कक्षा ४ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 2 चर्चा कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
पहले के समय में पत्रों को दूसरों तक पहुँचने में बहुत समय लगता था। आपको क्या लगता है कि इससे सूचनाओं के आदान-प्रदान पर क्या प्रभाव पड़ता होगा?
उत्तर

समाचार लोगों तक बहुत देर से पहुँचता था, इसलिए सब कुछ धीमा चलता था।

  • पत्र पहुँचने में कई दिन और उत्तर आने में कई सप्ताह लगते थे। दादाजी स्वयं यही बताते हैं।
  • जब तक उत्तर आता, समाचार पुराना हो चुका होता था।
  • बीमारी जैसी आवश्यक सूचना समय पर नहीं भेजी जा सकती थी।
  • लोग लंबे पत्र लिखते थे, क्योंकि दुबारा शीघ्र नहीं लिख पाते थे।
  • वे धैर्य से प्रतीक्षा करना सीख गए थे और पत्रों को सँभालकर रखते थे।
ऐसा क्यों होता था: पत्र को स्वयं रेल या बस से यात्रा करनी पड़ती थी। वह उस वाहन से तेज नहीं चल सकता था।
प्र2.
अब लोग जिस तरह से संचार करते हैं, वह पहले से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर

आज संदेश कुछ ही सेकंड में पहुँच जाता है, इसलिए हम बहुत अधिक बात करते हैं।

पहलेअब
पत्र को दिन या सप्ताह लगते थे।संदेश सेकंडों में पहुँच जाता है।
महीने में एक बार लिखते थे।दिन में कई बार लिख सकते हैं।
केवल शब्द पढ़ पाते थे।वीडियो कॉल पर चेहरा दिखता है और आवाज सुनाई देती है।
कागज, टिकट और डाकपेटी चाहिए थी।केवल फोन और इंटरनेट चाहिए।

एक बात छूट गई है। दादाजी कहते हैं कि उन्हें हाथ से लिखे पत्र भेजने और पाने का आनंद याद आता है।

प्र3.
आजकल छोटे-छोटे संदेशों से समाचार साझा करना सरल हो गया है, परंतु कभी-कभी गलत सूचना भी बहुत तीव्रता से प्रसारित हो जाती है। हम कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो समाचार हम साझा कर रहे हैं, वह सही हो?
उत्तर

पहले समाचार की जाँच कीजिए, उसके बाद ही उसे आगे भेजिए।

  1. देखिए कि किसने भेजा है। क्या आप उस व्यक्ति को अच्छी तरह जानते हैं?
  2. वही समाचार समाचार-पत्र, टेलीविजन या सरकारी वेबसाइट पर ढूँढ़िए।
  3. तिथि देखिए। पुराना समाचार प्रायः नया बताकर भेज दिया जाता है।
  4. संदेह हो तो किसी बड़े या शिक्षक से पूछिए।
  5. यदि जाँच न कर सकें, तो उसे आगे मत भेजिए।
यह क्यों आवश्यक है: गलत संदेश सही संदेश जितनी ही तीव्रता से फैलता है। इससे लोग डर सकते हैं या गलत काम कर सकते हैं।
याद रखिए: संदेश आगे आने से वह सच नहीं हो जाता। फोन पर आ जाना कोई प्रमाण नहीं है।
क्या यह उपयोगी रहा?