कक्षा ४ गणित अध्याय 1 आइए प्रयास करते हैं के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
इन तीलियों में से दो तीलियों का स्थान परिवर्तन करके 4 त्रिभुज बनाइए।
पुस्तक में छपे माचिस की तीलियों के तीन त्रिभुज — कुल 9 तीलियाँ।
उत्तर
तीनों त्रिभुजों में कुल 9 तीलियाँ हैं। उनमें से 2 को ऊपर सरका
दीजिए, ताकि त्रिभुज अपनी भुजाएँ साझा करने लगें।
तीसरे त्रिभुज की नीचे वाली तीली हटाकर ऊपर रखिए, जिससे पहले त्रिभुज की नोक
दूसरे त्रिभुज की नोक से जुड़ जाए।
तीसरे त्रिभुज की दाईं तिरछी तीली भी हटाकर ऊपर रखिए, जिससे दूसरे त्रिभुज की
नोक तीसरे त्रिभुज की नोक से जुड़ जाए।
अब त्रिभुज गिनिए:
पहला त्रिभुज (ऊपर की ओर नुकीला) = 1
दूसरा त्रिभुज (ऊपर की ओर नुकीला) = 1
इनके बीच बना नीचे की ओर नुकीला नया त्रिभुज = 1
दाईं ओर नीचे की ओर नुकीला एक और त्रिभुज = 1
कुल = उन्हीं 9 तीलियों से 4 त्रिभुज
वही 9 तीलियाँ, जिनमें से 2 (हरी दिखाई गई) ऊपर सरका दी गई हैं।
ऐसा क्यों: अलग-अलग तीन त्रिभुजों के लिए 3 + 3 + 3 = 9
तीलियाँ चाहिए। जब त्रिभुज अपनी भुजाएँ साझा करते हैं, तब उन्हीं 9 तीलियों से त्रिभुजों की
पूरी पट्टी बन जाती है और हर नई तीली एक और त्रिभुज बंद कर देती है।
प्र2.
इन तीलियों में से 4 तीलियों को इस प्रकार हटाइए कि केवल 3 त्रिभुज शेष बचें।
पुस्तक में छपी माचिस की तीलियों की आकृति — 13 तीलियाँ।
उत्तर
यह आकृति 13 तीलियों से बनी है और इसमें 6 त्रिभुज हैं। 4 तीलियाँ इस तरह
हटाइए कि केवल 3 त्रिभुज बचें और कोई तीली अकेली न रह जाए।
बचते हैं — ऊपर-बाईं ओर का त्रिभुज, नीचे-बाईं ओर का त्रिभुज और दाईं ओर का त्रिभुज।
वही आकृति, जिसमें हटाई जाने वाली चार तीलियाँ काट दी गई हैं।
ऐसा क्यों: बीच की तीली और तिरछी तीलियाँ एक साथ कई त्रिभुजों
में शामिल हैं, इसलिए उन्हें हटाने से एक-एक तीली से एक से अधिक त्रिभुज टूट जाते हैं। बचे
हुए तीनों त्रिभुज उनमें से कोई तीली साझा नहीं करते।
प्र3.
प्रतिरूप चुनौती। क्या आप आकृतियों का एक ऐसा प्रतिरूप बना सकते हैं जिसमें निम्नलिखित का उपयोग किया गया हो — (क) 12 नलिकाएँ (स्ट्रॉ) और मिट्टी (क्ले) की 8 गोलियाँ (ख) 9 नलिकाएँ (स्ट्रॉ) और मिट्टी (क्ले) की 6 गोलियाँ (ग) 15 नलिकाएँ (स्ट्रॉ) और मिट्टी (क्ले) की 10 गोलियाँ (घ) 10 नलिकाएँ (स्ट्रॉ) और मिट्टी (क्ले) की 6 गोलियाँ
स्ट्रॉ और मिट्टी का प्रतिरूप: हर स्ट्रॉ एक किनारा और मिट्टी की हर गोली एक कोना।
उत्तर
स्ट्रॉ एक किनारा है और मिट्टी की गोली एक कोना। अत: वही ठोस
ढूँढ़िए जिसमें उतने किनारे और उतने कोने हों।
स्ट्रॉ (किनारे)
मिट्टी की गोलियाँ (कोने)
जो प्रतिरूप बन सकता है
(क)
12
8
घन या घनाभ
(ख)
9
6
त्रिभुजाकार प्रिज्म
(ग)
15
10
पंचभुजाकार प्रिज्म
(घ)
10
6
पंचभुजाकार पिरामिड
हर एक की जाँच इस प्रकार है
घन: ऊपर 4 + नीचे 4 + खड़े 4 = 12 स्ट्रॉ; ऊपर 4 + नीचे 4 = 8 गोलियाँ
त्रिभुजाकार प्रिज्म: 3 + 3 + 3 = 9 स्ट्रॉ; 3 + 3 = 6 गोलियाँ
पंचभुजाकार प्रिज्म: 5 + 5 + 5 = 15 स्ट्रॉ; 5 + 5 = 10 गोलियाँ
पंचभुजाकार पिरामिड: आधार की 5 स्ट्रॉ + ऊपर जाती 5 = 10 स्ट्रॉ; आधार की 5 गोलियाँ + ऊपर
1 = 6 गोलियाँ
हाँ — चारों प्रतिरूप बनाए जा सकते हैं।
ऐसा क्यों: प्रिज्म के दोनों सिरे एक जैसे होते हैं, इसलिए स्ट्रॉ
तीन बराबर समूहों में आती हैं। पिरामिड में आधार के हर कोने से एक स्ट्रॉ ऊपर की एक ही गोली
तक जाती है, इसलिए स्ट्रॉ दो बराबर समूहों में आती हैं।
प्र4.
इन आकृतियों को कोणों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत कीजिए। 3 कोण / 4 कोण / 5 कोण
पुस्तक में छपी सातों आकृतियाँ (क) से (छ)।
उत्तर
हर आकृति के कोने गिनिए — हर कोना एक कोण है।
3 कोण
4 कोण
5 कोण
(ख) त्रिभुज
(क) वर्ग
(ङ) पंचभुज
(घ) त्रिभुज
(ग) समांतर चतुर्भुज
(च) चार भुजाओं वाली आकृति
(छ) आयत
वही आकृतियाँ, हर एक के नीचे कोणों की संख्या लिखी हुई।
ऐसा क्यों: हर कोने पर दो भुजाएँ मिलती हैं और दो भुजाओं के
मिलने से एक कोण बनता है। इसलिए किसी आकृति में जितने कोने होते हैं, उतने ही कोण होते
हैं।
प्र5.
भुजाओं की संख्या तथा कोणों की संख्या के बीच आप क्या संबंध देखते हैं? चर्चा करें।
पुस्तक में छपी सातों आकृतियाँ (क) से (छ)।
उत्तर
ये दोनों संख्याएँ हमेशा बराबर होती हैं।
कोणों की संख्या = भुजाओं की संख्या
आकृति
भुजाएँ
कोण
त्रिभुज
3
3
वर्ग, आयत
4
4
पंचभुज
5
5
षट्भुज
6
6
ऐसा क्यों: आकृति पर उँगली फेरकर चारों ओर घूमिए। हर भुजा के
अंत में एक कोना मुड़ना पड़ता है और हर कोना एक कोण है। इसलिए मुड़ने की संख्या भुजाओं की
संख्या के बराबर ही होती है।