कक्षा ४ गणित अध्याय 1 आइए प्रयास करते हैं के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
उसके जाले में कितने त्रिभुज हैं?
123456789101112
चालाक मकड़ी का त्रिभुजाकार जाला। इसकी 12 दीवारें 1 से 12 तक अंकित हैं और बिंदु ‘क’ नीचे है।
उत्तर

चालाक मकड़ी के जाले में 10 त्रिभुज हैं।

पहले वे छोटे त्रिभुज जो तुरंत दिख जाते हैं — 6:

  • सबसे ऊपर, आयत के ऊपर वाला त्रिभुज;
  • सबसे नीचे, आयत के नीचे वाला त्रिभुज;
  • आयत के भीतर दोनों तिरछी दीवारें बीच में कटती हैं और 4 त्रिभुज और बना देती हैं — एक ऊपर, एक नीचे, एक बाएँ और एक दाएँ।

फिर बड़े त्रिभुज, हर एक दो छोटों से बना — 4 और:

  • ऊपर-बाएँ + बाएँ = एक बड़ा त्रिभुज;
  • ऊपर-दाएँ + दाएँ = एक बड़ा त्रिभुज;
  • नीचे-बाएँ + बाएँ = एक बड़ा त्रिभुज;
  • नीचे-दाएँ + दाएँ = एक बड़ा त्रिभुज।
6 छोटे त्रिभुज + 4 बड़े त्रिभुज = 10 त्रिभुज
ऐसा क्यों: साथ-साथ बैठे और एक दीवार साझा करते दो छोटे त्रिभुज मिलकर एक बड़ा त्रिभुज बना देते हैं। इसलिए केवल छोटे त्रिभुज गिनने पर कुछ छूट ही जाते हैं।
प्र2.
क्या वह बिंदु ‘क’ से चलना प्रारंभ करते हुए किसी भी दीवार पर एक बार से अधिक चले बिना वापस उसी बिंदु ‘क’ पर आ सकती है? अनुरेखण कीजिए तथा चालाक मकड़ी के पथ को दर्शाइए।
123456789101112
चालाक मकड़ी का त्रिभुजाकार जाला। इसकी 12 दीवारें 1 से 12 तक अंकित हैं और बिंदु ‘क’ नीचे है।
उत्तर

हाँ, वह आ सकती है।

कैसे पक्का करें: जाले के हर कोने पर मिलने वाली दीवारें गिनिए।

कोनावहाँ मिलती दीवारेंसम या विषम
क (नीचे का बिंदु)2सम
ऊपर का बिंदु2सम
आयत के चारों कोने4सम
बीच का कटान बिंदु4सम

हर कोने पर दीवारों की संख्या सम है, इसलिए हर दीवार पर एक बार चलकर प्रारंभ बिंदु पर लौटना संभव है।

दीवारों की संख्याओं के अनुसार एक ऐसा पथ:

12 → 5 → 4 → 3 → 8 → 7 → 6 → 11 → 10 → 9 → 2 → 1
सभी 12 दीवारें एक-एक बार चली गईं और वह वापस ‘क’ पर है।
123456789101112
वही जाला। हर दीवार पर एक बार चलने वाला एक पथ है 12, 5, 4, 3, 8, 7, 6, 11, 10, 9, 2, 1।
ऐसा क्यों: मकड़ी जिस कोने पर पहुँचती है, वहाँ से उसे निकलना भी पड़ता है, इसलिए वह दीवारों का उपयोग जोड़ों में करती है। यह तभी संभव है जब हर कोने पर दीवारों की संख्या सम हो — और यहाँ हर कोने पर वह सम है।
प्र3.
उसका भाई चतुर आयतों का उपयोग करते हुए एक जाला बनाता है। उसके जाले में आप कितने आयत देख पा रहे हैं?
चतुर का आयतों वाला जाला, जिसमें ‘क’ ऊपर और ‘ख’ नीचे है।
उत्तर

