कक्षा ४ गणित अध्याय 1 आइए बनाते हैं के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
एक पंचभुज (Pentagon) को बनाने का प्रयास कीजिए जिसकी सभी भुजाएँ समान हों। क्या ये कोण समकोण हैं?
पुस्तक में दिखाया गया स्ट्रॉ का पंचभुज — मिट्टी से जुड़े पाँच बराबर स्ट्रॉ।
उत्तर
नहीं। पाँचों में से कोई भी कोण समकोण नहीं है।
बराबर लंबाई के 5 स्ट्रॉ काटिए।
मिट्टी की छोटी गोलियों से उन्हें सिरे-से-सिरा जोड़कर बंद पंचभुज बनाइए।
अपना कागज़ का समकोण मापक हर कोने पर रखिए।
मापक ठीक नहीं बैठता — हर कोना मापक से चौड़ा है। अत: पाँचों
कोण अधिक कोण हैं।
ऐसा क्यों: पंचभुज को केवल पाँच कोनों में बंद होना है। यदि उसके
कोने समकोण होते तो भुजाएँ इतना तीखा मुड़तीं कि आकृति चार भुजाओं में ही बंद हो जाती और
वर्ग बन जाता।
प्र2.
जब हम इस पंचभुज की एक भुजा को धीरे से सरकाते हैं तब क्या इस पंचभुज की आकृति में कोई परिवर्तन होता है? हाँ/नहीं इससे कोणों में किस प्रकार परिवर्तन होता है?
पुस्तक में दिखाया गया स्ट्रॉ का पंचभुज — मिट्टी से जुड़े पाँच बराबर स्ट्रॉ।
उत्तर
हाँ। पंचभुज की आकृति तुरंत बदल जाती है।
पाँचों स्ट्रॉ पहले जितने ही लंबे रहते हैं।
कुछ कोने सिकुड़कर छोटे हो जाते हैं; उनके पास वाले कोने खुलकर बड़े हो
जाते हैं।
अधिक सरकाने पर कोई कोना समकोण या न्यून कोण तक बन सकता है।
ऐसा क्यों: केवल त्रिभुज ही दृढ़ होता है। तीन से अधिक भुजाओं वाली
कोई भी आकृति भुजाओं की लंबाई वही रखते हुए अपने कोण बदल सकती है, इसलिए पंचभुज सरकाते ही
अपनी आकृति खो देता है।
यह करके देखिए: पंचभुज में एक कोने से दूसरे कोने तक दो स्ट्रॉ
जोड़ दीजिए। अब वह त्रिभुजों से बना है और मुड़ना बंद कर देता है।
प्र3.
क्या आप नलिका (स्ट्रॉ) के उपयोग से एक वृत्त बना सकते हैं? इस चित्र को देखिए। चित्र में प्रत्येक स्ट्रॉ की लंबाई ................. है। (समान/असमान)
एक केंद्र से बाहर की ओर रखी स्ट्रॉ का चित्र।
उत्तर
स्ट्रॉ की लंबाइयाँ समान हैं।
सभी स्ट्रॉ बीच के एक ही बिंदु से शुरू होते हैं।
हर स्ट्रॉ दूसरे के बिलकुल बराबर लंबा है।
इसलिए उनके बाहरी सिरे बीच से समान दूरी पर रुकते हैं और वे सिरे मिलकर वृत्त बना देते
हैं।
ऐसा क्यों: वृत्त उन सभी बिंदुओं से बनता है जो एक केंद्र से समान
दूरी पर हों। एक ही केंद्र से निकले बराबर स्ट्रॉ ठीक वही बिंदु अंकित कर देते हैं।
प्र4.
यदि हम असमान लंबाइयों की स्ट्रॉ लेंगे तब क्या होगा?
एक केंद्र से बाहर की ओर रखी स्ट्रॉ का चित्र।
उत्तर
बाहरी सिरे तब वृत्त पर नहीं रहेंगे।
लंबा स्ट्रॉ दूर तक पहुँचेगा; छोटा स्ट्रॉ बीच के पास ही रुक जाएगा।
सिरों को जोड़ने पर ऊबड़-खाबड़ वक्र बनेगा — कभी अंदर, कभी बाहर।
वह तारे या फूल जैसा दिखेगा, वृत्त जैसा नहीं।
ऐसा क्यों: कोई आकृति वृत्त तभी होती है जब उसकी परिसीमा का हर
बिंदु केंद्र से समान दूरी पर हो। असमान स्ट्रॉ इस नियम को तोड़ देते हैं।
प्र5.
क्या एक वृत्ताकार आकृति को बनाने में आप मापक (स्केल) का उपयोग कर सकते हैं? आइए देखें। एक बिंदु ‘क’ अंकित कीजिए। अब ऐसे अनेक बिंदु अंकित कीजिए जो बिंदु ‘क’ से समान दूरी पर हैं। इन बिंदुओं को एक वक्र द्वारा जोड़िए। आपको क्या प्राप्त होता है?
बिंदु ‘क’ और उससे समान दूरी पर अंकित अनेक बिंदु।
उत्तर
हमें एक वृत्त प्राप्त होता है।
एक बिंदु अंकित कीजिए और उसका नाम ‘क’ रखिए।
एक लंबाई चुनिए, मान लीजिए 3 सेमी।
मापक का शून्य ‘क’ पर रखिए, मापक को थोड़ा घुमाइए और 3 सेमी पर एक बिंदु लगाइए। ‘क’ के
चारों ओर ऐसा बार-बार कीजिए।
जब ऐसे अनेक बिंदु बन जाएँ, उन्हें हाथ से जोड़ दीजिए।
जो वक्र बनता है वह वृत्त है। बिंदु ‘क’ उसका केंद्र है और केंद्र
से परिसीमा तक की रेखा त्रिज्या है।
हर अंकित बिंदु ‘क’ से 3 सेमी दूर है।
अत: इस वृत्त की त्रिज्या = 3 सेमी
ऐसा क्यों: ‘क’ से एक निश्चित दूरी पर बिंदु अंकित करना ही वृत्त
बनाने का नियम है। जितने अधिक बिंदु अंकित करेंगे, वृत्त उतना ही चिकना दिखेगा।