प्र1.
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को उनके क्रम से मिलाएँ —
| कविता की पंक्ति (पुस्तक में दिए क्रम में) | दिए गए क्रमांक (पुस्तक में दिए क्रम में) |
|---|---|
| हमसे न बच सकत है। | 6 |
| खुदुर-खुदुर का खोदत है? | 2 |
| जानत हो हम देखत हैं। | 1 |
| सुरुर-सुरुर का पीबत है? | 7 |
| ताक-झाँक का खोजत है? | 8 |
| हम जानत का ढूँढ़त है! | 3 |
| धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह! | 4 |
| सरक-सरक कहाँ भागत है? | 5 |
दोनों सूचियाँ अलग-अलग क्रम में हैं। हर पंक्ति को उसके सही क्रमांक से जोड़िए। पुस्तक में पहली जोड़ी की रेखा बनाकर दिखा दी गई है।
उत्तर
पुस्तक में एक जोड़ी पहले से मिलाकर दिखाई गई है — “हमसे न बच सकत है।” का क्रमांक 7 है। बाकी जोड़ियाँ इस प्रकार बनेंगी —
| कविता की पंक्ति | सही क्रमांक |
|---|---|
| हमसे न बच सकत है। | 7 |
| खुदुर-खुदुर का खोदत है? | 1 |
| जानत हो हम देखत हैं। | 6 |
| सुरुर-सुरुर का पीबत है? | 2 |
| ताक-झाँक का खोजत है? | 3 |
| हम जानत का ढूँढ़त है! | 4 |
| धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह! | 8 |
| सरक-सरक कहाँ भागत है? | 5 |
अब क्रम से लगाने पर पूरी कविता ऐसी बनती है —
1. खुदुर-खुदुर का खोदत है?
2. सुरुर-सुरुर का पीबत है?
3. ताक-झाँक का खोजत है?
4. हम जानत का ढूँढ़त है!
5. सरक-सरक कहाँ भागत है?
6. जानत हो हम देखत हैं।
7. हमसे न बच सकत है।
8. धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह!
2. सुरुर-सुरुर का पीबत है?
3. ताक-झाँक का खोजत है?
4. हम जानत का ढूँढ़त है!
5. सरक-सरक कहाँ भागत है?
6. जानत हो हम देखत हैं।
7. हमसे न बच सकत है।
8. धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह!
क्रम ऐसा ही क्यों: मदन ने ये पंक्तियाँ उसी क्रम में बनाई थीं जिस क्रम में रास्ते में चीज़ें मिलीं — पहले कुत्ता (खोदना), फिर भैंस (पानी पीना), फिर चिड़िया (ताक-झाँक), फिर साँप (सरकना), और सबसे अंत में रास्ता बताने वाला धन्नू शाह। पाठ के पृष्ठ 129 पर पूरी कविता इसी क्रम में छपी है।