कक्षा ४ गणित अध्याय 10 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
जोड़िए — (क) 2783 + 378 (ख) 8948 + 97 (ग) 7006 + 367 (घ) 8009 + 485 (ङ) 6062 + 3809 (च) 3792 + 2688 (छ) 4999 + 3888 (ज) 5005 + 4895 (झ) 5768 + 4053 (ञ) 3480 + 479
उत्तर
प्रश्नहासिल कहाँ बनता हैउत्तर
(क)2783 + 378इकाई और दहाई3161
(ख)8948 + 97इकाई, दहाई और सैकड़ा 9045
(ग)7006 + 367इकाई7373
(घ)8009 + 485इकाई और दहाई8494
(ङ)6062 + 3809कहीं नहीं9871
(च)3792 + 2688दहाई और सैकड़ा 6480
(छ)4999 + 3888इकाई, दहाई और सैकड़ा 8887
(ज)5005 + 4895इकाई, दहाई और सैकड़ा 9900
(झ)5768 + 4053इकाई, दहाई और सैकड़ा 9821
(ञ)3480 + 479दहाई और सैकड़ा3959

एक प्रश्न पूरा हल करके देखिए:

(छ) 4999 + 3888
इकाई: 9 + 8 = 17 → 7 लिखिए, हासिल 1
दहाई: 9 + 8 + 1 = 18 → 8 लिखिए, हासिल 1
सैकड़ा: 9 + 8 + 1 = 18 → 8 लिखिए, हासिल 1
हजार: 4 + 3 + 1 = 8
= 8887
संकेत: (छ) को ऐसे भी सोचिए — 5000 + 3888 = 8888, फिर 1 घटाइए, उत्तर 8887।
प्र2.
घटाइए — (क) 4456 – 2768 (ख) 5300 – 467 (ग) 8067 – 4546 (घ) 5302 – 1034 (ङ) 8004 – 3107 (च) 3400 – 897 (छ) 9382 – 4857 (ज) 7561 – 2933 (झ) 6478 – 5986 (ञ) 3444 – 2555
उत्तर
प्रश्नउधार कहाँ लेना हैउत्तर
(क)4456 − 2768इकाई, दहाई, सैकड़ा 1688
(ख)5300 − 467दो शून्यों के आर-पार 4833
(ग)8067 − 4546कहीं नहीं 3521
(घ)5302 − 1034दहाई के शून्य के आर-पार 4268
(ङ)8004 − 3107दो शून्यों के आर-पार 4897
(च)3400 − 897दो शून्यों के आर-पार 2503
(छ)9382 − 4857इकाई और दहाई 4525
(ज)7561 − 2933इकाई और सैकड़ा 4628
(झ)6478 − 5986दहाई और सैकड़ा 492
(ञ)3444 − 2555इकाई, दहाई, सैकड़ा 889

एक प्रश्न पूरा हल करके देखिए:

(च) 3400 − 897
इकाई: 0 − 7 नहीं हो सकता। दहाई में भी 0 है।
    4 सैकड़ा → 3 सैकड़ा और 10 दहाई
    10 दहाई → 9 दहाई और 10 इकाई
इकाई: 10 − 7 = 3   दहाई: 9 − 9 = 0
सैकड़ा: 3 − 8 नहीं हो सकता → 1 हजार उधार लीजिए, 13 − 8 = 5
हजार: 2
= 2503
स्वयं जाँचिए: 2503 + 897 = 3400।
प्र3.
वर्गों में 1– 9 तक संख्याएँ भरिए। दो आस-पास के वर्गों (एक रेखा से जुड़े वर्गों) का अंतर विषम होना चाहिए। क्या आप किसी अन्य विधि/प्रकार से इन वर्गों को भर सकते हैं?
नौ खाली वर्ग। हर जोड़ी आस-पास के वर्गों को एक रेखा जोड़ती है।
उत्तर
नौ खाली वर्ग। हर जोड़ी आस-पास के वर्गों को एक रेखा जोड़ती है।

अंतर विषम होने के लिए एक संख्या विषम और दूसरी सम होनी चाहिए।

विषम − सम = विषम   (जैसे 7 − 4 = 3)
विषम − विषम = सम   (7 − 3 = 4)
सम − सम = सम   (8 − 4 = 4)

इसलिए विषम और सम संख्याएँ शतरंज की बिसात के काले-सफेद खानों जैसी बैठनी चाहिए। 1 से 9 तक 5 विषम संख्याएँ (1, 3, 5, 7, 9) और 4 सम संख्याएँ (2, 4, 6, 8) हैं। पाँचों विषम संख्याएँ चार कोनों और बीच के वर्ग में रखिए।

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एक सही भराई। हर जुड़ी हुई जोड़ी में एक विषम और एक सम संख्या है।
कुछ जाँचिए: 1 और 2 → 1   5 और 6 → 1
1 और 4 → 3   3 और 6 → 3   5 और 8 → 3
सभी अंतर विषम हैं। ✔

हाँ, और भी तरीके हैं। विषम संख्याएँ कोनों और बीच में ही रखिए, बस उन्हें आपस में बदल दीजिए।

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एक और सही भराई। विषम संख्याएँ अब भी कोनों और बीच में हैं।
ऐसा क्यों होता है: पाँच विषम संख्याएँ एक रंग के ठीक पाँच खानों में बैठ जाती हैं और चार सम संख्याएँ दूसरे रंग के चार खानों में।
प्र4.
क्या आप इसी प्रकार आस-पास के वर्गों को ऐसी संख्याओं से भर सकते हैं जिससे उन संख्याओं का अंतर सम संख्या हो?
नौ खाली वर्ग। हर जोड़ी आस-पास के वर्गों को एक रेखा जोड़ती है।
उत्तर
नौ खाली वर्ग। हर जोड़ी आस-पास के वर्गों को एक रेखा जोड़ती है।

नहीं, ऐसा नहीं हो सकता।

अंतर सम होने के लिए दोनों संख्याएँ एक ही प्रकार की होनी चाहिए:
विषम और विषम   (9 − 5 = 4)   या   सम और सम   (8 − 2 = 6)

हर वर्ग किसी दूसरे वर्ग से जुड़ा है और वे आगे और वर्गों से, इस तरह नौ के नौ वर्ग आपस में जुड़े हैं। इसलिए यदि पहला वर्ग विषम है, तो उसका पड़ोसी भी विषम होगा, फिर अगला भी — नौ की नौ संख्याएँ विषम होनी पड़ेंगी

परंतु 1 से 9 तक केवल 5 विषम संख्याएँ हैं: 1, 3, 5, 7, 9
और केवल 4 सम संख्याएँ हैं: 2, 4, 6, 8
एक ही प्रकार की नौ संख्याएँ मिल ही नहीं सकतीं।
ऐसा क्यों होता है: पूरी जाली एक ही टुकड़े में जुड़ी है। पहला वर्ग तय होते ही बाकी सब वर्ग उसी प्रकार के हो जाने को विवश हैं।
करके देखिए: 1 से 9 तक यह असंभव है। पर 2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, 16, 18 से भरिए तो हर अंतर सम होगा, क्योंकि ये सब सम संख्याएँ हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?