कक्षा ४ हिंदी अध्याय 11 समझ और अनुभव के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“सुरुर-सुरुर का पीबत है” पंक्ति में पीने के साथ ‘सुरुर-सुरुर’ शब्द का ही प्रयोग क्यों किया गया है?
उत्तर

क्योंकि ‘सुरुर-सुरुर’ पानी पीने की आवाज़ है। यह शब्द उसी आवाज़ से बना है।

पंक्ति का सरल अर्थ — “सुरुर-सुरुर करके कौन पानी पी रहा है?”

कवि जो चित्र बना रहा है — एक तालाब है। उसके किनारे भैंस खड़ी है। वह मुँह पानी में डालकर लंबे-लंबे घूँट भर रही है और उससे सुरुर-सुरुर की आवाज़ आ रही है। मदन ने यही दृश्य देखा और वही आवाज़ कविता में रख दी।

क्यों ऐसा शब्द: आवाज़ वाला शब्द सुनते ही कान में वही आवाज़ गूँज जाती है। “पानी पी रहा है” कहने से केवल बात पता चलती है, पर “सुरुर-सुरुर” कहने से दृश्य सुनाई भी देने लगता है।
संकेत: कविता के बाकी शब्द भी ऐसे ही बने हैं — खोदने की आवाज़ खुदुर-खुदुर और रेंगने की आवाज़ सरक-सरक
प्र2.
राजदरबार में कवि-सम्मेलन हो रहा है। सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फियाँ पुरस्कार में मिलेंगी। सौ अशर्फियों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर

अशर्फी पुराने ज़माने का सोने का सिक्का था। उन दिनों यही सबसे बड़ा सिक्का चलता था।

इसलिए सौ अशर्फियाँ का अर्थ है — बहुत बड़ी रकम, बहुत बड़ा इनाम।

  • इतने धन से एक गरीब परिवार सालों आराम से रह सकता था।
  • तभी तो सुनते ही “मदन चौकन्ना हो गया” और सोचा — “यह तो बना-बनाया अवसर है।”
  • वह बिना कविता जाने ही सीधे राजमहल की ओर चल पड़ा।
क्यों ज़रूरी: यही सौ अशर्फियाँ पूरी कहानी शुरू करती हैं। इनाम इतना बड़ा न होता, तो मदन राजमहल जाता ही नहीं और कविता कभी बनती ही नहीं।
क्या आप जानते हैं: आजकल अशर्फी नहीं चलती। आज इनाम रुपयों में दिया जाता है।
प्र3.
“सरक-सरक कहाँ भागत है” पंक्ति में ‘सरक-सरक’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है? यहाँ ‘सरक-सरक’ का ही प्रयोग क्यों किया गया है?
उत्तर

‘सरक-सरक’ साँप के लिए आया है।

पंक्ति का सरल अर्थ — “सरकता हुआ कौन भाग रहा है?”

कवि जो चित्र बना रहा है — मदन को ‘सर्र’ की आवाज़ सुनाई दी। उसने चौंककर देखा तो एक साँप ज़मीन पर रेंगता जा रहा था। साँप के पैर नहीं होते। वह अपने पूरे शरीर को ज़मीन से रगड़ता हुआ आगे खिसकता है। इसी खिसकने को ‘सरकना’ कहते हैं।

यही शब्द क्यों: ‘सरक-सरक’ शब्द बोलने में ही साँप के रेंगने जैसी आवाज़ बनती है। ‘भागना’ या ‘चलना’ कहने से वह चिकनी, फिसलती चाल सामने नहीं आती।
संकेत: कहानी में यही पंक्ति आगे काम आती है। जब चोर “दबे पाँव बाहर सरकने लगे”, तभी राजा ने कहा — “सरक-सरक कहाँ भागत है?” चोरों को लगा कि उन्हें देख लिया गया।
प्र4.
“अब कोई चारा नहीं। बस राजा साहब से दया की भीख माँग सकता हूँ।” ऐसा धन्नू शाह ने क्यों सोचा?
उत्तर

धन्नू शाह ने ऐसा इसलिए सोचा क्योंकि राजा ने कविता में उसका नाम लेकर पुकार दिया था — “धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह!”

उसे लगा कि अब बचने का कोई रास्ता नहीं बचा, क्योंकि —

  • राजा ने पहले कहा “खुदुर-खुदुर का खोदत है?” — और वे सेंध के लिए ज़मीन खोद ही रहे थे।
  • फिर कहा “सुरुर-सुरुर का पीबत है?” — और उसी समय धन्नू शाह पानी का घूँट निगल रहा था।
  • फिर “ताक-झाँक का खोजत है?” और “सरक-सरक कहाँ भागत है?” — वे ठीक यही कर रहे थे।
  • आखिर में अपना नाम सुनकर उसे पक्का यकीन हो गया कि राजा सब देख रहे हैं।

यहाँ ‘चारा’ का अर्थ है उपाय या बचने का रास्ता

क्यों: उसे नहीं पता था कि यह तो बस एक कविता है। संयोग से हर पंक्ति उसी के काम पर बैठ रही थी, इसलिए उसने भागने की जगह पैर पकड़कर माफ़ी माँग ली।
क्या यह उपयोगी रहा?