कक्षा ४ हिंदी अध्याय 11 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“अब मैं तुझे और बिठाकर नहीं खिला सकती।” मदन की माँ ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर

मदन की माँ ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि घर में कमाई का कोई साधन नहीं था और मदन कुछ भी काम नहीं करता था।

  • पाठ में लिखा है — “माँ-बेटा बहुत गरीब थे। उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं था।”
  • इतनी गरीबी में भी “मदन दिनभर खेल-कूद में ही समय बिता देता था।”
  • यह देखकर माँ परेशान हो गई और बोली — “जा, कुछ पैसे कमाकर ला।”
क्यों: माँ अकेली थी और उसके पास आमदनी नहीं थी। इसलिए वह अब बड़े होते बेटे को बिना काम के खाना नहीं खिला सकती थी।
संकेत: पुस्तक में यह पंक्ति पृष्ठ 127 पर “अब मैं तुझे बिठाकर नहीं खिला सकती।” छपी है, पर पृष्ठ 134 के प्रश्न में इसे “अब मैं तुझे और बिठाकर…” लिखा गया है। दोनों का अर्थ एक ही है। पाठ वाली पंक्ति ही मूल है।
प्र2.
जब मदन ने महल का रास्ता पूछा तो धन्नू शाह ने ऐसा क्यों कहा कि अगर वह नहीं तो और कौन जानेगा?
उत्तर

धन्नू शाह ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह स्वयं चोर था और उसी रात राजमहल के खजाने में सेंध लगाने की तैयारी कर चुका था।

  • राजमहल का चप्पा-चप्पा वह पहले से देख चुका था। इसलिए रास्ता उसे सबसे अच्छी तरह मालूम था।
  • यह बात उसके मुँह से घमंड में निकल गई — “मुझे नहीं तो और किसे मालूम होगा?”
  • मदन को उसकी असलियत पता नहीं थी। उसने सोचा कि “अवश्य यह राजमहल का ही कोई कर्मचारी होगा।”
क्यों: कहानी में यही बात आगे बड़ा मोड़ लाती है। उसी आदमी का नाम मदन की कविता में आ गया, और उसी नाम से वह पकड़ा गया।
प्र3.
कहानी में मदन की कविता को विचित्र कहा गया है। क्या आपको भी ऐसा ही लगता है? कारण सहित लिखिए।
उत्तर

हाँ, कविता सचमुच विचित्र है — पर विचित्र होने के साथ-साथ बहुत मज़ेदार भी है।

विचित्र क्यों लगती है —

  • इसमें खुदुर-खुदुर, सुरुर-सुरुर, सरक-सरक जैसे आवाज़ वाले शब्द हैं। इनका कोई सीधा अर्थ नहीं होता।
  • क्रिया के रूप रोज़ की बोली से अलग हैं — खोदत, पीबत, खोजत, ढूँढ़त, भागत।
  • कविता किसी का नाम नहीं लेती। बस “का” कहकर पूछती रहती है कि कौन खोद रहा है, कौन पी रहा है।

फिर भी अच्छी क्यों लगती है —

  • हर पंक्ति का अंत मिलता-जुलता है, इसलिए गाने में मज़ा आता है।
  • हर पंक्ति के पीछे एक सच्चा दृश्य है — खोदता कुत्ता, पानी पीती भैंस, झाँकती चिड़िया, सरकता साँप।
असली कमाल: जो कविता सबको बेमतलब लगी, वही चोरों को अपनी चोरी का पूरा हाल लगी। इसीलिए कहानी का नाम “कविता का कमाल” है।
प्र4.
राजा को मदन की कविता पहेली जैसी लगी। आपको यह कैसी लगी?
उत्तर

यह आपकी अपनी राय का प्रश्न है। पहले एक शब्द में राय दीजिए, फिर कारण लिखिए।

अच्छे उत्तर में ये बातें आ सकती हैं —

  • कविता आपको मज़ेदार लगी, पहेली जैसी लगी, या कठिन लगी।
  • कौन-सी पंक्ति सबसे अच्छी लगी और क्यों।
  • गाते समय कैसा लगा — क्या लय अपने आप बन जाती है?
नमूना उत्तर: मुझे यह कविता बहुत मज़ेदार लगी। इसे पढ़ते ही मन में चित्र बनने लगते हैं। “सुरुर-सुरुर का पीबत है?” सुनते ही पानी पीती भैंस दिखाई देने लगती है। राजा को यह पहेली लगी, क्योंकि उन्होंने वे दृश्य नहीं देखे थे जो मदन ने रास्ते में देखे थे।
क्या यह उपयोगी रहा?