कक्षा ४ हिंदी अध्याय 11 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
मुहावरे हमेशा एक विशेष अर्थ देते हैं जो उनके शाब्दिक अर्थ से भिन्न होता है। जैसे– ‘फूला न समाना’ मुहावरे का अर्थ है — अत्यधिक प्रसन्न होना। वाक्य प्रयोग – विद्यालय की खेल प्रतियोगिता में पुरस्कृत होकर राजू फूला न समा रहा था। अब आप अपनी लेखन-पुस्तिका में निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखते हुए उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए। (क) मन में लड्डू फूटना (ख) मुँह ताकना
उत्तर

दोनों मुहावरे इसी पाठ से लिए गए हैं।

मुहावराअर्थपाठ में कहाँ आयावाक्य प्रयोग
मन में लड्डू फूटनामन ही मन बहुत खुश होना“अब तो सचमुच उसके मन में लड्डू फूटने लगे।” (पृष्ठ 129)परीक्षा में पहला स्थान पाने की खबर सुनते ही मीना के मन में लड्डू फूटने लगे।
मुँह ताकनाकुछ समझ में न आने पर चुपचाप दूसरे की ओर देखते रह जाना“सुनने वाले एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे।” (पृष्ठ 130)कठिन सवाल सुनते ही सारे बच्चे एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे।
मुहावरा क्या होता है: मुहावरे का अर्थ उसके शब्दों से नहीं निकलता। “मन में लड्डू फूटना” में सचमुच कोई लड्डू नहीं फूटता। इसका अर्थ है — बहुत खुश होना। इसी तरह “मुँह ताकना” का अर्थ किसी का चेहरा देखना नहीं, बल्कि चुपचाप हैरान रह जाना है।
संकेत: मुहावरा वाक्य में अकेला नहीं बैठता। वह क्रिया के साथ रूप बदलता है — लड्डू फूटने लगे, मुँह ताकने लगे
प्र2.
निम्नलिखित गद्यांश में कहीं-कहीं विराम चिह्नों का प्रयोग हुआ है। इस गद्यांश को उचित ठहराव के साथ पढ़िए। — “उसे देखते ही मदन के मुँह से निकल पड़ा, “ताक-झाँक का खोजत है?” तीनों पंक्तियों को रटते हुए वह चलता गया। रटते-रटते उसे अपने आप एक और पंक्ति सूझ गई, “हम जानत का ढूँढ़त है।””
उत्तर

यह बोलकर पढ़ने का अभ्यास है। हर विराम चिह्न बताता है कि कहाँ रुकना है और कितनी देर रुकना है।

चिह्ननामपढ़ते समय क्या करें
,अल्प विरामज़रा-सा रुकिए — एक पल भर।
पूर्ण विरामवाक्य खत्म — थोड़ा लंबा रुकिए और साँस लीजिए।
?प्रश्नवाचक चिह्नआवाज़ ऊपर उठाइए, जैसे सचमुच पूछ रहे हों।
“ ”उद्धरण चिह्नभीतर की बात किसी और की है — आवाज़ बदलकर बोलिए।

ठहराव के साथ ऐसे पढ़िए (/ का अर्थ है छोटा ठहराव, // का अर्थ है बड़ा ठहराव) —

उसे देखते ही मदन के मुँह से निकल पड़ा / “ताक-झाँक का खोजत है?” //
तीनों पंक्तियों को रटते हुए वह चलता गया। //
रटते-रटते उसे अपने आप एक और पंक्ति सूझ गई / “हम जानत का ढूँढ़त है।”
ठहराव क्यों ज़रूरी है: बिना रुके पढ़ने पर सारे शब्द आपस में मिल जाते हैं और अर्थ बिगड़ जाता है। रुक-रुककर पढ़ने से सुनने वाले को हर बात साफ़ समझ आती है।
संकेत: इस गद्यांश में अंतिम पंक्ति “हम जानत का ढूँढ़त है” पूर्ण विराम के साथ छपी है, जबकि पाठ में पृष्ठ 128 और 129 पर यही पंक्ति “हम जानत का ढूँढ़त है!” विस्मयादिबोधक चिह्न के साथ छपी है। पाठ वाला रूप ही मूल है। वहाँ मदन खुशी में यह पंक्ति बोलता है, इसलिए वहाँ ! लगा है।
प्र3.
नीचे लिखे वाक्यों में उपयुक्त विराम चिह्न लगाकर वाक्य पूरा कीजिए — (क) क्या ताक झाँक कर रहे हो (ख) अरे वाह क्या चौका मारा है (ग) आइए राजा से मिलवाता हूँ (घ) दादी देखते ही बोली कहाँ जा रहे हो
उत्तर
दिया गया वाक्यविराम चिह्न लगाकरकौन-सा चिह्न और क्यों
(क) क्या ताक झाँक कर रहे होक्या ताक-झाँक कर रहे हो?यह प्रश्न है, इसलिए अंत में ? लगा। ‘ताक-झाँक’ जुड़ा हुआ शब्द है, इसलिए बीच में - (योजक चिह्न) लगा।
(ख) अरे वाह क्या चौका मारा हैअरे वाह! क्या चौका मारा है।‘अरे वाह’ खुशी का उद्गार है, इसलिए उसके बाद ! लगा। आगे का वाक्य पूरा होता है, इसलिए अंत में लगा।
(ग) आइए राजा से मिलवाता हूँआइए, राजा से मिलवाता हूँ।‘आइए’ के बाद ज़रा-सा ठहराव है, इसलिए , लगा। वाक्य खत्म होने पर लगा।
(घ) दादी देखते ही बोली कहाँ जा रहे होदादी देखते ही बोली, “कहाँ जा रहे हो?”‘बोली’ के बाद , लगा। दादी की अपनी कही बात है, इसलिए वह “ ” के भीतर आई और प्रश्न होने के कारण भीतर ? लगा।
नियम एक पंक्ति में: जहाँ कुछ पूछा जाए वहाँ ?, जहाँ खुशी या आश्चर्य हो वहाँ !, जहाँ ज़रा-सा ठहरना हो वहाँ ,, और जहाँ वाक्य पूरा हो वहाँ लगता है। किसी के अपने कहे शब्द हमेशा “ ” के भीतर रखे जाते हैं।
अपना उदाहरण: माँ ने मुझसे पूछा, “क्या तुमने खाना खा लिया?” मैंने कहा, “हाँ, खा लिया।” अरे वाह! खाना आज बहुत स्वादिष्ट था।
क्या यह उपयोगी रहा?