कक्षा ४ हिंदी अध्याय 11 आपकी कविता के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
रजनी, मदन की कविता को गाते हुए विद्यालय जा रही थी। उसे बहुत आनंद आ रहा था। चलते-चलते अचानक उसे एक पेड़ पर कुछ बंदर दिखाई दिए। वे एक डाल से दूसरी डाल पर कूद रहे थे। जब वह थोड़ा आगे बढ़ी तो उसे एक सियार दिखाई दिया। सियार ‘हुआँ-हुआँ’ कर रहा था। अब सियार को आधार बनाकर आप कविता को पूरा करने में रजनी की सहायता कीजिए।
डाल-डाल क्यों कूद रहा? खों-खों-खों क्यों बोल रहा? बंदर जी, भाई बंदर जी! . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
पुस्तक के पृष्ठ 137 का पट — ऊपर बंदर वाली तीन पंक्तियाँ छपी हैं, नीचे की खाली पंक्तियाँ आपको भरनी हैं।
उत्तर

पुस्तक में बंदर वाला हिस्सा पहले से छपा है। उसी ढाँचे पर सियार वाला हिस्सा बनाना है।

पहले ढाँचा समझिए — बंदर वाली तीन पंक्तियों में यह क्रम है —

  1. पहली पंक्ति — बंदर क्या कर रहा है (डाल-डाल कूदना)।
  2. दूसरी पंक्ति — बंदर कैसी आवाज़ निकाल रहा है (खों-खों-खों)।
  3. तीसरी पंक्ति — उसे नाम लेकर पुकारना (बंदर जी, भाई बंदर जी!)।

पहली दोनों पंक्तियों का अंत “रहा?” पर होता है। यही तुक है, और इसी से गाने में लय बनती है।

अब सियार के लिए यही तीन बातें चाहिए — वह क्या कर रहा है, कैसी आवाज़ निकाल रहा है (हुआँ-हुआँ), और उसे पुकारना।

डाल-डाल क्यों कूद रहा? खों-खों-खों क्यों बोल रहा? बंदर जी, भाई बंदर जी! झाड़ी-झाड़ी क्यों डोल रहा? हुआँ-हुआँ क्यों बोल रहा? सियार जी, भाई सियार जी!
पूरी हुई कविता — ऊपर पुस्तक की छपी पंक्तियाँ, नीचे सियार पर जोड़ी गई पंक्तियाँ।
डाल-डाल क्यों कूद रहा?
खों-खों-खों क्यों बोल रहा?
बंदर जी, भाई बंदर जी!
झाड़ी-झाड़ी क्यों डोल रहा?
हुआँ-हुआँ क्यों बोल रहा?
सियार जी, भाई सियार जी!
यही पंक्तियाँ क्यों: सियार झाड़ियों में छिपकर घूमता है, इसलिए पहली पंक्ति में “झाड़ी-झाड़ी” आया। उसकी अपनी आवाज़ “हुआँ-हुआँ” है, जो पाठ में ही दी गई है। और अंत में उसे वैसे ही पुकारा गया जैसे बंदर को पुकारा गया था।
संकेत: आप अपनी पंक्तियाँ भी बना सकते हैं। बस दो बातें ध्यान रखिए — पहली दो पंक्तियों का अंत “रहा?” पर हो, और आवाज़ वाली पंक्ति में “हुआँ-हुआँ” ज़रूर आए। जैसे — “गली-गली क्यों घूम रहा? हुआँ-हुआँ क्यों बोल रहा? सियार जी, भाई सियार जी!”
क्या यह उपयोगी रहा?