अगर मदन घर से बाहर न निकलता, तो कहानी की कोई भी घटना होती ही नहीं।
- उसे कवि-सम्मेलन का ढिंढोरा सुनाई ही नहीं देता।
- रास्ते में कुत्ता, भैंस, चिड़िया और साँप न दिखते, इसलिए कविता की पंक्तियाँ भी न बनतीं।
- धन्नू शाह से भेंट न होती और कविता की आखिरी पंक्ति कभी पूरी न होती।
- राजा रात में वह कविता न दोहराते, और चोर खजाना लूट ले जाते।
- मदन और उसकी माँ पहले जैसे ही गरीब रहते।