 µm; एककोशिकीय या बहुकोशिकीय |
| लवक | भोजन बनाने और संग्रहीत करने वाले पादप कोशिकांग | खंड 2.3.1, पृष्ठ 18–19 | हरितलवक (हरा), वर्णीलवक (रंगीन), अवर्णी लवक (रंगहीन) |
| समसूत्री विभाजन | आनुवंशिक रूप से समान दो संतति कोशिकाएँ बनाने वाला विभाजन | खंड 2.4.1, चित्र 2.18 | वृद्धि, मरम्मत, रखरखाव, अलैंगिक जनन |
| अर्धसूत्री विभाजन | द्वि-चरणीय विभाजन जिससे आधे गुणसूत्रों वाली चार कोशिकाएँ बनती हैं | खंड 2.4.1, चित्र 2.19 | केवल वृषण, अंडाशय और परागकोश में; विविधता उत्पन्न करता है |
| संपर्क अवरोध | पड़ोसी कोशिकाओं के संपर्क में आने पर जंतु कोशिकाओं का विभाजन रुक जाना | खंड 2.5.1, पृष्ठ 23 | कैंसर कोशिकाओं में यह खो जाता है, अतः अर्बुद बनते हैं |
अभ्यास
- चिंतन कीजिए
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 2.1
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 2.2
- क्या होगा यदि...
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 2.3
- सोचिए और बताइए
- क्रियाकलाप 2.4
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- सोचिए और बताइए
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 2.5
- सोचिए और बताइए
- पाठ्य प्रश्न
- आइए, और चिंतन करें
- अभ्यास प्रश्न
- परियोजना कार्य
- खोज जारी है...