प्र1.
एक व्यक्ति के घर के बाहर दस मीटर ऊँचा एक खजूर का पेड़ था। एक बंदर उस पर चढ़ने लगा। वह पेड़ की चोटी पर पहुँचना चाहता था। समस्या यह थी कि वह दिन के समय तो 5 मीटर चढ़ जाता था परंतु जब रात होती तो वह 4 मीटर नीचे फिसल जाता था। क्या आप बता सकते हैं कि बंदर पेड़ की चोटी पर पहुँचने में कितने दिन में सफल होगा?
उत्तर
उत्तर — बंदर छठवें दिन पेड़ की चोटी पर पहुँच जाएगा।
ऐसे गिनिए — दिन में वह 5 मीटर ऊपर जाता है, रात में 4 मीटर नीचे फिसल जाता है। मतलब एक पूरे दिन-रात में वह केवल 1 मीटर ही ऊपर बढ़ पाता है।
| दिन | दिन में चढ़कर कहाँ | रात में फिसलकर कहाँ |
|---|---|---|
| पहला दिन | 0 + 5 = 5 मीटर | 5 – 4 = 1 मीटर |
| दूसरा दिन | 1 + 5 = 6 मीटर | 6 – 4 = 2 मीटर |
| तीसरा दिन | 2 + 5 = 7 मीटर | 7 – 4 = 3 मीटर |
| चौथा दिन | 3 + 5 = 8 मीटर | 8 – 4 = 4 मीटर |
| पाँचवाँ दिन | 4 + 5 = 9 मीटर | 9 – 4 = 5 मीटर |
| छठवाँ दिन | 5 + 5 = 10 मीटर — चोटी पर! | अब फिसलने की बारी ही नहीं आई |
असली पेच यहाँ है: हर रात वह 4 मीटर फिसलता है। पर छठवें दिन वह चढ़ते-चढ़ते सीधे 10 मीटर पर, यानी चोटी पर पहुँच जाता है। चोटी पर पहुँचने के बाद वह वहीं से उतर जाएगा, इसलिए उस रात फिसलने का सवाल ही नहीं उठता।
संकेत: यदि केवल “1 मीटर रोज़” गिनते रहें तो 10 दिन का गलत उत्तर आ जाएगा। इसलिए अंतिम दिन को अलग से देखना ज़रूरी है। पुस्तक ने भी पृष्ठ 138 पर उलटे अक्षरों में यही उत्तर छापा है — छठवें दिन।