कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 4 क्रियाकलाप 4.3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
तालिका 4.3 का संदर्भ लीजिए। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि किस राशि (समय अथवा स्थिति) को इन दोनों में से किस अक्ष के अनुदिश दर्शाया जाए।
समय0 s1 s2 s3 s4 s5 s6 s
स्थिति0 m20 m40 m60 m80 m100 m120 m
तालिका 4.3, पृष्ठ 57 — विभिन्न क्षणों पर किसी वाहन की स्थितियाँ।
उत्तर

समय को X-अक्ष के अनुदिश और स्थिति को Y-अक्ष के अनुदिश दर्शाइए।

ऐसा क्यों होता है: समय वह राशि है जिसे हम स्वयं नियमित रूप से पढ़ते जाते हैं — वाहन कुछ भी करे, समय अपनी गति से बीतता ही रहता है। स्थिति वह राशि है जो समय के अनुसार बदलती है। हर ग्राफ की परिपाटी यही है कि नियंत्रक (स्वतंत्र) राशि X-अक्ष पर और परिवर्तित होने वाली (आश्रित) राशि Y-अक्ष पर रखी जाए। इससे प्रवणता, अर्थात ऊर्ध्वाधर परिवर्तन ÷ क्षैतिज परिवर्तन, स्वयं ही "स्थिति में परिवर्तन ÷ समय में परिवर्तन" बन जाती है — जो वेग है, और वही हमें चाहिए। अक्ष बदल दीजिए तो प्रवणता "समय प्रति मीटर" बन जाएगी, जिसका कोई उपयोग नहीं।
सुझाव: यही नियम आगे वेग-समय ग्राफ को अर्थ देता है — X पर समय और Y पर वेग होने से प्रवणता त्वरण देती है और क्षेत्रफल विस्थापन।
प्र2.
ग्राफ पेपर पर निरूपण हेतु प्रत्येक राशि के लिए एक उपयुक्त मापक्रम निर्धारित कीजिए।
समय0 s1 s2 s3 s4 s5 s6 s
स्थिति0 m20 m40 m60 m80 m100 m120 m
तालिका 4.3, पृष्ठ 57 — विभिन्न क्षणों पर किसी वाहन की स्थितियाँ।
उत्तर

अच्छा मापक्रम वह है जो आँकड़ों को पूरे पृष्ठ पर फैला दे और अंक भी सरलता से अंकित हो जाएँ। तालिका 4.3 के लिए पुस्तक का चयन है —

X-अक्ष पर: 5 भाग = 1 s  (समय 0 s से 6 s तक)
Y-अक्ष पर: 5 भाग = 20 m  (स्थिति 0 m से 120 m तक)

देखिए इससे कितना स्थान भरता है — 6 s × 5 भाग = 30 भाग चौड़ाई में, और 120 m ÷ 20 m × 5 = 30 भाग ऊँचाई में। साधारण ग्राफ पेपर पर यह एक सुविधाजनक वर्गाकार क्षेत्र है।

ऐसा क्यों होता है: मापक्रम दो शर्तों से तय होता है। (क) सबसे बड़ा मान पृष्ठ पर आ जाए। (ख) प्रत्येक छोटा भाग किसी गोल संख्या (1, 2, 5, 10, 20 …) को निरूपित करे, ताकि बीच के बिंदु बिना परिकलन के पढ़े जा सकें। "5 भाग = 17 m" जैसा मापक्रम पृष्ठ पर आ तो जाएगा, पर उस पर 60 m अंकित करना असंभव होगा। इसी प्रकार बहुत बड़ा मापक्रम, जैसे 5 भाग = 100 m, सभी छह बिंदुओं को एक कोने में समेट देगा और प्रवणता का यथार्थ मापन असंभव हो जाएगा।
स्वयं जाँचिए: मापक्रम से ग्राफ का रूप बदलता है, अर्थ नहीं। रेखा कागज़ पर कितनी ढलवाँ दिखती है यह आपके चुने मापक्रम पर निर्भर है, पर उससे परिकलित वेग नहीं बदलता।
प्र3.
सभी बिंदुओं का आलेखन हो जाने के पश्चात उन्हें संयोजित करके वाहन की गति का स्थिति-समय ग्राफ बनाइए (4.11 ग)। तालिका 4.3 में दिए गए आँकड़ों के लिए यह एक सरल रेखा है।
समय0 s1 s2 s3 s4 s5 s6 s
स्थिति0 m20 m40 m60 m80 m100 m120 m
तालिका 4.3, पृष्ठ 57 — विभिन्न क्षणों पर किसी वाहन की स्थितियाँ।
उत्तर

(0 s, 0 m), (1 s, 20 m), (2 s, 40 m) … (6 s, 120 m) अंकित करके जोड़ने पर मूलबिंदु से जाती हुई एक ही सरल रेखा प्राप्त होती है।

0123456 20406080100120 समय (s) स्थिति (m)
तालिका 4.3 का स्थिति-समय ग्राफ। हर 1 s में 20 m की समान वृद्धि होने से सभी बिंदु एक ही सरल रेखा पर आते हैं।
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक क्रमागत 1 s में वाहन की स्थिति ठीक 20 m बढ़ती है। समान क्षैतिज परिवर्तन पर समान ऊर्ध्वाधर परिवर्तन — ज्यामिति में यही सरल रेखा की शर्त है। इसकी प्रवणता ही वेग है —
v = (120 m − 0 m) / (6 s − 0 s) = 20 m s⁻¹, पूरे समय नियत
अत: सरल रेखीय स्थिति-समय ग्राफ का अर्थ है नियत वेग, अर्थात एकसमान गति।
सुझाव: यह ग्राफ सड़क का चित्र नहीं है। यह यह नहीं कहता कि वाहन "ऊपर" गया — यह कहता है कि मूलबिंदु से उसकी दूरी समय के साथ नियमित रूप से बढ़ी।
क्या यह उपयोगी रहा?