चतुर के जाले में 12 आयत हैं।

समूहों में गिनिए, ताकि कोई न छूटे।

समूहकितने
सबसे ऊपर का छोटा कमरा1
वही छोटा कमरा उसके नीचे वाले कमरे के साथ मिलाकर1
बड़े जाल की ऊपरी पंक्ति के अलग-अलग कमरे3
ऊपरी पंक्ति के दो-दो कमरे साथ मिलाकर2
ऊपरी पंक्ति के तीनों कमरे एक साथ1
निचली पंक्ति के दोनों बंद कमरे2
इनमें से हर कमरा अपने ऊपर वाले कमरे के साथ मिलाकर2
कुल12
संकेत: निचली पंक्ति के बीच वाले कमरे की नीचे की दीवार नहीं है, इसलिए वह आयत नहीं है। इसका ध्यान रखिए।
ऐसा क्यों: आयत बनने के लिए उसकी चारों दीवारें होनी चाहिए। साथ-साथ लगे दो या तीन कमरे भी मिलकर एक बड़ा आयत बनाते हैं, इसलिए उन्हें भी गिनना पड़ता है।
प्र4.
क्या वह बिंदु ‘क’ से चलना प्रारंभ करते हुए, बिंदु ‘ख’ तक किसी दीवार पर एक से अधिक बार चले बिना पहुँच सकता है? अनुरेखण कीजिए तथा चतुर के पथ को दर्शाइए।
चतुर का आयतों वाला जाला, जिसमें ‘क’ ऊपर और ‘ख’ नीचे है।
उत्तर

नहीं, वह नहीं पहुँच सकता।

क्यों नहीं: जाले के हर कोने पर दीवारें गिनिए।

  • लगभग हर कोने पर सम संख्या में दीवारें मिलती हैं — 2 या 4।
  • केवल दो कोनों पर विषम संख्या है: बीच वाली रेखा के सबसे बाएँ कोने पर और सबसे दाएँ कोने पर। इनमें से हर कोने पर 3 दीवारें मिलती हैं।
  • हर दीवार पर एक बार चलने वाला पथ एक विषम कोने से शुरू होकर दूसरे विषम कोने पर समाप्त होना चाहिए।
  • ‘क’ और ‘ख’ वे कोने नहीं हैं — ‘क’ पर केवल 2 दीवारें मिलती हैं और ‘ख’ पर भी केवल 2। दोनों सम हैं।

अत: चतुर ‘क’ से ‘ख’ तक हर दीवार पर ठीक एक बार चलते हुए नहीं पहुँच सकता।

घेरे वाले हर कोने पर 3 दीवारें मिलती हैं
वही जाला। घेरे वाले दोनों कोने ही ऐसे हैं जहाँ विषम संख्या में दीवारें मिलती हैं।
यह भी देखिए: यदि वह बीच वाली रेखा के बाएँ कोने से शुरू करे तो वह हर दीवार पर एक बार चलकर दाएँ कोने पर निकल सकता है।
ऐसा क्यों: बीच के हर कोने पर मकड़ी एक दीवार से आती है और दूसरी से जाती है, इसलिए उन कोनों पर दीवारों की संख्या सम होनी चाहिए। केवल आरंभ और अंत के कोने विषम हो सकते हैं।
प्र5.
माचिस की 5 तीलियों का उपयोग करते हुए दो त्रिभुज बनाइए। फिर दिए गए स्थान पर इस आकृति का चित्र बनाइए।
पुस्तक में दिखाई गई पाँच तीलियाँ।
उत्तर

दोनों त्रिभुज एक ही तीली को साझा करें।

  1. बीच में 1 तीली खड़ी रखिए। यही साझा भुजा है।
  2. उसके बाईं ओर 2 तीलियाँ इस तरह रखिए कि वे उसके दोनों सिरों से मिलें — यह पहला त्रिभुज है।
  3. उसी तरह दाईं ओर बाकी 2 तीलियाँ रखिए — यह दूसरा त्रिभुज है।
2 + 2 + 1 साझा तीली = 5 तीलियाँ, और 2 त्रिभुज
अलग-अलग दो त्रिभुजों के लिए 3 + 3 = 6 तीलियाँ लगतीं।

जो आकृति बनती है वह बीच में एक रेखा वाले हीरे जैसी दिखती है।

ऐसा क्यों: एक भुजा साझा करने से एक तीली बच जाती है, क्योंकि वही एक तीली दो का काम कर देती है।
क्या यह उपयोगी रहा?